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LIC policy claim rejection : LIC पॉलिसी लेते समय इन गलतियों से बचें, वरना क्लेम रिजेक्शन का खतरा!

Parmeshwar Singh Chundwat August 28, 2025 1 minute read
LIC policy claim rejection
LIC policy claim rejection

LIC policy claim rejection : जीवन बीमा निगम (LIC) की पॉलिसी लेना एक महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय है, जो आपके और आपके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने का वादा करता है। लेकिन अगर आप पॉलिसी लेते समय जरूरी जानकारी छिपाते हैं या गलत विवरण देते हैं, तो जरूरत के समय आपका क्लेम (claim) खारिज हो सकता है। हाल ही में हरियाणा के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी LIC के क्लेम रिजेक्शन के फैसले को सही ठहराया, जहां पॉलिसीधारक ने अपनी शराब की लत को छिपाया था। यह मामला उन लाखों लोगों के लिए एक चेतावनी है जो बीमा पॉलिसी लेते समय छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। आइए, इस मामले को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि पॉलिसी लेते समय किन गलतियों से बचना चाहिए, ताकि भविष्य में आपको या आपके परिवार को वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े।

मामला: शराब की लत छिपाने पर क्लेम रिजेक्शन

Supreme Court judgment LIC insurance हरियाणा के झज्जर जिले के निवासी महिपाल सिंह ने 28 मार्च 2013 को LIC की जीवन आरोग्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी। पॉलिसी के आवेदन फॉर्म में उन्होंने दावा किया कि वे शराब, धूम्रपान, या तंबाकू जैसे किसी भी नशे की लत से पूरी तरह मुक्त हैं। लेकिन पॉलिसी लेने के महज एक साल बाद, 1 जून 2014 को उनकी मृत्यु हो गई। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें पेट में तेज दर्द और बार-बार उल्टियों की शिकायत थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। लंबे इलाज के बाद उनकी मृत्यु कार्डियक अरेस्ट (cardiac arrest) के कारण हुई।

महिपाल की पत्नी, सुनीता सिंह, ने इलाज और अन्य खर्चों की भरपाई के लिए LIC में क्लेम दायर किया। लेकिन LIC ने क्लेम को यह कहकर खारिज कर दिया कि महिपाल ने अपनी शराब की गंभीर लत को छिपाया था, जो उनकी मृत्यु का प्रमुख कारण बनी। मेडिकल जांच में सामने आया कि महिपाल लंबे समय से अत्यधिक शराब का सेवन करते थे, जिसके कारण उनके लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा था। यह नुकसान उनकी मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण बना। LIC ने तर्क दिया कि अगर महिपाल ने अपनी शराब की लत की जानकारी दी होती, तो पॉलिसी स्वीकृति और प्रीमियम की शर्तें अलग हो सकती थीं।

कानूनी लड़ाई: उपभोक्ता अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक

LIC health policy claim rejection क्लेम रिजेक्शन के फैसले से असहमत सुनीता सिंह ने जिला उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की। जिला फोरम ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए LIC को ₹5,21,650 की क्लेम राशि, 9% ब्याज, और मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹50,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया। LIC ने इस फैसले को राज्य उपभोक्ता आयोग और फिर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। दोनों आयोगों ने जिला फोरम के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि जीवन आरोग्य योजना एक कैश बेनिफिट पॉलिसी है, न कि रीइंबर्समेंट स्कीम, इसलिए क्लेम का भुगतान किया जाना चाहिए।

LIC ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाया, जहां मार्च 2025 में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने LIC के पक्ष में फैसला सुनाया और तीन प्रमुख बिंदुओं पर अपनी राय दी:

  1. छिपाया गया तथ्य मृत्यु का कारण बना: महिपाल ने अपनी शराब की लत को छिपाया, जो उनकी मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण थी।
  2. पारदर्शिता की अनिवार्यता: बीमा पॉलिसी एक भरोसे का अनुबंध (contract of utmost good faith) है, जिसमें स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी सभी जानकारी देना अनिवार्य है। शराब की लत जैसी जानकारी जोखिम मूल्यांकन (risk assessment) को प्रभावित करती है।
  3. पॉलिसी की शर्तें: जीवन आरोग्य योजना में शराब से संबंधित बीमारियों के कारण होने वाले खर्चों को कवर नहीं किया जाता, खासकर जब यह जानकारी छिपाई गई हो।

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के सुल्भा प्रकाश मोतेगांवकर बनाम LIC मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर छिपाई गई जानकारी मृत्यु का कारण नहीं है, तो क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। लेकिन महिपाल के मामले में, शराब की लत ही मृत्यु का कारण थी, इसलिए क्लेम रिजेक्शन को उचित ठहराया गया।

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बीमा पॉलिसी लेते समय इन गलतियों से बचें

Why LIC claim gets rejected यह मामला उन करोड़ों लोगों के लिए एक सबक है जो बीमा पॉलिसी लेते समय छोटी-छोटी जानकारी को छिपाने या गलत विवरण देने की गलती करते हैं। निम्नलिखित गलतियों से बचें ताकि आपका क्लेम सुरक्षित रहे:

  1. स्वास्थ्य जानकारी छिपाना: किसी भी पुरानी बीमारी (जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, या कैंसर), सर्जरी का इतिहास, या नशे की लत (शराब, धूम्रपान, तंबाकू) को छिपाना घातक हो सकता है।
  2. गलत व्यक्तिगत जानकारी: आयु, आय, या पेशे से संबंधित गलत जानकारी देना क्लेम रिजेक्शन का कारण बन सकता है।
  3. पॉलिसी की शर्तें न पढ़ना: पॉलिसी के नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें, खासकर exclusions (कवर न की जाने वाली चीजें) और waiting periods को समझें।
  4. नॉमिनी की जानकारी न देना: पॉलिसी लेते समय नॉमिनी का नाम और विवरण स्पष्ट रूप से देना जरूरी है, ताकि क्लेम प्रक्रिया में देरी न हो।
  5. मेडिकल टेस्ट से बचना: कई बीमा कंपनियां हेल्थ पॉलिसी के लिए मेडिकल टेस्ट अनिवार्य करती हैं। इसे छोड़ने की कोशिश न करें।

बीमा पॉलिसी में पारदर्शिता क्यों जरूरी?

LIC Jivan Arogya policy conditions बीमा एक ऐसा अनुबंध है जो दोनों पक्षों—पॉलिसीधारक और बीमा कंपनी—के बीच पूर्ण विश्वास पर आधारित होता है। बीमा कंपनी पॉलिसीधारक की दी गई जानकारी के आधार पर जोखिम का आकलन करती है और प्रीमियम तय करती है। अगर कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई जाती है, तो यह जोखिम मूल्यांकन को प्रभावित करता है, और बीमा कंपनी को क्लेम रिजेक्शन का अधिकार मिल जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि पॉलिसीधारक को अपनी स्वास्थ्य स्थिति, जीवनशैली, और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में पूरी ईमानदारी बरतनी चाहिए।

क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए टिप्स

  1. पूरी जानकारी दें: आवेदन फॉर्म में सभी सवालों का सही और विस्तृत जवाब दें। अगर आपको कोई बीमारी या लत है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताएं।
  2. मेडिकल टेस्ट करवाएं: अगर पॉलिसी के लिए मेडिकल टेस्ट जरूरी है, तो उसे समय पर करवाएं। यह आपकी और बीमा कंपनी की पारदर्शिता को बढ़ाता है।
  3. पॉलिसी दस्तावेज पढ़ें: पॉलिसी की शर्तें, कवरेज, और exclusions को ध्यान से पढ़ें। अगर कुछ समझ न आए, तो बीमा एजेंट या कंपनी से स्पष्टीकरण लें।
  4. नॉमिनी अपडेट रखें: सुनिश्चित करें कि नॉमिनी की जानकारी सही और अपडेटेड है।
  5. प्रोफेशनल सलाह लें: बीमा लेने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार या बीमा विशेषज्ञ से परामर्श करें।

अन्य मामलों में LIC और क्लेम रिजेक्शन

LIC claim rejection due to alcohol महिपाल सिंह का मामला पहला नहीं है जहां क्लेम रिजेक्शन को लेकर विवाद हुआ। हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं:

  • 2023, दिल्ली: एक पॉलिसीधारक ने अपनी डायबिटीज की स्थिति छिपाई, जिसके कारण उनकी मृत्यु के बाद क्लेम खारिज कर दिया गया।
  • 2024, मुंबई: एक बीमाधारक ने धूम्रपान की आदत को छिपाया, जिसके चलते उनकी लंग कैंसर से मृत्यु के बाद क्लेम रिजेक्ट हुआ।
  • 2022, चेन्नई: गलत आयु जानकारी देने के कारण एक पॉलिसीधारक का क्लेम रद्द कर दिया गया।

इन मामलों से साफ है कि बीमा कंपनियां क्लेम रिजेक्शन के लिए सख्त नियम अपनाती हैं, खासकर जब बात गलत जानकारी या तथ्यों को छिपाने की हो।

LIC की जीवन आरोग्य पॉलिसी: विशेषताएं और शर्तें

जीवन आरोग्य एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है, जो अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी, और अन्य मेडिकल खर्चों के लिए कैश बेनिफिट प्रदान करती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • कवरेज: प्रति दिन अस्पताल में भर्ती होने का निश्चित लाभ, ICU खर्च, और सर्जरी कवर।
  • प्रीमियम: उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर प्रीमियम तय होता है।
  • exclusions: शराब, नशा, या पहले से मौजूद बीमारियों (pre-existing conditions) के कारण होने वाले खर्च कवर नहीं किए जाते, अगर इन्हें छिपाया गया हो।
  • waiting period: कुछ बीमारियों के लिए 2-4 साल का प्रतीक्षा काल होता है।

इस पॉलिसी में पारदर्शिता और सही जानकारी देना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह एक कैश बेनिफिट स्कीम है, जिसमें बीमा कंपनी सीधे नकद भुगतान करती है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी भी तरह से वित्तीय या कानूनी सलाह का विकल्प नहीं है। बीमा पॉलिसी लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बीमा विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें।

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Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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