
Mosam : राजस्थान की धरती पर इस बार अक्टूबर महीना प्रकृति के अनोखे रंगों से सराबोर रहा। बेमौसम बारिश ने न केवल 27 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया, बल्कि सामान्य औसत से लगभग पांच गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई। इस भारी बारिश का असर इतना गहरा पड़ा कि अक्टूबर में पहली बार बीसलपुर (टोंक), भीमसागर (झालावाड़), उदयसागर (उदयपुर), फतेहसागर झील और घोसुंडा बांध (चित्तौड़गढ़) जैसे प्रमुख जलाशयों के गेट खोलने पड़े। विशेषज्ञों के अनुसार, अरब सागर में विकसित डिप्रेशन सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की संयुक्त क्रिया ने इस असामान्य मौसमी घटना को जन्म दिया। हालांकि, यह बारिश किसानों के लिए दोहरी मार साबित हुई—एक ओर फसलें बर्बाद हुईं, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण के लिए यह वरदान भी बनी। अब मौसम विभाग ने नवंबर में सामान्य सर्दी का अनुमान जताया है, जो राज्यवासियों को ठंडी हवाओं की सरसराहट से राहत देगी। आइए, इस ऐतिहासिक मौसमी घटना की गहराई में उतरें।
अक्टूबर में रिकॉर्ड तोड़ बारिश
Rajasthan Rainfall Record : राजस्थान, जो अपनी शुष्क जलवायु के लिए जाना जाता है, इस बार अक्टूबर में प्रकृति के कोप का शिकार बना। मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि सामान्यतः अक्टूबर में पूरे राज्य में औसतन 10.6 मिलीमीटर (MM) वर्षा होती है, जो मानसून के बाद की शांत अवधि का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन इस वर्ष अक्टूबर में 56.6 MM बारिश ने सभी को चौंका दिया। यह आंकड़ा 1998 के 67.3 MM के रिकॉर्ड को तोड़ने के करीब पहुंच गया, जो 27 साल पुराना था।

इस बेमौसम बौछार ने राज्य के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों को सबसे अधिक प्रभावित किया। उदाहरण के लिए, उदयपुर संभाग में 26 से 28 अक्टूबर के बीच कई जिलों में 70 से 140 MM के बीच वर्षा हुई, जो सामान्य से कई गुना अधिक थी। इससे न केवल नदियां उफान पर आईं, बल्कि जल स्तर इतना बढ़ गया कि बांधों को अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वर्षा जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का एक संकेत हो सकती है, जहां मौसमी चक्र अनियमित हो रहे हैं। राज्य के जल संसाधन विभाग के अनुसार, सितंबर तक ही अधिकांश बांध 90 प्रतिशत से अधिक भर चुके थे, क्योंकि मानसून में जून से सितंबर तक औसत से 126 प्रतिशत अधिक बारिश हुई थी। अक्टूबर की यह अतिरिक्त वर्षा ने उन जलाशयों को ओवरफ्लो की स्थिति में धकेल दिया, जहां निकासी का उपयोग सिंचाई या अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं हो पाया।
बांधों के गेट खुले
Rajasthan Weather News : इस भारी वर्षा का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव राज्य के प्रमुख बांधों और झीलों पर पड़ा। अक्टूबर में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर गेट खोलने पड़े, जो राज्य की जल प्रबंधन प्रणाली के लिए एक दुर्लभ घटना है। यहां प्रमुख जलाशयों की स्थिति का विस्तृत विवरण है:
- बीसलपुर बांध (टोंक): त्रिवेणी नदी के उफान पर आने के कारण एक गेट खोला गया। लगभग 3,005 क्यूसेक पानी की निरंतर डिस्चार्ज जारी रही, जो जयपुर और टोंक के लिए पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत है। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा टल गया, लेकिन नदियों के किनारे सतर्कता बरतनी पड़ी।
- भीमसागर बांध (झालावाड़): अक्टूबर में पहली बार एक गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। यह बांध कोटा बैराज को पानी सप्लाई करता है, और इस डिस्चार्ज ने निचले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए फायदा पहुंचाया।
- उदयसागर बांध (उदयपुर): दो गेट खोलकर पानी की निकासी की गई। उदयपुर शहर के लिए महत्वपूर्ण यह बांध 100 वर्षों में सबसे अधिक वर्षा (9 MM से अधिक) का गवाह बना। इससे स्थानीय स्तर पर जल स्तर नियंत्रित रहा।
- फतेहसागर झील (उदयपुर): तीन गेट खोलकर अतिरिक्त जल को बाहर किया गया। यह झील न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि शहर की जल आपूर्ति का आधार भी। गेट खुलने से पर्यटक स्थलों पर जलजमाव की स्थिति बनी रही।
- घोसुंडा बांध (चित्तौड़गढ़): दो गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। चित्तौड़गढ़ में हुई रिकॉर्ड वर्षा के कारण यह कदम उठाना पड़ा, जो निचली बस्तियों को बचाने के लिए जरूरी था।
इनके अलावा, अन्य बांध जैसे राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर में भी सतर्कता बरती गई, हालांकि उनके गेट नहीं खुले। जल संसाधन विभाग ने बताया कि कुल 692 बांधों में से 31 ओवरफ्लो हो चुके थे, और यह डिस्चार्ज सिंचाई के लिए 16 जिलों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को लाभ पहुंचाएगा। लेकिन इस प्रक्रिया ने निचले इलाकों में बाढ़-जैसे हालात पैदा कर दिए, जहां सड़कें जलमग्न हो गईं और कुछ गांव कट गए।

भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में ऑल टाइम रिकॉर्ड
Heavy Rainfall in Rajasthan : तेज वर्षा ने विशेष रूप से भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों में एकदिवसीय रिकॉर्ड तोड़ दिए। 27 अक्टूबर को भीलवाड़ा में 88 MM बारिश हुई, जो 1962 के बाद का सर्वोच्च आंकड़ा है। मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, 1962 से रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद यह सबसे अधिक है। इससे पहले 1 अक्टूबर 1970 में 47.6 MM का रिकॉर्ड था। इसी तरह, चित्तौड़गढ़ में 68 MM वर्षा ने 1973 के बाद का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। 1973 से डेटा संग्रहण शुरू होने के बाद 11 अक्टूबर 1974 के 57.2 MM के आंकड़े को पार कर लिया।
इन जिलों में बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। उदाहरण के लिए, उदयपुर, प्रतापगढ़, कोटा और बाड़न में 1 से 3 इंच वर्षा से कटाई के बाद खेतों में रखी फसलें बर्बाद हो गईं। नैनवा (बूंदी) में चार इंच बारिश ने सबसे अधिक प्रभाव डाला। किसान संगठनों ने मुआवजे की मांग की है, जबकि सरकार ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है।
बेमौसम बारिश के पीछे वैज्ञानिक कारण
Udaipur Rainfall News मौसम निदेशक राधेश्याम शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस असामान्य वर्षा के पीछे दो प्रमुख मौसमी सिस्टम जिम्मेदार थे। 22 अक्टूबर को अरब सागर में विकसित डिप्रेशन सिस्टम 31 अक्टूबर तक सक्रिय रहा, जिसने राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अच्छी बरसात कराई। वहीं, 27-28 अक्टूबर को एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने उत्तरी और पश्चिमी राजस्थान को प्रभावित किया। बंगाल की खाड़ी में एक और सिस्टम ने दक्षिणी हिस्सों को निशाना बनाया।
ये सिस्टम सामान्यतः सर्दियों में सक्रिय होते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अक्टूबर में उनकी उपस्थिति ने वर्षा को बढ़ावा दिया। जून महीने की औसत 55 MM वर्षा (लगभग 15 दिनों में) से भी अधिक यह अक्टूबर की बरसात रही, जो मानसून सीजन (जून-सितंबर) के बाद की अप्रत्याशित थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ऐसे घटनाक्रम भविष्य में और बढ़ सकते हैं, जिसके लिए जल प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत है।
नवंबर में सर्दी का स्वागत
अक्टूबर की इस बौछार के बाद अब राजस्थानवासी सर्दी की चांदी-सी ठंडक का इंतजार कर रहे हैं। मौसम केंद्र नई दिल्ली की फोरकास्ट के अनुसार, नवंबर में सामान्य सर्दी रहेगी। बीकानेर संभाग और शेखावाटी बेल्ट (सीकर, झुंझुनू) में न्यूनतम तापमान औसत से नीचे रहेगा, जिससे रातें थोड़ी सिहरन भरी होंगी। जबकि अजमेर, जयपुर, भरतपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभागों में न्यूनतम तापमान औसत के आसपास रहेगा।
दिन के अधिकतम तापमान की बात करें तो उदयपुर, कोटा, भरतपुर और अजमेर संभागों में सामान्य से नीचे रहेगा, जिससे दिन में भी हल्की ठंड महसूस होगी। जोधपुर संभाग में तापमान औसत रहेगा। कुल मिलाकर, यह सर्दी पिछले वर्षों जैसी सामान्य रहेगी, बिना किसी चरम ठंड या गर्मी के। हालांकि, ठंडी हवाओं के कारण कुहासा (Fog) की संभावना है, जिससे यातायात प्रभावित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि सर्दी से बचाव के लिए गर्म कपड़े और पौष्टिक आहार अपनाएं।



