
Obituary for living daughter : सामाजिक मर्यादाओं और पारिवारिक मान्यताओं को लेकर एक चौंकाने वाला मामला उदयपुर शहर से सामने आया है। यहां एक पिता ने अपनी जिंदा बेटी को सामाजिक रूप से मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, परिवार ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उसके नाम से गौराणी धूप दस्तूर (मृत्युभोज) भी आयोजित किया। पिता ने बेटी के नाम से शोक संदेश (Obituary) छपवाकर समाज के लोगों में बांटा और उसे अपनी वसीयत (Will) से भी बेदखल करने का फैसला ले लिया। यह पूरा मामला उदयपुर शहर से सटे प्रतापनगर थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां परिवार की प्रतिष्ठा और सामाजिक मान-सम्मान को ठेस पहुंचने के बाद यह कठोर कदम उठाया गया।
Udaipur father declared daughter dead : परिजनों के अनुसार, करीब दो महीने पहले ही बेटी की शादी समाज के रीति-रिवाजों और परिवार की सहमति से एक युवक के साथ धूमधाम से की गई थी। शादी में समाज के लोग, रिश्तेदार और गांव के गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए थे। परिवार को उम्मीद थी कि बेटी अपने वैवाहिक जीवन में खुश रहेगी और परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखेगी। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद हालात पूरी तरह बदल गए। पिता ने बताया कि 23 जनवरी को उनकी बेटी अचानक ससुराल छोड़कर अपने प्रेमी के साथ चली गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और ससुराल पक्ष में हड़कंप मच गया। मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस की मदद से पिता 28 जनवरी को बेटी तक पहुंचे। पिता ने बताया कि उन्होंने दो दिनों में दो बार बेटी से बातचीत की। उसे समझाने, घर लौटने और रिश्तों की अहमियत बताने की हर संभव कोशिश की गई, लेकिन बेटी ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती है और अब उसका परिवार से कोई संबंध नहीं रहेगा।
बेटी ने परिवार से रिश्ता तोड़ने की कही बात
Funeral feast for living daughter : पिता के मुताबिक, बेटी ने उनसे और पूरे परिवार से संबंध खत्म करने की बात कही। उसने स्पष्ट कर दिया कि वह उसी युवक के साथ रहना चाहती है, जिसके साथ वह गई है। परिवार की इज्जत, माता-पिता की भावनाएं और समाज की परंपराएं—इन सभी बातों का उस पर कोई असर नहीं पड़ा। बेटी के इस रवैये से पिता गहरे आहत हो गए। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी की सारी कमाई, सम्मान और विश्वास बेटी पर न्यौछावर किया था, लेकिन बदले में उन्हें यह दिन देखना पड़ा।

छपवाया शोक संदेश, बांटे Obituary कार्ड
Father disowns daughter eloped : घटना के बाद पिता ने एक असामान्य और सख्त फैसला लिया। उन्होंने बेटी को उसी दिन से मृत मान लिया। परिवार ने एक Obituary (शोक संदेश) छपवाया, जिसमें बेटी के ‘निधन’ की सूचना समाज को दी गई। ये शोक संदेश गांव और समाज के लोगों में बांटे गए और उन्हें मृत्युभोज में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। इस शोक संदेश को देखकर समाज के लोग भी हैरान रह गए, लेकिन परिवार ने इसे अपनी भावनात्मक स्थिति और सामाजिक संदेश के रूप में पेश किया।
हिंदू रीति-रिवाजों से किया ‘गौराणी धूप दस्तूर’
Rajasthan social customs case : पिता और परिवार ने हिंदू परंपराओं के अनुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद जो रीति-रिवाज निभाए जाते हैं, वे सभी निभाए। गौराणी धूप दस्तूर (मृत्युभोज) का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के लोग शामिल हुए। बेटी की प्रतीकात्मक ‘विदाई’ की गई और उसे सामाजिक रूप से मृत मान लिया गया।
वसीयत (Will) से भी किया बेदखल
पिता ने कहा कि अब उनका बेटी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी वसीयत (Will) में भी बेटी का नाम हटा देंगे। उनकी संपत्ति और अधिकारों से भी उसे पूरी तरह बेदखल किया जाएगा। पिता के शब्दों में, “मेरे लिए वह अब जिंदा नहीं है, वह हमारे लिए मर चुकी है।”
