
Rajasthan bus strike news : राजस्थान में निजी बस संचालकों की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही, जिससे प्रदेश का यातायात तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो गया है। हजारों प्राइवेट बसों के पहिए थमने से रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी उन श्रद्धालुओं को झेलनी पड़ रही है जो खाटूश्यामजी मेले में दर्शन के लिए जा रहे हैं, साथ ही होली पर्व पर अपने घर लौटने वाले यात्रियों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
हड़ताल के कारण रोडवेज बसों और ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई है। कई रूटों पर स्थिति ऐसी रही कि बसों में चढ़ने तक की जगह नहीं बची। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि कई लोगों को खड़े होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ी। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भारी भीड़ देखी गई।
35 हजार बसें बंद, परिवहन व्यवस्था चरमराई
Private bus operators strike Rajasthan today : प्राइवेट बस ऑपरेटर्स के अनुसार प्रदेशभर में करीब 35,000 निजी बसों का संचालन ठप है। इसमें लोक परिवहन (Local Transport Service) शामिल नहीं है। बसें बंद रहने से इंटरसिटी और ग्रामीण रूटों पर आवाजाही लगभग आधी रह गई है। राजधानी जयपुर, कोटा, सीकर, नागौर, अजमेर और शेखावाटी क्षेत्र में हालात ज्यादा गंभीर नजर आए। कई स्थानों पर यात्री सुबह से शाम तक बस का इंतजार करते रहे लेकिन उन्हें सीट नहीं मिल सकी।
शहर-शहर दिखी भीड़ की तस्वीर
- कोटा: 35000 buses off road Rajasthan transport strike : निजी बसों का संचालन पूरी तरह बंद रहा। प्राइवेट पार्किंग यार्ड से एक भी बस नहीं निकली।
- डीडवाना: रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों की इतनी भीड़ रही कि बसों में पैर रखने की जगह तक नहीं बची।
- सीकर: रोडवेज डिपो और रेलवे स्टेशन दोनों जगह भारी भीड़ रही। छोटी दूरी तय करने के लिए भी लोगों को ट्रेन पकड़नी पड़ी।
- जयपुर: अतिरिक्त बसें चलाने के बावजूद यात्रियों को सीट मिलना मुश्किल रहा।

होली और खाटू मेला बना बड़ी वजह
Khatu Shyam Mela travel problems Rajasthan : इस समय खाटूश्यामजी का वार्षिक मेला चल रहा है और होली का त्योहार भी नजदीक है। हर साल इन दिनों यात्रा का दबाव बढ़ता है, लेकिन इस बार हड़ताल ने समस्या को कई गुना बढ़ा दिया है। परिवार सहित यात्रा करने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। कई यात्रियों ने मजबूरी में प्राइवेट टैक्सी और कैब सेवाओं का सहारा लिया, जिससे किराए भी अचानक बढ़ गए।
रोडवेज और रेलवे पर बढ़ा लोड
Rajasthan roadways crowd due to bus strike : हड़ताल के कारण राजस्थान रोडवेज ने अतिरिक्त बसें (Extra Services) चलाने की कोशिश की, लेकिन यात्रियों की संख्या के मुकाबले यह पर्याप्त साबित नहीं हुई। ट्रेनें भी पूरी तरह भरी हुई चल रही हैं और कई रूटों पर वेटिंग लिस्ट लंबी हो गई है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो हड़ताल जारी
प्राइवेट बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण साहू ने स्पष्ट कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सहमति नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा। उनके अनुसार यह हड़ताल सिर्फ बस संचालकों का मुद्दा नहीं बल्कि सरकार के राजस्व से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी बसों से सरकार को टोल टैक्स के रूप में लगभग ₹5 प्रति किलोमीटर आय होती है। बसों के बंद रहने से यह आय पूरी तरह रुक गई है। इसके अलावा डीजल पर मिलने वाला वैट (VAT Revenue) भी सरकार को नहीं मिल पा रहा है।
सरकार से जल्द समाधान की मांग
बस ऑपरेटर्स का कहना है कि सरकार को राजस्व नुकसान को देखते हुए शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालना चाहिए। यदि जल्द समझौता नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है।
बस ऑपरेटर्स की 9 मांगें
- आरटीओ धर्मेंद्र चौधरी और निरीक्षक राजेश चौधरी को एपीओ (APO) किया जाए।
- सीज की गई बसों को तुरंत रिलीज किया जाए।
- परिवहन विभाग द्वारा निलंबित RC-फिटनेस को तुरंत बहाल किया जाए और फिटनेस पर लगी रोक हटाई जाए।
- नियमों के विपरीत बनाए गए चालान निरस्त (Cancel) किए जाएं।
- स्टेज कैरिज बसों की छत पर माल ढुलाई के स्पष्ट नियम लागू हों और बसों पर लगेज कैरियर की अनुमति दी जाए।
- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सभी नए नियम 1 अप्रैल से लागू किए जाएं।
- अन्य राज्यों की तरह टीपी (Temporary Permit) की अवधि 24 घंटे की की जाए।
- अन्य राज्यों से एनओसी लेकर आने वाली पूर्व रजिस्टर्ड बसों को राजस्थान में रजिस्टर किया जाए।
- एआईटीपी (All India Tourist Permit) से चलने वाली बसों के लिए अलग टैक्स स्लैब निर्धारित किया जाए।
