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IIT Baba Abhay Singh : IITian बाबा अभय सिंह की मोह माया से वैराग्य तक की पूरी कहानी

Jaivardhan News January 21, 2025 1 minute read

IIT Baba Abhay Singh : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान एक नाम ने सबका ध्यान आकर्षित किया है, और वह है – IITian बाबा अभय सिंह। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अपनी डिग्री और करोड़ों की नौकरी को छोड़कर संन्यास लेने वाले अभय सिंह अब महाकुंभ में भव्यता से अपने साधु जीवन का एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका यह निर्णय न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि यह जीवन के वास्तविक उद्देश्य की तलाश की उनकी गहरी भावना को भी प्रकट करता है।

Who is IIT Bombay Baba? : अभय सिंह का अनोखा सफर

Who is IIT Bombay Baba? : अभय सिंह का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के छोटे से गांव सासरौली में हुआ था। वे अपने परिवार के इकलौते बेटे हैं, जबकि उनकी एक बहन कनाडा में बस चुकी हैं। शुरू से ही पढ़ाई में अव्‍वल रहने वाले अभय को हमेशा नई-नई जगहों पर घूमने और फोटोग्राफी का शौक था। अपनी स्‍कूली शिक्षा के दौरान उन्‍होंने डी.एच.लारेंस स्‍कूल में टॉप किया और फिर 2008 में मुंबई के प्रतिष्ठित IIT Bombay में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।

iit baba abhay singh biography : यहां तक की यात्रा साधारण नहीं थी। अभय सिंह ने IIT से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, पर साथ ही साथ उन्‍होंने दर्शनशास्‍त्र का भी गहरा अध्‍ययन किया। यही वह समय था जब उन्‍होंने अपने जीवन के शाश्‍वत उद्देश्‍य की खोज शुरू की। अभय सिंह का जीवन एक अजीब मोड़ पर पहुंचा जब उन्‍होंने अपनी चमकदार तकनीकी दुनिया को छोड़कर आध्यात्मिक जीवन की ओर रुख किया।

Iit baba abhay singh biography hindi : विज्ञान की दुनिया से संन्यास की ओर

Iit baba abhay singh biography hindi : अभय सिंह ने 2021 में कनाडा से लौटने के बाद महादेव की शरण में जाने का निर्णय लिया। उन्‍होंने बताया कि, “महादेव ने मुझे वो रास्ता दिखाया, जिसे मैं पहले 9 सालों से तलाश रहा था।” यह बदलाव न केवल उनके लिए, बल्कि उनके आस-पास के लोगों के लिए भी चौंकाने वाला था। एक प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री और दुनिया में नाम कमाने की बजाय, अभय ने अपनी खोज को आंतरिक शांति और आत्मिक अनुभव की ओर मोड़ लिया।

अभय का कहना है कि, “साइंस ने मुझे बहुत कुछ सिखाया, लेकिन आध्यात्म ने मुझे जीवन के असल अर्थ से जोड़ा।” उन्‍होंने दर्शनशास्‍त्र, सुकरात, प्लेटो और नवउत्तरावाद पर आधारित किताबों का गहरे से अध्‍ययन किया और यह समझा कि जीवन की गहरी सच्‍चाई को जानने के लिए आंतरिक यात्रा ही सबसे अहम है।

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Who is IITian Baba? : महादेव के चरणों में समर्पण

Who is IITian Baba? : महाकुंभ के दौरान अभय सिंह ने कई मीडिया इंटरव्यू दिए और बताया कि उनका अब पूरा जीवन महादेव को समर्पित है। वे कहते हैं, “अब मुझे आध्यात्म में ही असली आनंद मिल रहा है। सब कुछ शिव है, और शिव ही सत्य है।” उनका मानना है कि, जब हम ज्ञान की खोज करते हैं, तो अंत में हम केवल एक ही सच्चाई तक पहुंचते हैं — शिव। इस नए जीवन को वे अपने लिए सबसे बेहतरीन चरण मानते हैं, और इस यात्रा में वे गहरे आध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त करने के प्रयास में लगे रहते हैं।

Viral IIT Baba Abhay singh : सभी को आत्मा की ओर यात्रा करने की प्रेरणा

Viral IIT Baba Abhay singh : अभय सिंह के जीवन में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्‍होंने अपने एक पोस्‍ट में कहा, “मां-बाप भगवान नहीं हैं, भगवान खुद ही भगवान है।” उन्‍होंने यह स्‍पष्‍ट किया कि अगर हम ईश्‍वर के बारे में बात करें तो हमें उसकी असल महिमा को समझना चाहिए, न कि केवल उसे एक रूप में संकुचित करना। “जिसे हम ईश्‍वर कहते हैं, वही सबसे बड़ा और सत्य है, और यह जीवन का सबसे गहरे सच्‍चाई है।”

अभय सिंह के विचारों में एक गहरी समझ है, जो आज के भौतिकवादी समाज में खोए हुए उद्देश्यों और आस्थाओं को न केवल दिखाती है, बल्कि उसे हमें देखने का एक नया दृष्टिकोण भी देती है। वे मानते हैं कि जीवन के हर पहलू को एक यंत्र की तरह देखा जा सकता है, जिसमें हमारी आँखें उस यंत्र का हिस्सा हैं जो ऊर्जा और शक्ति को देखने का माध्यम बनती हैं।

IIT Baba Abhay Singh Story : IITian बाबा अभय सिंह का संदेश

IIT Baba Abhay Singh Story : महाकुंभ 2025 में अभय सिंह की उपस्थिति न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन के बदलाव को दर्शाती है, बल्कि यह समाज को एक शक्तिशाली संदेश भी देती है। उनकी यात्रा यह बताती है कि, आंतरिक शांति और संतुलन को हासिल करने के लिए हमें बाहरी दुनिया से परे जाकर खुद के भीतर झांकने की आवश्यकता है। यह हमें यह भी सिखाता है कि सफलता का मतलब केवल बाहरी उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष और शांति है।

अभय सिंह का जीवन यह साबित करता है कि किसी भी कार्य में गहरी सोच, प्रतिबद्धता और सच्ची आस्था हो तो हम अपनी आत्मा को सबसे बड़ी सफलता की ओर मार्गदर्शित कर सकते हैं। महाकुंभ में उनका साधु जीवन एक प्रेरणा है, जो हम सभी को अपने जीवन के उद्देश्य को फिर से परिभाषित करने के लिए प्रेरित करता है।

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बायोग्राफीविवरण
नामअभय सिंह (IIT बाबा)
पिता का नामकरण सिंह ग्रेवाल (झज्जर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष)
माता का नामशीला देवी (वकील)
जन्म तिथि3 मार्च 1990
निवास स्थानससरोली गांव, झज्जर, हरियाणा
बहनएक बड़ी बहन (कनाडा में शादी के बाद अमेरिका में निवास)
शिक्षा12वीं – झज्जर, हरियाणा
बीटेक (एयरोस्पेस इंजीनियरिंग) – IIT बॉम्बे (2014)
एमटेक – IIT बॉम्बे
करियरभौतिकी शिक्षक (कोचिंग सेंटर)
रूचिदर्शनशास्त्र, सुकरात और प्लेटो के विचार, अध्यात्म, भगवान शिव की भक्ति
जीवन में बदलावपारिवारिक विवादों और घरेलू हिंसा से प्रभावित होकर आध्यात्मिक जीवन अपनाया
वर्तमान स्थितिमहाकुंभ 2025 में ‘IIT बाबा’ के रूप में प्रसिद्ध, संन्यास और भगवान शिव को समर्पित जीवन

बाबा के जीवन की दिलचस्प बातें, देखिए

अभय सिंह, जिन्हें ‘आईआईटी बाबा’ के नाम से जाना जाता है, का जन्म 3 मार्च 1990 को हरियाणा के झज्जर जिले के ससरोली गांव में हुआ था। उनके पिता, करण सिंह ग्रेवाल, झज्जर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हैं, और माता शीला देवी एक वकील हैं। अभय की एक बड़ी बहन है, जो शादी के बाद कनाडा में बस गईं और अब अमेरिका में रहती हैं।

अभय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा झज्जर में पूरी की और 12वीं कक्षा तक यहीं पढ़ाई की। इसके बाद, उन्होंने आईआईटी-दिल्ली में प्रवेश की तैयारी शुरू की और 2008 में पहले ही प्रयास में आईआईटी-बॉम्बे में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में प्रवेश प्राप्त किया। 2014 में बीटेक पूरा करने के बाद, उन्होंने वहीं से एमटेक भी किया।

अभय सिंह ने अपनी शिक्षा के दौरान दर्शनशास्त्र में गहरी रुचि विकसित की। उन्होंने नवउत्तरवाद, सुकरात, और प्लेटो जैसे दार्शनिकों के लेख और किताबें पढ़ीं, जिससे उनकी जीवन की दृष्टि में परिवर्तन आया। उन्होंने कुछ समय के लिए एक कोचिंग सेंटर भी चलाया, जहां वे भौतिकी पढ़ाते थे, लेकिन उनका मन आध्यात्मिकता की ओर अधिक आकर्षित हुआ।

अभय के पिता, करण सिंह ग्रेवाल, ने बताया कि पारिवारिक विवादों और घरेलू तनाव ने अभय को दुनियादारी छोड़ने और आध्यात्मिक मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अभय एक संवेदनशील व्यक्ति हैं, जो बचपन से ही घरेलू हिंसा से परेशान थे। इन अनुभवों ने उन्हें आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर किया।

वर्तमान में, अभय सिंह ने अपनी पूरी जिंदगी भगवान शिव को समर्पित कर दी है और महाकुंभ 2025 में ‘आईआईटी बाबा’ के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की है। उनका मानना है कि सत्य ही शिव है और शिव ही सुंदर है। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि बाहरी सफलता के बजाय आंतरिक शांति और संतोष जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

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आईआईटी बाबा की कहानी से सीख और प्रेरणा

आईआईटी बाबा, जिनका असली नाम अभय सिंह है, महाकुंभ 2025 के दौरान चर्चा में आए। उनकी कहानी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो जीवन में सफलता और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अभय सिंह एक साधारण परिवार से आए और अपनी बुद्धिमत्ता और परिश्रम के बल पर आईआईटी बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। उन्होंने एमटेक भी पूरा किया और एक उज्जवल करियर की संभावनाएं उनके सामने थीं। लेकिन उन्होंने भौतिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर आध्यात्मिकता की राह चुन ली।

उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में केवल बाहरी सफलता ही सब कुछ नहीं होती। समाज हमें सिखाता है कि एक अच्छी शिक्षा, प्रतिष्ठित नौकरी, और आर्थिक स्थिरता ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए, लेकिन अभय सिंह ने इस धारणा को तोड़ा। उन्होंने दिखाया कि आंतरिक शांति और आत्मिक संतोष भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

आईआईटी बाबा की कहानी हमें यह सिखाती है कि सफलता केवल डिग्री और करियर तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह आत्मज्ञान और मानसिक शांति से भी जुड़ी होती है। उनकी जीवनयात्रा से हम सीख सकते हैं कि हमें अपने मन की सुननी चाहिए, सामाजिक दबावों से मुक्त रहना चाहिए, और अपने वास्तविक उद्देश्य को खोजने का प्रयास करना चाहिए। भविष्य में, उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणादायक होगा, और वे एक नई विचारधारा को जन्म दे सकते हैं जिसमें विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत मेल हो।

1. आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिकता की शक्ति:
आईआईटी बाबा की कहानी हमें आत्म-साक्षात्कार की ओर प्रेरित करती है। उन्होंने दर्शनशास्त्र और प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन किया, जिससे उन्हें जीवन का एक नया दृष्टिकोण मिला। उन्होंने महसूस किया कि सच्ची शांति केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता से प्राप्त होती है।

2. सामाजिक अपेक्षाओं से मुक्त होना:
अधिकांश लोग समाज की अपेक्षाओं के अनुसार अपना जीवन जीते हैं, लेकिन आईआईटी बाबा ने इन सीमाओं को तोड़ा। उन्होंने पारिवारिक और सामाजिक दबावों को नज़रअंदाज़ कर अपने दिल की सुनी। यह हमें यह प्रेरणा देता है कि हमें अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने चाहिए, चाहे वे दूसरों को असामान्य ही क्यों न लगें।

3. कठिनाइयों से हार न मानना:
उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, खासकर पारिवारिक विवादों और व्यक्तिगत चुनौतियों के कारण। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि आध्यात्मिकता को अपनाकर अपने जीवन को एक नई दिशा दी। यह हमें सिखाता है कि कठिनाइयाँ जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन उनका सामना कर आगे बढ़ना ही असली सफलता है।

आईआईटी बाबा का भविष्य का लक्ष्य

आईआईटी बाबा का प्राथमिक लक्ष्य स्वयं को पूरी तरह भगवान शिव की भक्ति में समर्पित करना है। वह न केवल एक साधु के रूप में जीवन बिता रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी आध्यात्मिक जागरूकता की ओर प्रेरित कर रहे हैं।

उनका सपना है कि आधुनिक विज्ञान और आध्यात्मिकता के बीच एक सेतु का निर्माण किया जाए, जिससे लोग जीवन के भौतिक और आध्यात्मिक पक्षों में संतुलन बना सकें। वे चाहते हैं कि लोग केवल धन और प्रसिद्धि के पीछे न भागें, बल्कि अपने आंतरिक अस्तित्व को समझें और शांति प्राप्त करें।

महाकुंभ 2025 के दौरान मिली प्रसिद्धि के बाद अब उनकी योजना समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की है। वे युवाओं को प्रेरित करना चाहते हैं कि वे केवल करियर और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान न दें, बल्कि अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भी खोजें।

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