
Petrol Price Today : बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की जिंदगी को और मुश्किल बना दिया है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर दैनिक उपभोग की वस्तुओं तक, हर चीज की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस महंगाई का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है डीजल की बढ़ती कीमतें, क्योंकि अधिकांश सामानों की ढुलाई डीजल से चलने वाले वाहनों के माध्यम से होती है। ऐसे में आम जनता सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन हालिया खबरों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसके तहत पेट्रोल पर 8.02 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल पर 7.01 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह वृद्धि आम जनता पर सीधे तौर पर प्रभाव नहीं डालेगी, क्योंकि यह लेवी में वृद्धि है, जिसे तेल कंपनियां वहन करेंगी।
कीमतों में वृद्धि का कारण और प्रभाव
Diesel Price : रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल पर लेवी को 8.02 रुपये बढ़ाकर 78.02 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल पर लेवी को 7.01 रुपये बढ़ाकर 77.01 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। यह वृद्धि तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी है। इसके बावजूद, पेट्रोल की खुदरा कीमत 254.63 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 258.64 रुपये प्रति लीटर पर अपरिवर्तित रहेगी। इसका मतलब है कि उपभोक्ताओं को पंप पर अतिरिक्त कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी। यह कदम सरकार की ओर से तेल कंपनियों के मार्जिन को समायोजित करने और राजस्व बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है।
Fuel Price Hike : इस बढ़ोतरी का समय भी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में कमी देखी गई है। 15 अप्रैल 2025 को ब्रेंट क्रूड वायदा 65 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो अगस्त 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट के चलते कई विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आएगी। पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी तेल की कीमतों में कमी की सिफारिश की गई थी, लेकिन भारत में सरकार ने लेवी बढ़ाने का फैसला किया।
क्या है लेवी और इसका असर?
Crude Oil Prices : लेवी एक प्रकार का कर है, जो तेल कंपनियों पर लगाया जाता है। यह सरकार के राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। पेट्रोल और डीजल की कीमत में लेवी के अलावा उत्पाद शुल्क, मूल्य वर्धित कर (VAT), और डीलर कमीशन भी शामिल होता है। इस बार लेवी में वृद्धि का बोझ तेल कंपनियों पर डाला गया है, जिसके चलते खुदरा कीमतों पर कोई बदलाव नहीं हुआ है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी संकेत दिए थे कि तेल कंपनियों के पास कीमतों को समायोजित करने की गुंजाइश है, खासकर जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा हो।
हालांकि, यह सवाल उठता है कि अगर कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तो लेवी बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी? विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस अवसर का उपयोग राजस्व बढ़ाने के लिए कर रही है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में कमी से तेल कंपनियों के मार्जिन में सुधार हुआ है। इसके अलावा, भारत 80% से अधिक कच्चे तेल का आयात करता है, और रुपये-डॉलर विनिमय दर भी कीमतों को प्रभावित करती है।

आपके शहर में क्या हैं रेट?
Petrol Diesel Rates : देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें शहरों के आधार पर भिन्न होती हैं, क्योंकि इसमें राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट और परिवहन लागत शामिल होती है। उदाहरण के लिए, 19 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.62 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं, मुंबई में पेट्रोल 103.50 रुपये प्रति लीटर और तेलंगाना में 107.96 रुपये प्रति लीटर था। त्रिवेंद्रम में पेट्रोल की कीमत 107.48 रुपये प्रति लीटर थी, जो देश में सबसे अधिक थी। दूसरी ओर, पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल की कीमत 82.46 रुपये प्रति लीटर थी, जो सबसे कम थी।
आप अपने शहर की ताजा कीमतें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, या हिंदुस्तान पेट्रोलियम की वेबसाइट्स पर जाकर या उनके मोबाइल ऐप्स जैसे Fuel@IOC, Smart Drive, या My HPCL डाउनलोड करके चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, इंडियन ऑयल के ग्राहक अपने शहर का कोड और “RSP” टाइप करके 9224992249 पर SMS भेजकर भी कीमतें जान सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और भारत की नीतियों के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें भविष्य में भी प्रभावित हो सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद, सरकार ने लेवी बढ़ाकर यह संदेश दिया है कि राजस्व संग्रह उसकी प्राथमिकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चा तेल लगातार सस्ता रहा, तो भविष्य में उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
फिलहाल, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि पंप पर कीमतें नहीं बढ़ी हैं। लेकिन महंगाई का दबाव कम करने के लिए सरकार को और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से कीमतों की जांच करें और तेल कंपनियों के आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
