
Rajasthan Panchayat Election Rules : राजस्थान में सरपंच, वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए नामांकन से पहले चुनावी नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। कई ऐसी शर्तें हैं, जिनका पालन नहीं करने पर नामांकन रद्द हो सकता है। वहीं कुछ पुराने नियम अब बदल चुके हैं, जिनको लेकर आज भी लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है।
सबसे ज्यादा चर्चा घर में शौचालय, दो से अधिक बच्चे और शैक्षणिक योग्यता को लेकर होती है। इसके अलावा उम्मीदवार की उम्र, मतदाता सूची में नाम, सरकारी पद, बकाया राशि, दस्तावेज और चुनाव खर्च से जुड़े नियम भी महत्वपूर्ण हैं। आइए जानते हैं राजस्थान में पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए क्या-क्या नियम लागू हैं। सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित ग्राम पंचायत की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित है। यदि सीट किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित है और उम्मीदवार उस श्रेणी में नहीं आता, तो वह वहां से चुनाव नहीं लड़ सकता। इसके साथ ही उम्मीदवार का नाम संबंधित ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में होना जरूरी है। किसी दूसरी जगह का मतदाता संबंधित ग्राम पंचायत से सरपंच का चुनाव नहीं लड़ सकता। उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए। उम्र की गणना नामांकन पत्र की जांच के दिन के आधार पर की जाती है। इसके अलावा उम्मीदवार किसी लाभ वाले सरकारी पद पर नहीं होना चाहिए। वह किसी सहकारी समिति या पंचायती राज संस्था का बकायादार भी नहीं होना चाहिए। दिवालिया घोषित व्यक्ति भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है।
नामांकन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
Rajasthan Sarpanch Eligibility : पंचायत चुनाव का नामांकन दाखिल करने से पहले उम्मीदवार को जरूरी फॉर्म और घोषणा पत्र तैयार रखने चाहिए। सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन फॉर्म-4 भरना होता है। इसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित आवश्यक जानकारियां देनी होती हैं। वहीं पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म-4 A जमा करना होता है। उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी भी देनी होती है। इसके लिए फॉर्म 4-घ भरना पड़ता है। घर में शौचालय होने और परिवार के सदस्यों द्वारा उसके इस्तेमाल की घोषणा के लिए फॉर्म 6-C जमा करना होता है। उम्मीदवार की संपत्ति से जुड़ी जानकारी भी देना जरूरी है। इसमें नकदी, आभूषण, जमीन सहित अन्य संपत्तियों का विवरण शामिल होता है। पंच और सरपंच के लिए यह जानकारी फॉर्म I-B के तहत 50 रुपए के स्टांप पेपर पर देनी होती है। यह नियम वार्ड पंचों पर लागू नहीं है। वहीं पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के लिए फॉर्म I-A के तहत 50 रुपए के स्टांप पेपर पर संपत्ति का विवरण देना होता है। उम्मीदवार को अपनी निजी जानकारी के लिए सांख्यिकी सूचना फॉर्म भी भरना होता है। इसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर जैसी जानकारियों के साथ पासपोर्ट साइज फोटो लगाया जाता है। इसके लिए फॉर्म 6 E जमा करना होता है। यदि सीट SC, ST या OBC वर्ग के लिए आरक्षित है, तो संबंधित उम्मीदवार को जाति प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
घर में शौचालय नहीं है तो नामांकन पर पड़ सकता है असर
Rajasthan Panchayat Election Documents : पंचायत चुनाव में घर में शौचालय से जुड़ा नियम भी बेहद महत्वपूर्ण है। उम्मीदवार के घर में शौचालय होना जरूरी है और परिवार के सभी सदस्यों द्वारा उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। परिवार का कोई सदस्य खुले में शौच नहीं करता हो, इसकी घोषणा भी उम्मीदवार को करनी होती है। इसके लिए फॉर्म 6-C के माध्यम से घोषणा पत्र जमा कराया जाता है। यदि उम्मीदवार घोषणा पत्र में घर में शौचालय होने और सभी सदस्यों द्वारा उसका इस्तेमाल किए जाने की जानकारी देता है, लेकिन बाद में शिकायत होने पर जांच में शौचालय नहीं मिलता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो नामांकन रद्द किया जा सकता है।
नामांकन फॉर्म की फीस नहीं, लेकिन जमानत राशि जमा करनी होगी
Rajasthan Panchayat Election Nomination : पंचायत चुनाव में नामांकन फॉर्म भरने के लिए अलग से कोई फीस नहीं है। हालांकि उम्मीदवार को जमानत राशि यानी प्रतिभूति राशि जमा करनी होती है। सरपंच पद के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को 500 रुपए की जमानत राशि जमा करनी होती है। वहीं महिला, SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह राशि 250 रुपए निर्धारित है।
8वीं फेल ही नहीं, अनपढ़ व्यक्ति भी लड़ सकता है चुनाव
राजस्थान में पंचायत चुनाव की शैक्षणिक योग्यता को लेकर लंबे समय से भ्रम बना हुआ है। मौजूदा नियमों के अनुसार 8वीं फेल या अनपढ़ व्यक्ति भी सरपंच, वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ सकता है। दरअसल, पहले पंचायत चुनाव में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का नियम लागू था। तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2015 के जरिए सामान्य और गैर-अनुसूचित क्षेत्र में सरपंच पद के लिए कम से कम 8वीं पास होना अनिवार्य किया था। वहीं SC, ST और ट्राइबल क्षेत्र यानी TSP एरिया में सरपंच पद के लिए न्यूनतम योग्यता 5वीं पास रखी गई थी।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए भी कम से कम 10वीं पास होने की शर्त लागू थी। हालांकि वर्ष 2019 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने यह शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता समाप्त कर दी। सरकार का तर्क था कि गांवों में लंबे समय से सामाजिक काम करने वाले, अनुभवी और लोकप्रिय लोग केवल डिग्री या शैक्षणिक योग्यता नहीं होने के कारण चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे।
इस बदलाव के बाद अब शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अनपढ़ या 8वीं फेल व्यक्ति को पंचायत चुनाव लड़ने से नहीं रोका जाता।
दो से ज्यादा बच्चे होने पर भी लड़ सकते हैं चुनाव
Rajasthan Panchayat Election Date 2026 : दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने वाला पुराना नियम भी अब लागू नहीं है। यानी उम्मीदवार के दो से ज्यादा बच्चे हैं तो भी वह सरपंच, पंच या अन्य पंचायत पदों के लिए चुनाव लड़ सकता है। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 के तहत 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरी संतान होने पर पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्यता का प्रावधान था। यह नियम करीब तीन दशक तक लागू रहा। हालांकि राजस्थान सरकार ने अब इस प्रावधान को समाप्त कर दिया है। 10 मार्च 2026 को राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा में पारित किया गया। इसके बाद 25 मार्च 2026 को राजपत्र में अधिसूचना जारी हुई। राज्य निर्वाचन आयोग ने 13 जुलाई 2026 को सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया कि अब दो-संतान वाली शर्त लागू नहीं होगी। इसका मतलब है कि दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार भी पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं।
सरपंच चुनाव में एक लाख रुपए तक खर्च की सीमा
पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की भी सीमा तय है। RAS अधिकारी रजत कुमार चौधरी के अनुसार सरपंच पद के उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख रुपए तक चुनावी खर्च कर सकते हैं। पंचायत समिति सदस्य के लिए चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा डेढ़ लाख रुपए है, जबकि जिला परिषद सदस्य चुनाव में उम्मीदवार अधिकतम 3 लाख रुपए तक खर्च कर सकता है।
प्रधान और जिला प्रमुख बनने के लिए पहले सदस्य का चुनाव जीतना होगा
यदि कोई उम्मीदवार पंचायत समिति का प्रधान या जिला परिषद का जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह सीधे इन पदों के लिए चुनाव नहीं लड़ता। इसके लिए पहले पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीतना जरूरी होता है। राजस्थान में पंच-सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया 23 अक्टूबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद 25 नवंबर को नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य अपने-अपने जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे। वहीं 27 नवंबर को पंचायत समिति के नवनिर्वाचित सदस्य अपने-अपने प्रधान का चुनाव करेंगे।
इसलिए पंचायत चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए नामांकन से पहले सीट की आरक्षण स्थिति, मतदाता सूची में नाम, उम्र, जरूरी दस्तावेज, शौचालय से जुड़ी घोषणा और जमानत राशि सहित सभी नियमों की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है। छोटी सी गलती भी नामांकन प्रक्रिया में परेशानी खड़ी कर सकती है।



