
Petrol Price Hike : देश की सरकारी तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी कर दी है। शुक्रवार को स्पीड, पावर और एक्सपी95 जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक इजाफा किया गया। हालांकि राहत की बात यह है कि सामान्य पेट्रोल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पुराने रेट पर ही उपलब्ध रहेगा।
Premium Petrol Price Today : यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर सीधे तेल बाजार पर पड़ा है। इसी वजह से वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल महंगा हुआ है, जिसका असर अब भारत में प्रीमियम ईंधन पर दिखाई देने लगा है।
किन कंपनियों के कौन से प्रीमियम पेट्रोल महंगे हुए
Power Petrol Price : देश में अलग-अलग सरकारी तेल कंपनियां प्रीमियम पेट्रोल को अलग ब्रांड नाम से बेचती हैं।
BPCL का प्रीमियम पेट्रोल Speed,
HPCL का Power,
और IOCL का XP95 नाम से बाजार में उपलब्ध है।
इन प्रीमियम ईंधनों को बेहतर परफॉर्मेंस, इंजन की स्मूद रनिंग और हाई-ऑक्टेन क्वालिटी के कारण खास तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। अब इनकी कीमतों में बढ़ोतरी से उन वाहन चालकों पर सीधा असर पड़ेगा, जो नियमित रूप से प्रीमियम फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं।
सामान्य पेट्रोल उपभोक्ताओं को राहत
BPCL Speed Petrol Price : तेल कंपनियों ने फिलहाल केवल प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए हैं। आम उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी जो लोग रेगुलर पेट्रोल भरवाते हैं, उन्हें अभी इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं झेलना पड़ेगा।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह
Iran War Oil Price Impact : जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में हाल के दिनों में जबरदस्त तेजी आई है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 109.54 डॉलर प्रति बैरल के आसपास दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यह कीमत बढ़कर 117.98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। तेल बाजार के जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। जब भी युद्ध या संघर्ष की स्थिति बनती है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो जाता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं।
भारत में ‘इंडियन बास्केट’ भी महंगी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी का असर भारत की तेल खरीद लागत पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, रूस और यूएई जैसे देशों से आयात करता है। इन अलग-अलग देशों से खरीदे गए तेल के औसत मूल्य को ‘इंडियन बास्केट’ कहा जाता है। यही इंडियन बास्केट भारत के लिए तेल आयात की वास्तविक लागत का आधार बनता है। जब इसका औसत बढ़ता है, तो तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ता है और अंततः इसका असर ईंधन कीमतों पर दिखाई देता है।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम
| शहर | पेट्रोल (₹ प्रति लीटर) | डीजल (₹ प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 94.72 | 87.62 |
| मुंबई | 103.44 | 89.97 |
| कोलकाता | 103.94 | 90.76 |
| चेन्नई | 100.75 | 92.34 |
| भोपाल | 106.47 | 91.84 |
| रायपुर | 100.39 | 93.33 |
| जयपुर | 104.88 | 90.36 |
| चंडीगढ़ | 94.24 | 82.40 |
प्रीमियम पेट्रोल ही क्यों हुआ महंगा
विशेषज्ञों की मानें तो कंपनियां अक्सर पहले प्रीमियम ईंधन के दामों में बदलाव करती हैं, क्योंकि इसका इस्तेमाल अपेक्षाकृत सीमित उपभोक्ता वर्ग करता है और इससे कंपनियों को लागत समायोजन में कुछ राहत मिलती है। सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव राजनीतिक और आर्थिक रूप से अधिक संवेदनशील माना जाता है, इसलिए उनमें तुरंत परिवर्तन नहीं किया जाता।
आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल सामान्य पेट्रोल को पुराने दाम पर बनाए रखा गया है, लेकिन अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो भविष्य में आम उपभोक्ताओं को भी महंगे ईंधन का सामना करना पड़ सकता है।
वाहन चालकों पर क्या होगा असर
प्रीमियम पेट्रोल का उपयोग खास तौर पर हाई-परफॉर्मेंस बाइक्स, लग्जरी कारों और उन वाहनों में ज्यादा होता है, जिनमें बेहतर माइलेज और इंजन परफॉर्मेंस के लिए हाई-ऑक्टेन ईंधन की सलाह दी जाती है। ऐसे में इस सेगमेंट के वाहन मालिकों का खर्च अब बढ़ना तय है।
भले ही सामान्य पेट्रोल उपभोक्ताओं को अभी राहत मिली हुई है, लेकिन तेल बाजार में अस्थिरता ने यह संकेत दे दिया है कि वैश्विक घटनाक्रम का असर घरेलू बाजार तक तेजी से पहुंच रहा है।



