
लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद : MBA farmer success story : कभी खेती को मजबूरी माना जाता था और नौकरी को सफलता। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नई पीढ़ी खेती को स्टार्टअप की तरह ले रही है। कुछ ऐसी ही कहानी है राजसमंद शहर के युवा आकाश हिंगड़ की, जो एमबीए करने के बाद मुंबई के बैंक में 25 लाख रुपए के पैकेज की नौकरी छोड़ कर खेती करने लगे। सैलरी की तय रकम से संतुष्ट रहने के बजाय जोखिम उठाया, आधुनिक तकनीक अपनाई और खेती को व्यवसाय की तरह मैनेज किया। नतीजा यह हुआ कि पहले ही साल उसकी कमाई नौकरी के पैकेज से दोगुनी हो गई। जहां लोग रोजगार के लिए शहरों की ओर भागते हैं और आकाश ने गांव में ही कमाई का नया मॉडल खड़ा कर दिया। आकाश की सफलता ने यह सोच बदल दी कि खेती में भविष्य नहीं है। मौसम के हालात, सही योजना, नई तकनीक, बाजार की डिमांड और मार्केट की समझ के साथ आकाश ने खेती शुरू की, जिससे एक वर्ष में ही 60 लाख रुपए की कमाई कर ली। इस तरह एमबीए युवा किसान आकाश आज अपने खेत पर 15 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
आकाश हिंगड़ मूलत: राजसमंद शहर के निवासी है और उनके पिता मार्बल व प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े रहे। मुंबई में ग्रामीण विकास में एमबीए की पढ़ाई के बाद आकाश ने डिजिटल पेमेंट कंपनी व एचडीएफसी बैंक के कॉर्पोरेट कंपनी में 24 से 25 लाख रुपए पैकेज की नौकरी छोड़कर अपने शहर लौट आए। फिर कुरज गांव में स्थित पुश्तैनी 32 एकड़ जमीन पर एकीकृत फार्म के एक व्यापक मॉडल के रूप खेती का कार्य शुरू किया। जमीन को चारों तरफ तारबंदी कर सुरक्षित किया। साथ ही आकाश ने राजसमंद से लेकर महाराष्ट्र तक सफल किसानों के खेत विजिट किए और आधुनिक तकनीक को समझा। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ली, तो कृषि अधिकारियों का मार्गदर्शन लेते हुए आधुनिक तकनीक के साथ खेती करने लगे। खेती को बिजनेस के रूप में लेते हुए नई तकनीक पर इन्वेस्ट भी किया और कृषि कल्याण की योजनाओं का अनुदान भी लेते रहे। इसके तहत तीन पॉली हाउस लगाए, जिसमें खीरा की खेती की जा रही है। पूरे साल खीरा की उपज हो सके। इसके लिए एक प्लास्टिक पॉली हाउस है, जिससे बारिश का पानी अंदर न जाए और फसल खराब न हो। साथ ही 2 नेट पॉली हाउस है, ताकि बारिश और तापमान से फसल सुरक्षित रहे, जबकि दो नेट पॉली हाउस में वर्षभर सब्जियों की खेती की जा रही है। जैविक खाद का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
लेजर लेवल तकनीक से बढ़ी पैदावार, बचा पानी

Corporate job quit for farming : खेती के शुरुआती दौर में ही तेज बारिश के चलते खेत में पानी भर गया, जिससे मक्का की फसल खराब हो गई। इससे सबक लेते हुए आकाश ने खेत का लेवल तय करने की तकनीक तलाशी, जिससे लेजर लेवल मशीन के बारे में पता चला, मगर कृषि विभाग राजसमंद से लेकर कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर तक यह मशीन नहीं मिली। फिर वे पंजाब से यह मशीन खरीद लाए और पूरे खेत को लेजर लेवल तकनीक से समतल किया। साथ ही बैड पर फसल तकनीक को अपनाया, जिसके लिए भी मशीन लाए। इस तरह कम मेहनत में सुरक्षित फसल की तकनीक को अपनाया। इस तरह खेत में पानी भरने की समस्या खत्म होने के साथ 20 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत भी हुई और उपज बढ़ गई। आकाश ने बताया कि पूरे उदयपुर संभाग में लेजर लेवल मशीन सिर्फ उनके पास ही है। कोटा क्षेत्र में इस तरह की मशीन का उपयोग किसान कर रहे हैं।
15 लोगों को मिला रोजगार, अब 1 करोड़ का लक्ष्य

Modern farming success Rajasthan : आकाश ने खेती को व्यवसाय के रूप में विकसित किया। पॉली हाउस से लेकर खेत तैयार करने, मशीने चलाने, सिंचाई आदि कार्य के जरिए 15 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। ये सभी लोग फसल- सब्जियों की बुवाई, निराई, हकाई, खाद देने, तैयार फल- सब्जी को तोड़ने व कृषि मंडी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इतने लोगों का वेतन व खर्च निकालने के बाद 60 लाख रुपए तक सालभर में कमाए हैं और आकाश का लक्ष्य है कि इस वित्तीय वर्ष में यह कमाई 1 करोड़ के पार पहुंच जाए। इसके लिए खीरा के साथ पपीता के लिए खेत तैयार कर रहे हैं। इस तरह आकाश की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और सही प्रबंधन अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

खीरा से सबसे ज्यादा कमाई, फिर सब्जियां

Polyhouse farming profit : आकाश अभी सबसे ज्यादा कमाई खीरा (ककड़ी) से कर रहे हैं। तीनों पॉली हाउस में खीरा की बुवाई कर रखी है। साथ ही तरोई, आल, टमाटर, मिर्ची, मटर, तरबूज, खरबूज आदि सब्जियां है। सबसे ज्यादा आय खीरा ककड़ी से हुई और सब्जियां भी नियमित कमाई दे रही है। प्रतिदिन खेत से खीरा व सब्जियां राजसमंद व उदयपुर कृषि उपज मंडी तक पहुंचाई जा रही है।
लाखों रुपए का सरकारी अनुदान भी प्राप्त किया

Young farmer earning 60 lakh per year : आकाश हिंगड़ ने बताया कि आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार और केन्द्र सरकार द्वारा कई योजनाएं चला रखी है। इसके तहत तीन पॉली हाउस लगाए, जिस पर 56 प्रतिशत तक अनुदान केन्द्र सरकार द्वारा दिया गया। साथ ही बूंद बूंद सिंचाई योजना के तहत भी कृषि मंत्रालय से अनुदान मिला। अब बिजली खर्च कम करने के लिए सोलर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है, जिस पर भी सरकार से अनुदान भी मिलेगा और मुफ्त बिजली का उपयाेग भी कर सकेंगे।
खीरा व मटर की गुणवत्ता भी टॉप

आकाश द्वारा जैविक तरीके से खेती कर रहे हैं। इसी कारण उनके खेत में उत्पादित खीरा व मटर की गुणवत्ता कृषि विभाग की जांच में बेहतर रही। हाल ही में उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा कृषि मेला व फल- सब्जी प्रदर्शनी में गुणवत्ता की जांच करने पर उनका खीरा प्रथम रहा, जबकि मटर की गुणवत्ता द्वितीय स्थान पर रही।
एक नजर में

- ₹25 लाख सालाना पैकेज की नौकरी छोड़ शुरू की खेती
- 32 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर शुरू की खेती
- 60 लाख रुपए से ज्यादा कमाए पहले ही साल में
- लेजर लेवल आधुनिक मशीन से खेत को किसान समतल
- 20–30% तक पानी बचत और बेहतर उत्पादन आधुनिक तकनीक से हुआ
- 3 पॉली हाउस (1 प्लास्टिक + 2 नेट) में सालभर सब्जी उत्पादन
- 15 लोगों को आकाश अपने खेत पर दे रहे हैं रोजगार
- ₹1 करोड़ सालाना आय का लक्ष्य तय किया है आकाश ने





