
Gold and silver latest update : आज 31 अक्टूबर 2025 को सोने और चांदी के भाव में जोरदार उछाल देखने को मिला है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,196 रुपए की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह अब 1,20,815 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच चुका है। कल यानी 30 अक्टूबर को यही सोना 1,19,619 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
हालांकि, इस महीने की बात करें तो 17 अक्टूबर को सोने ने अपना ऑलटाइम हाई छुआ था, जब इसकी कीमत 1,30,874 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी। उस ऊंचाई से अब तक सोने का भाव करीब 10,059 रुपए की गिरावट दर्ज कर चुका है, जो बाजार में उतार-चढ़ाव की गवाही देता है। फिर भी आज की तेजी निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर लेकर आई है।
चांदी के मोर्चे पर भी बाजार में हलचल मची हुई है। IBJA के अनुसार, चांदी की कीमत में 2,359 रुपए की शानदार बढ़त देखी गई है, जिसके बाद यह 1,49,142 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। कल यह 1,46,783 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी। इस महीने चांदी ने भी अपना ऑलटाइम हाई बनाया था, जब यह 1,78,100 रुपए प्रति किलोग्राम तक चली गई थी। उस चोटी से अब तक चांदी के दाम में 28,958 रुपए की भारी गिरावट आ चुकी है, लेकिन आज की तेजी ने फिर से चमक बिखेर दी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि IBJA द्वारा घोषित ये कीमतें शुद्ध धातु की कीमतें हैं, जिनमें 3% GST, मेकिंग चार्ज, ज्वेलर्स का मार्जिन या कोई अन्य लोकल टैक्स शामिल नहीं होता। इसलिए विभिन्न शहरों में ज्वेलरी की दुकानों पर सोने-चांदी के रेट इससे थोड़े ऊंचे या अलग हो सकते हैं। फिर भी, ये आधिकारिक रेट्स कई महत्वपूर्ण काम आते हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सोवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने के लिए इन्हीं रेट्स का आधार लेता है। इसके अलावा, कई प्रमुख बैंक गोल्ड लोन की ब्याज दरें और वैल्यूएशन तय करने में भी IBJA के इन आंकड़ों पर भरोसा करते हैं। 24 carat gold price

इस साल सोने-चांदी में बेतहाशा तेजी
Gold price today in india : 2025 का साल अब तक सोने और चांदी दोनों के लिए शानदार रहा है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत महज 76,162 रुपए थी, जो अब बढ़कर 1,20,815 रुपए प्रति 10 ग्राम हो चुकी है। यानी पूरे साल में सोने के दाम में 44,653 रुपए की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि वैश्विक अनिश्चितताओं, मुद्रास्फीति की आशंकाओं और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते देखी गई है।
चांदी की कहानी भी कम रोचक नहीं है। पिछले साल के अंत में एक किलोग्राम चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 1,49,142 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच चुकी है। यानी इस साल चांदी के भाव में 63,125 रुपए की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। औद्योगिक मांग, सौर ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतें और निवेशकों का रुझान चांदी को लगातार मजबूती दे रहा है।

सोना खरीदते समय रखें इन दो बातों का खास ख्याल
Gold and silver latest update : सोने की खरीदारी एक भावनात्मक और वित्तीय निर्णय दोनों होता है। इसलिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। यहां दो अहम सुझाव दिए जा रहे हैं:
- केवल सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) द्वारा हॉलमार्क किया हुआ सोना ही चुनें। हॉलमार्क में एक अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जैसे AZ4524, जो सोने की शुद्धता, ज्वेलर की पहचान और हॉलमार्किंग सेंटर की जानकारी देता है। यह सुनिश्चित करता है कि आप 24 कैरेट, 22 कैरेट या 18 कैरेट—जैसा भी खरीद रहे हैं, वह वास्तविक हो। नकली या मिलावटी सोने से बचने का यही सबसे सुरक्षित तरीका है।
- कीमत और वजन की क्रॉस-चेकिंग जरूरी: खरीदारी से पहले सोने का सही वजन और उस दिन का बाजार भाव कई विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित कर लें। IBJA की आधिकारिक वेबसाइट, बैंक की वेबसाइट या भरोसेमंद न्यूज पोर्टल इसके लिए अच्छे विकल्प हैं। ध्यान रखें कि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतें अलग-अलग होती हैं। इसलिए अपनी जरूरत के अनुसार सही कैरेट चुनें और कीमत की तुलना करें। silver rate today in india
शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं? चार प्रमुख कारण
Gold vs silver price trend : सोने की कीमत एक जैसी क्यों नहीं रहती? यह सवाल अक्सर खरीदारों के मन में आता है। असल में, कई कारक मिलकर शहर-दर-शहर रेट तय करते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझें:
- ट्रांसपोर्टेशन का खर्च: सोना एक भौतिक संपत्ति है और इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में काफी खर्चा लगता है। भारत में ज्यादातर सोना आयात होता है, जो मुख्य रूप से हवाई जहाज से आता है। फिर इसे रिफाइनरी से गोदामों, गोदामों से थोक विक्रेताओं और अंत में ज्वेलर्स तक पहुंचाना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में फ्यूल, सुरक्षा, वाहन, बीमा और स्टाफ की सैलरी जैसे खर्चे शामिल होते हैं। छोटे शहरों या दूरदराज के इलाकों में ये खर्च और बढ़ जाते हैं।
- खरीदारी की मात्रा और डिमांड: अलग-अलग क्षेत्रों में सोने की मांग अलग होती है। दक्षिण भारत में देश की कुल सोने की खपत का करीब 40% हिस्सा है। यहां बड़े ज्वेलर्स बल्क में सोना खरीदते हैं, जिससे उन्हें छूट मिलती है और दाम कम रहते हैं। वहीं टियर-2 या टियर-3 शहरों में मांग कम होने से थोक खरीद कम होती है, इसलिए दाम ज्यादा हो जाते हैं।
- लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन का प्रभाव: हर राज्य या क्षेत्र में अपनी ज्वेलर्स एसोसिएशन होती है, जो स्थानीय स्तर पर कीमतें तय करती है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में ज्वेलर्स एंड डायमंड ट्रेडर्स एसोसिएशन दाम निर्धारित करता है। इसी तरह महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश में अलग-अलग संगठन काम करते हैं। ये एसोसिएशन बाजार की स्थिति, लोकल टैक्स और मुनाफे के आधार पर रेट फिक्स करते हैं।
- ज्वेलर्स का खरीद मूल्य (Cost Price): यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है। जिस ज्वेलर ने सोना सस्ते में स्टॉक किया हो, वह कम मार्जिन पर बेच सकता है। वहीं, जिसने ऊंचे दाम पर खरीदा हो, उसे ज्यादा कीमत वसूलनी पड़ती है। कई बार पुराना स्टॉक और नया स्टॉक मिलाकर औसत कीमत निकाली जाती है, जो अंतिम रिटेल प्राइस को प्रभावित करती है।
