
Maharana Pratap History : जब इतिहास के पन्ने वीरता की मिसाल ढूंढ़ते हैं, तो एक नाम स्वर्णाक्षरों में उभरता है – महाराणा प्रताप! आज उस महान योद्धा का 485वां जन्मोत्सव है, जो भारतीय स्वाभिमान, स्वतंत्रता और संकल्प का अद्भुत प्रतीक बन चुका है। राजस्थान की धरती के गर्व, मेवाड़ के सिसोदिया वंश के अमर नायक महाराणा प्रताप ने जीवन भर की आग संघर्षों आदर्शों को कुंद नहीं होने दिया। वे न सिर्फ तलवार के धनी थे, बल्कि आत्मबल, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम के ऐसे ध्वजवाहक थे, जिनकी गूंज आज भी समय की सीमाओं को लांघकर दिलों में प्रेरणा जगाती है।
कुंभलगढ़ में वर्ष 1540 को हुआ था प्रताप का जन्म
Maharana Pratap Jayanti : महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ किले में हुआ था। वे मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह (द्वितीय) व रानी जयवंता कंवर के पुत्र थे। पिता उदयसिंह ने चित्तौड़ के किले को मुगल सम्राट अकबर के हमलों से बचाने व मुगलों के अत्याचार से प्रजा की रक्षा के लिए कई संघर्ष किए लेकिन फिर भी 1568 में चित्तौड़गढ़ मुगलों के अधीन हो गया। इन घटनाओं ने प्रताप के मन में मुगलों के प्रतिरोध और प्रतिशोध की भावना को मजबूत किया। महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के महानतम योद्धाओं और स्वतंत्रता प्रेमियों में से एक थे। उनका जीवन वीरता, आत्मसम्मान और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का प्रतीक है। वे मेवाड़ राज्य सिसोदिया वंश के राजा थे और मुगल सम्राट अकबर के साथ उनके संघर्ष ने उन्हें अमर बना दिया।
हल्दीघाटी का युद्ध : मुगलों से ऐतिहासिक टकराव
Halldighati War : 18 जून 1576 को हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा गया। यह युद्ध भारत के इतिहास में शौर्य की पराकाष्ठा का प्रतिबिंब है। प्रताप की छोटी सी सेना ने अकबर की विशाल सेना का डटकर सामना किया। प्रताप व उनकी सेना की रणनीति और अदम्य साहस ने इसे भारतीय इतिहास का स्वर्णाक्षरों में लिखा जाने वाला युद्ध बना दिया। बादशाह अकबर ने मेवाड़ को अधीन करने के अनेक प्रयास किए। लेकिन प्रताप ने उसके निश्चय को ही रौंद डाला।
प्रताप के पास था विलक्षण युद्ध कौशल
Maharana Pratap ka jivan Parichay : महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व बेहद असाधारण था। वे अपने साथ कई किलो वजनी भाला और दो तलवारें रखते थे। उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें मेवाड़ के लोगों का प्रिय बनाया। 18 फरवरी 1572 को पिता उदयसिंह की मृत्यु के बाद 28 फरवरी 1572 को प्रताप का राजतिलक हुआ और वे मेवाड़ के 13वें महाराणा बने। महाराणा प्रताप का पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा।
चेतक ने बचाए प्रताप के प्राण
महाराणा प्रताप के प्रिय घोड़े चेतक ने हल्दीघाटी युद्ध में अपने जौहर दिखाए। चेतक ने अपने अगले पैरों को हाथी की सूंड पर रखा, जिससे प्रताप को मानसिंह पर वार करने का मौका मिला। इसमें ओहदे में छिपकर वह बच गया। इस प्रयास में चेतक का पैर जख्मी हो गया था। चेतक ने प्रताप को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकालते हुए अपने प्राण त्याग दिए। चेतक की वीरता और निष्ठा आज भी हल्दीघाटी युद्ध का इतिहास पढ़ने पर अचंभित करती है। युद्ध में हकीम खां सूर, भीलू राणा, झाला मान, रामशाह तंवर व उनके पुत्र सहित असंख्य मेवाड़ी वीरों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। प्रताप ने अपनी रणनीति के बल पर मुगलों के पैर उखाड़ फेंके। धीरे- धीरे मेवाड़ के कई हिस्सों को मुगलों से वापस लिया। हल्दीघाटी युद्ध का ऐतिहासिक महत्व इसकी रणनीति और प्रताप के साहस में निहित है। 19 जनवरी 1597 को इस लोक से महाप्रयाण कर गए। महाराणा प्रताप का संघर्षमय जीवन और हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ हैं।

Maharana Pratap height
Maharana Pratap weight and height : महाराणा प्रताप की ऊँचाई (Height) को लेकर इतिहास में विशेष रूप से उल्लेख मिलता है, क्योंकि यह उनकी शारीरिक शक्ति और वीरता का प्रतीक मानी जाती है। माना जाता है कि महाराणा प्रताप की लंबाई लगभग 7 फीट 5 इंच (लगभग 226 सेंटीमीटर) थी। इतनी ऊँचाई उस समय के किसी भी सामान्य व्यक्ति से कहीं अधिक मानी जाती थी। उनकी विशाल कद-काठी और ताकत के किस्से आज भी इतिहास में प्रेरणा का स्रोत हैं। कहा जाता है कि वे लगभग 80 किलो का भाला और लगभग 208 किलो का कुल सैन्य भार (ढाल, तलवार और कवच) लेकर युद्ध करते थे। उनकी घोड़ी “चेतक” भी उनके समान अत्यंत शक्तिशाली और तेज थी, जिसने हल्दीघाटी के युद्ध में अद्वितीय वीरता दिखाई। महाराणा प्रताप की ऊँचाई और ताकत न केवल उनके शौर्य की पहचान थी, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान, स्वतंत्रता प्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक भी बनी।
अक्सर पुछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: महाराणा प्रताप का इतिहास क्या है?
उत्तर:
महाराणा प्रताप मेवाड़ के एक महान राजपूत शासक थे, जिनका जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ (राजस्थान) में हुआ था। वे राणा उदयसिंह द्वितीय और रानी जयवंता बाई के पुत्र थे। उन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और आजीवन स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। हल्दीघाटी का युद्ध (1576) उनका सबसे प्रसिद्ध युद्ध था, जिसमें उन्होंने अकबर की विशाल सेना का बहादुरी से सामना किया। यद्यपि यह युद्ध निर्णायक नहीं रहा, लेकिन महाराणा प्रताप की वीरता और स्वाभिमान आज भी भारतीय इतिहास में अमर है। उन्होंने जंगलों में रहकर और कठिन परिस्थितियों में भी मेवाड़ की स्वतंत्रता की रक्षा की। उनका निधन 19 जनवरी 1597 को हुआ।
प्रश्न 2: महाराणा प्रताप को किसने मारा और कैसे मारा था?
उत्तर:
महाराणा प्रताप की मृत्यु किसी युद्ध में नहीं हुई थी। उनका निधन 19 जनवरी 1597 को हुआ, जब वे शिकार के दौरान घायल हो गए थे और उनके पुराने घाव फिर से उभर आए। उनकी मृत्यु प्राकृतिक रूप से हुई थी, किसी ने उन्हें मारा नहीं था।
प्रश्न 3: महाराणा प्रताप किसका बेटा था?
उत्तर:
महाराणा प्रताप मेवाड़ के राणा उदयसिंह द्वितीय और उनकी पत्नी रानी जयवंता बाई के पुत्र थे।
प्रश्न 4: महाराणा प्रताप किस भगवान को मानते थे?
उत्तर:
महाराणा प्रताप भगवान एकलिंगजी (भगवान शिव के स्वरूप) के परम भक्त थे। वे मेवाड़ के कुलदेवता माने जाते हैं और राणा प्रताप ने अपने जीवन में एकलिंगजी की आराधना को अत्यंत महत्व दिया।
प्रश्न 5: महाराणा प्रताप के कितने सगे भाई थे?
उत्तर:
महाराणा प्रताप के कुल 25 भाई थे, जिनमें कुछ सगे और कुछ सौतेले थे। उनके सगे भाइयों में प्रमुख नाम शक्तिसिंह, सागर सिंह और जगमाल सिंह आते हैं।
प्रश्न 6: महाराणा प्रताप के गुरु कौन थे?
उत्तर:
महाराणा प्रताप के आध्यात्मिक और नैतिक मार्गदर्शक उनके कुलगुरु Acharya Raghavendra थे। इसके अलावा, उनके सैन्य प्रशिक्षण में योगदान देने वाले कई वीर राजपूत योद्धा और दरबारी भी उनके जीवन में गुरु तुल्य माने जाते हैं।
प्रश्न 7: महाराणा प्रताप के भाई जगमाल की मृत्यु कैसे हुई थी?
उत्तर:
जगमाल सिंह, जो महाराणा प्रताप के सौतेले भाई थे, ने अकबर का साथ दिया था। बाद में जब वे बीकानेर के युद्ध में भाग ले रहे थे, तब एक युद्ध के दौरान उनकी मृत्यु 1583 में लड़ाई में हो गई। उन्हें युद्ध के दौरान मार दिया गया था।
प्रश्न 8: महाराणा प्रताप का भाला कितने किलो का था?
उत्तर:
महाराणा प्रताप का भाला लगभग 80 किलो का था। इसके अतिरिक्त वे जो कवच पहनते थे, उसकी कुल मिलाकर वजन लगभग 208 किलो बताया जाता है।
प्रश्न 9: महाराणा प्रताप कौन सा युद्ध हारे थे?
उत्तर:
महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी का युद्ध (1576) अकबर की सेना के सेनापति मानसिंह के विरुद्ध लड़ा था। यह युद्ध पूरी तरह से किसी की जीत या हार में समाप्त नहीं हुआ, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से मेवाड़ की सेना को पीछे हटना पड़ा। इसलिए इसे महाराणा प्रताप की पराजय माना जाता है, हालांकि उन्होंने बाद में पुनः कई क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की।
