
Manoj Purbia first death anniversary : युवा पत्रकार मनोज पूर्बिया की प्रथम पुण्यतिथि पर रविवार को सूचना केंद्र राजसमंद में एक मार्मिक स्मरणांजलि समारोह और परिचर्चा का आयोजन किया गया। “नागरिक पत्रकारिता से मुख्य धारा तक” विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम में मनोज के जीवन और योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने उनकी निष्पक्षता, बेबाकी और समर्पण की मिसालें दीं। अल्पायु में ही उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी, जो आज भी युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। पाञ्चजन्य पत्रिका के वितरक से लेकर मुख्यधारा मीडिया के बेबाक चेहरा बनने तक की उनकी यात्रा प्रेरणादायक रही।
कार्यक्रम की शुरुआत में वक्ता सुरेश शर्मा ने मनोज के प्रारंभिक दिनों को स्मृति में जीवंत किया। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही मनोज ने पाञ्चजन्य पत्रिका के वितरक के रूप में अपने कर्मक्षेत्र को संवारना शुरू कर दिया था। विभिन्न विषयों पर नगर के बुद्धिजीवियों के साथ गहन चर्चाएं करना और संपादक को पत्र लिखना उनकी सहज रुचि थी। यही उत्साह और जिज्ञासा उनके भीतर एक सशक्त पत्रकार को जन्म देने वाली साबित हुई। सुरेश शर्मा ने जोर देकर कहा कि मनोज की यह यात्रा दर्शाती है कि सच्ची पत्रकारिता की जड़ें जमीनी स्तर पर ही पनपती हैं, जहां उत्सर्ग और सीखने की ललक सबसे बड़ी ताकत होती है।
नागरिक पत्रकारिता का महत्व

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार ने परिचर्चा को एक नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की प्रथम सीढ़ी नागरिक पत्रकारिता ही है, जो हर युवा के स्मार्टफोन के माध्यम से सुलभ है। समाज हित में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दिशा-निर्देश की जरूरत है, ताकि यह ऊर्जा सकारात्मक परिवर्तन ला सके। राजसमंद जैसे सृजनात्मक वातावरण को प्रोत्साहन देकर हम मनोज जैसे और भी प्रतिभाशाली पत्रकारों को जन्म दे सकते हैं। सुनील ने सामूहिक प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि मूल्यपरक पत्रकारिता एक चुनौतीपूर्ण यात्रा है, जिसमें स्व-मूल्यांकन का गुण ही पत्रकार को ऊंचाइयों तक ले जाता है। मनोज में ये सभी गुण कूट-कूटकर भरे थे, जो उन्हें एक समर्पित योद्धा बनाते थे।
देवेंद्र शर्मा की यादें
जयपुर के इलेक्ट्रॉनिक चैनल में मनोज के सहकर्मी रहे देवेंद्र शर्मा ने उनके उत्साहपूर्ण व्यक्तित्व को बयां किया। उन्होंने साझा किया कि अवसर मिलते ही मनोज खुद को सिद्ध करने को बेताब रहते थे और निरंतर सीखने की प्यास उन्हें हमेशा प्रेरित करती थी। नतीजा यह हुआ कि जल्द ही वे डेस्क से निकलकर रिपोर्टर की भूमिका में आ गए, जहां उनकी तेज नजर और सटीक रिपोर्टिंग ने सभी को प्रभावित किया।
धरातल की पड़ताल: नरपत नाथ की प्रशंसा
राजसमंद में लंबे समय तक साथ कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार नरपत नाथ ने मनोज की जमीनी पत्रकारिता की तारीफ की। उन्होंने उल्लेख किया कि तथ्यों की गहन खोज और बिना किसी पक्षपात के उन्हें उजागर करने का उनका कौशल अद्वितीय था।
खुशवंत श्रीमाली ने मनोज के जीवन-यात्रा का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था कि अहमदाबाद से डिप्लोमा पूरा होते ही उन्होंने समाचार पत्र हिन्दुस्तान से जुड़ना स्वीकार कर लिया।
सांसद कार्यालय में सहकर्मी रहे मदन शर्मा ने मनोज की बेबाकी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार के रूप में मनोज की स्पष्टवादिता उनके हर कार्य में झलकती थी। बिना किसी हिचकिचाहट के सत्य को सामने लाने का उनका स्वभाव उन्हें एक विश्वसनीय चेहरा बनाता था।

समापन में भावपूर्ण श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में शांति पाठ के साथ सभी ने मनोज की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। यह क्षण उपस्थितजनों के लिए भावुक रहा, जहां उनकी स्मृतियां जीवंत हो उठीं। फोटो जर्नलिस्ट भरत, परिजन देवेश पूर्बिया, पुष्पेंद्र पणिक्कर, संजय कुमावत, मुकेश सहित कई अन्य ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने मनोज के निधन को पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उनकी विरासत हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।



