
Rajasthan teachers job crisis : राजस्थान के करीब 60 हजार Grade Third शिक्षकों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। Supreme Court के हालिया फैसले के बाद प्रदेश के उन शिक्षकों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिनकी नियुक्ति Teacher Eligibility Test (TET) लागू होने से पहले हुई थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार अब इन शिक्षकों को भी तय समय-सीमा में TET/REET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनकी Service पर संकट खड़ा हो सकता है।
यह फैसला लंबे समय से शिक्षा सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा है। वर्षों से कक्षाओं में पढ़ा रहे शिक्षक अब दोबारा परीक्षा देने की मजबूरी में आ गए हैं। इसी को लेकर प्रदेशभर में शिक्षक संगठनों में रोष है और आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या कहता है?
TET mandatory Supreme Court : सितंबर 2025 में आए Supreme Court के आदेश के अनुसार—
- सभी नए शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य रहेगा
- पहले से सेवारत शिक्षकों को भी नौकरी जारी रखने और Promotion के लिए दो साल के भीतर TET/REET उत्तीर्ण करना होगा
- जिन शिक्षकों की Retirement में पांच साल से कम का समय बचा है, उन्हें इस शर्त से राहत दी गई है
इस आदेश के बाद हजारों शिक्षक असमंजस में हैं कि इतने वर्षों बाद पढ़ाई और परीक्षा देना कितना व्यावहारिक होगा।
15 साल पहले लागू हुआ था TET, फिर अब क्यों अनिवार्यता?
Rajasthan teacher eligibility test news : देशभर में Right to Education Act 2009 लागू होने के बाद 23 अगस्त 2010 से TET को अनिवार्य किया गया था।
इसके बाद—
- वर्ष 2011 में पहली बार CTET आयोजित हुई
- राज्यों ने अपने स्तर पर इसे लागू किया
- राजस्थान में इसे REET (Rajasthan Eligibility Examination for Teachers) के नाम से 2011 में शुरू किया गया
2011 के बाद हुई अधिकतर शिक्षक भर्तियां REET के आधार पर हुईं, लेकिन 2010 से पहले नियुक्त शिक्षक इस प्रक्रिया से बाहर रहे।

प्रदेश के एक चौथाई शिक्षकों पर सीधा असर
Grade 3 teachers Rajasthan : राजस्थान के सरकारी स्कूलों में इस समय—
- Level-1 और Level-2 के करीब 2.30 लाख शिक्षक कार्यरत हैं
- इनमें से लगभग 1.70 लाख शिक्षक REET के जरिए भर्ती हुए
- लेकिन करीब 60 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2010 से पहले हुई थी
अब यदि ये शिक्षक दो साल के भीतर REET/TET पास नहीं कर पाए, तो उनकी नौकरी पर सीधा खतरा मंडरा सकता है। यही वजह है कि इसे प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र का सबसे संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा है।
शिक्षक संगठनों में आक्रोश, आंदोलन की तैयारी तेज
इस फैसले के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि—
- वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को दोबारा परीक्षा में बैठाना अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है
- उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सेवा दबाव के बीच परीक्षा की शर्त अनुचित है
इसी को लेकर देश के 14 बड़े शिक्षक संगठनों ने मिलकर
All India Joint Teachers Struggle Committee का गठन किया है।
5 फरवरी को संसद कूच, कोर्ट में पुनर्विचार याचिका
शिक्षक संगठनों ने ऐलान किया है कि—
- 5 फरवरी 2026 को देशभर के शिक्षक दिल्ली में संसद कूच करेंगे
- बड़े स्तर पर प्रदर्शन और धरना दिया जाएगा
- STF-I सहित अन्य संगठनों ने Supreme Court में Review Petition भी दाखिल की है
संगठनों की मांग है कि सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को खत्म किया जाए या स्थायी छूट दी जाए।
शिक्षकों का कहना—यह फैसला जमीनी हकीकत से दूर
राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के प्रदेश महामंत्री उपेंद्र शर्मा का कहना है—
“जो शिक्षक 15-20 साल से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उनके लिए अब दोबारा पढ़ाई कर TET पास करना व्यावहारिक नहीं है। सरकार और न्यायालय को जमीनी हकीकत समझनी चाहिए। हम शिक्षकों के हित में हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।”



