
LPG CYLINDER PRICE HIKE : मध्य-पूर्व यानी Middle East के खाड़ी देशों में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब भारत के घरेलू बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है। तेल और गैस कंपनियों ने घरेलू तथा कॉमर्शियल उपयोग में आने वाले LPG cylinders की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद जयपुर समेत राजस्थान के कई शहरों में रसोई गैस पहले से महंगी हो गई है। घरेलू उपयोग का सिलेंडर अब 60 रुपए महंगा हो गया है, जबकि commercial cylinder के दाम में 114 रुपए की वृद्धि की गई है। ऐसे में इसका सीधा असर आम परिवारों के monthly budget के साथ-साथ होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत पर भी पड़ने वाला है।
जयपुर में अब कितने रुपए का मिलेगा घरेलू सिलेंडर
DOMESTIC LPG PRICE IN JAIPUR TODAY : नई कीमतें लागू होने के बाद जयपुर में घरेलू LPG cylinder अब 856.50 रुपए की जगह 916.50 रुपए में मिलेगा। वहीं 19 किलोग्राम वाला कॉमर्शियल सिलेंडर 1796.50 रुपए से बढ़कर अब 1911 रुपए का हो गया है। रसोई गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब पहले से ही आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है। घर का खर्च, राशन, दूध, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान पहले ही महंगे हैं, ऐसे में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से रसोई का हिसाब और बिगड़ना तय माना जा रहा है।
राजस्थान के दूसरे शहरों में भी बढ़ी कीमतें
LPG PRICE HIKE IN RAJASTHAN 2026 : सिर्फ जयपुर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के कई अन्य शहरों में भी LPG सिलेंडर की कीमतों में इजाफा हुआ है। उदयपुर में घरेलू सिलेंडर अब 944.50 रुपए का हो गया है। बाड़मेर में इसकी कीमत बढ़कर 939 रुपए पहुंच गई है। जैसलमेर में पहले घरेलू सिलेंडर 875 रुपए में मिल रहा था, लेकिन अब इसकी नई कीमत 939 रुपए कर दी गई है। वहीं जैसलमेर में कॉमर्शियल सिलेंडर, जो पहले 1835 रुपए का था, अब 1950 रुपए में मिलेगा। अजमेर में रसोई गैस सिलेंडर की पुरानी कीमत 858 रुपए थी, जिसे बढ़ाकर अब 918 रुपए कर दिया गया है। इस तरह पूरे प्रदेश में गैस की नई दरों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
11 महीने बाद बढ़े घरेलू सिलेंडर के दाम
LPG BOOKING NEW RULE 25 DAYS : घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में यह बढ़ोतरी करीब 11 महीने बाद देखने को मिली है। काफी समय से घरेलू उपयोग वाले LPG सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए थे, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के चलते कंपनियों ने कीमतें बढ़ा दी हैं। आमतौर पर घरेलू सिलेंडर के दाम बढ़ने का असर हर घर पर पड़ता है, क्योंकि रसोई गैस आज एक बुनियादी जरूरत बन चुकी है। चाहे छोटा परिवार हो या बड़ा, LPG cylinder के बिना घरेलू कामकाज की कल्पना मुश्किल है।
कॉमर्शियल सिलेंडर पहले भी महंगा हो चुका है
INDIA LPG PRICE HIKE TODAY : कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी नहीं है। इससे ठीक एक सप्ताह पहले यानी 1 मार्च को भी तेल कंपनियों ने commercial LPG के दाम बढ़ाए थे। उस समय 27.50 रुपए की वृद्धि की गई थी। अगर जनवरी से मार्च तक का पूरा हिसाब देखा जाए, तो इस साल अब तक कॉमर्शियल सिलेंडर कुल 302 रुपए तक महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती यह कीमत छोटे व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। खासतौर पर होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानें, चाय स्टॉल और केटरिंग सर्विस देने वालों की लागत लगातार बढ़ रही है।
आम जनता ही नहीं, कारोबार पर भी पड़ेगा असर
कॉमर्शियल सिलेंडर महंगा होने का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। जब कारोबारियों की लागत बढ़ेगी, तो उसका प्रभाव खाने-पीने की चीजों और दूसरी सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। मतलब साफ है—LPG price hike का असर सीधा और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह से जनता तक पहुंचेगा। घरेलू उपभोक्ता गैस महंगी होने से परेशान होंगे, वहीं बाजार में फूड और सर्विस सेक्टर भी महंगाई का दबाव आगे बढ़ा सकता है।
खाड़ी देशों में युद्ध का असर भारत पर क्यों पड़ा
इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण Middle East crisis माना जा रहा है। खाड़ी देशों से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में जब global supply chain पर संकट आता है या energy market में अस्थिरता बढ़ती है, तो उसका असर भारतीय बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है। यही वजह है कि तेल-गैस कंपनियों ने कीमतों का पुनरीक्षण करते हुए नई दरें लागू की हैं।
बुकिंग नियम में बड़ा बदलाव, अब 25 दिन बाद ही कर सकेंगे अगली बुकिंग
सिर्फ कीमतें बढ़ी ही नहीं हैं, बल्कि गैस बुकिंग के नियमों में भी अहम बदलाव किया गया है। सिलेंडर की संभावित किल्लत को रोकने और उपलब्ध स्टॉक का संतुलित वितरण करने के लिए तेल कंपनियों ने booking period में बदलाव लागू कर दिया है। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगली बुकिंग 25 से 30 दिन के अंतराल पर ही कर सकेंगे। यानी अगर किसी उपभोक्ता ने 1 तारीख को गैस बुक करवाई और 2 तारीख को सिलेंडर की डिलीवरी हो गई, तो अगली बुकिंग वह डिलीवरी की तारीख से कम-से-कम 25 दिन बाद ही कर पाएगा। यह नियम उन परिवारों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है, जहां गैस की खपत ज्यादा होती है।
गैस की किल्लत रोकने के लिए सरकार भी अलर्ट
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। 5 मार्च को सरकार ने इमरजेंसी powers का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी oil refinery कंपनियों को LPG production बढ़ाने का निर्देश दिया था। सरकार को आशंका है कि अगर Middle East में तनाव और बढ़ता है, तो गैस की सप्लाई और अधिक प्रभावित हो सकती है। ऐसे में घरेलू बाजार में कमी की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए पहले से तैयारी की जा रही है।

प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग अब रसोई गैस बनाने में होगा
सरकार के निर्देश में यह भी कहा गया है कि रिफाइनरियां अब propane और butane का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर सिर्फ घरेलू रसोई गैस बनाने में करेंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को LPG की उपलब्धता बनी रहे और बाजार में सप्लाई पूरी तरह से बाधित न हो। यह फैसला इस बात का संकेत है कि सरकार संभावित संकट को गंभीरता से ले रही है और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है।
परिवारों का बजट फिर बिगड़ने की आशंका
घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा होने का मतलब सिर्फ एक बार का अतिरिक्त खर्च नहीं है। इसका असर पूरे महीने के budget पर पड़ता है। मध्यम वर्ग, निम्न आय वर्ग और सीमित कमाई वाले परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी और ज्यादा भारी पड़ सकती है। महंगाई पहले से ही लोगों की जेब पर दबाव बनाए हुए है। ऐसे में रसोई गैस महंगी होना परिवारों के लिए एक और झटका माना जा रहा है। जिन घरों में जल्दी-जल्दी सिलेंडर खत्म होता है, वहां यह असर और ज्यादा महसूस किया जाएगा।
आने वाले दिनों में क्या रह सकती है स्थिति
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह बढ़ोतरी यहीं थमेगी या आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव हो सकता है। बहुत कुछ Middle East की स्थिति, global energy prices और भारत में गैस production बढ़ाने के प्रयासों पर निर्भर करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं होते, तो बाजार में दबाव बना रह सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां सप्लाई को संतुलित रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन आम उपभोक्ता की चिंता फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही।



