
Gold Price Today : पीली धातु सोना और सफेद चमक वाली चांदी के दामों में आज, यानी 28 अक्टूबर 2025 को, एक और कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट निवेशकों के लिए एक राहत तो है, लेकिन साथ ही बाजार की अस्थिरता को भी उजागर कर रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,913 रुपये की कमी के साथ यह अब ₹1,19,164 प्रति 10 ग्राम पर आ stabilize हो गई है। कल, यानी 27 अक्टूबर को, इसका भाव ₹1,21,077 प्रति 10 ग्राम था। इसी तरह, चांदी के दामों में भी 1,631 रुपये की गिरावट आई है, जिससे एक किलोग्राम चांदी की कीमत ₹1,43,400 पर पहुंच गई। कल यह ₹1,45,031 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। यह गिरावट बाजार की दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह एक सुनहरा मौका भी हो सकता है। IBJA के इन रेट्स में 3% GST, मेकिंग चार्जेस और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता, इसलिए विभिन्न शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, कोलकाता या चेन्नई में स्थानीय रेट्स थोड़े भिन्न हो सकते हैं।
8 दिनों की भारी गिरावट
Silver Price Today : अगर हम पिछले 8 दिनों के ट्रेंड पर नजर डालें, तो सोने की कीमतों में कुल ₹10,420 की तेज गिरावट देखने को मिली है। 19 अक्टूबर 2025 को सोना अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर ₹1,29,584 प्रति 10 ग्राम को छू चुका था, जो त्योहारों की चमक और वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रेरित था। लेकिन उसके बाद कीमतें लगातार नीचे आईं, और आज यह स्तर पर पहुंच गई। चांदी की कहानी भी कुछ वैसी ही है – 19 अक्टूबर को ₹1,69,230 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई से यह ₹25,830 रुपये सस्ती होकर ₹1,43,400 पर आ गई।
यह गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं है; वैश्विक स्तर पर भी COMEX गोल्ड फ्यूचर्स में 1.5% की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक हेल्दी करेक्शन है, जो ओवरहीटेड मार्केट को ठंडा करने में मदद करेगा। पिछले एक महीने में सोने की कीमतों में 15% का उतार-चढ़ाव देखा गया, जो निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह देता है।
सोना-चांदी के दामों में गिरावट के पीछे 3 प्रमुख कारण
Sone ka Bhav : सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं के दामों में यह अचानक आई गिरावट कोई संयोग नहीं है, बल्कि कई वैश्विक और स्थानीय कारकों का नतीजा है। आइए, इन तीन मुख्य वजहों को विस्तार से समझते हैं, जो इस ट्रेंड को आकार दे रही हैं:
1. भारत में सीजनल खरीदारी का समापन: त्योहारों के बाद डिमांड में आई मंदी
भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, जहां धनतेरस, दिवाली और अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों पर खरीदारी चरम पर पहुंच जाती है। इस साल धनतेरस पर 60,000 करोड़ रुपये का सोना-चांदी बिका, लेकिन त्योहार समाप्त होते ही बाजार में खरीदारों की भीड़ पतली पड़ गई। विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्ट-फेस्टिवल पीरियड में डिमांड में 30-40% की कमी आ जाती है, क्योंकि ज्वेलर्स अपने स्टॉक को क्लियर करने के बाद नए ऑर्डर कम कर देते हैं। इसके अलावा, शादियों का सीजन अभी पूर्ण रूप से शुरू नहीं हुआ है, जिससे इंडस्ट्रियल और रिटेल डिमांड दोनों प्रभावित हुई हैं। वैश्विक स्तर पर भी, चीन जैसे बड़े बाजारों में आर्थिक सुस्ती ने सोने की मांग को दबाया है।
2. वैश्विक तनावों में कमी: सेफ-हेवन एसेट्स की चमक फीकी पड़ी
सोना और चांदी को हमेशा ‘सेफ-हेवन’ एसेट्स माना जाता है, यानी आर्थिक संकट, भू-राजनीतिक तनाव या महंगाई के दौर में लोग इन्हें सुरक्षित निवेश के रूप में खरीदते हैं। लेकिन हाल ही में इजरायल-हमास संघर्ष में कमी, यूक्रेन-रूस युद्ध में स्टेलमेट और अमेरिकी चुनावों की अनिश्चितता के थोड़ा कम होने से निवेशक रिस्की एसेट्स जैसे स्टॉक्स की ओर मुड़ गए हैं। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में 2% की मजबूती ने भी सोने की आकर्षकता घटाई, क्योंकि डॉलर मजबूत होने पर विदेशी निवेशक सोने से दूर रहते हैं। इसके अलावा, यूएस फेडरल रिजर्व की हालिया मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ने से बॉन्ड यील्ड्स बढ़े, जो सोने के लिए नकारात्मक सिग्नल है।

3. प्रॉफिट-टेकिंग और ओवरबॉट सिग्नल्स: टेक्निकल एनालिसिस ने बिकवाली को बढ़ावा दिया
सोने की कीमतें जब रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचती हैं, तो निवेशक प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर देते हैं – यानी ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा काटना। पिछले 8 दिनों में RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) जैसे टेक्निकल इंडिकेटर्स 70 के ऊपर ‘ओवरबॉट’ जोन में पहुंच गए थे, जो बाजार को ओवरहीटेड होने का संकेत देते हैं। इससे ट्रेंड फॉलोअर्स, हेज फंड्स और खुदरा डीलर्स ने बिकवाली तेज कर दी। MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट में 10% की कमी आई, जो बिकवाली की पुष्टि करती है। इसके अलावा, ETF आउटफ्लो (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स से निकासी) ने भी दबाव बढ़ाया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह करेक्शन शॉर्ट-टर्म हो सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में सोना 2030 तक $3,000 प्रति औंस को पार कर सकता है।
साल भर का सफर
Chandi ka Bhav : इस साल की शुरुआत से सोने की कीमतों में कुल ₹43,002 की वृद्धि हुई है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹76,162 था, जो अब ₹1,19,164 पर पहुंच गया। यह 56% से अधिक की तेजी दर्शाता है, जो महंगाई, करेंसी डेप्रिशिएशन और जियो-पॉलिटिकल रिस्क्स से प्रेरित है। चांदी ने भी प्रभावी प्रदर्शन किया – 31 दिसंबर 2024 के ₹86,017 प्रति किलोग्राम से यह ₹57,383 रुपये महंगी होकर ₹1,43,400 पर आ गई, यानी लगभग 67% की ग्रोथ।
हालांकि, यह वृद्धि निवेशकों को उत्साहित करने वाली है, लेकिन अस्थिरता के बीच डायवर्सिफिकेशन जरूरी है। सोने को पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा रखना विशेषज्ञों की सलाह है, खासकर जब स्टॉक मार्केट रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर हो।
सोना खरीदने वालों के लिए जरूरी टिप्स
सोने में निवेश करना न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि वित्तीय सुरक्षा भी प्रदान करता है। लेकिन गिरावट के इस दौर में खरीदारी करते समय दो महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखें:
1. हमेशा सर्टिफाइड और हॉलमार्क्ड गोल्ड चुनें
बाजार में मिलावटी सोने की भरमार है, इसलिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का हॉलमार्क अनिवार्य रूप से चेक करें। यह अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे AZ4524) के रूप में आता है, जो सोने की शुद्धता (कैरेट) को प्रमाणित करता है। 24 कैरेट का मतलब 99.9% शुद्ध सोना है, जबकि 22 कैरेट में 91.6% शुद्धता होती है। सरकारी पोर्टल BIS केयर ऐप से हॉलमार्क को वेरिफाई करें। गैर-हॉलमार्क्ड सोना खरीदने से बचें, क्योंकि 2021 के बाद से यह अनिवार्य है और जुर्माना लग सकता है।
2. कीमतों का क्रॉस-चेक करें: सही वजन और रेट की पुष्टि आवश्यक
सोने का वजन हमेशा डिजिटल स्केल से मापें और उस दिन के रेट को कई विश्वसनीय सोर्सेज से वेरिफाई करें, जैसे IBJA की आधिकारिक वेबसाइट, MCX लाइव फीड या Goodreturns ऐप। याद रखें, 24 कैरेट का भाव सबसे ऊंचा होता है, जबकि 22 और 18 कैरेट के रेट उसके अनुपात में कम होते हैं। शहर-विशेष प्रीमियम (जैसे मुंबई में 1-2% ज्यादा) को भी ध्यान में रखें। ऑनलाइन खरीदारी के लिए Amazon या Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स पर BIS-कर्टिफाइड ऑप्शन्स चुनें, लेकिन डिलीवरी पर हॉलमार्क चेक जरूर करें।



