
Rajsamand Hindu Conference : राजसमंद जिले के सांगठकला गांव में स्थित श्री हरिपायरा भेरूजी मंदिर प्रांगण में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक भव्य विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत रहा। दूर-दूर के गांवों से आए संत-महात्मा, समाजजन, युवाशक्ति और मातृशक्ति की बड़ी उपस्थिति ने आयोजन को एक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत पुष्पमालाओं और अंगवस्त्रों से किया गया। मंच से संबोधित करते हुए संत वक्ताओं ने समाज निर्माण, संस्कार निर्माण तथा राष्ट्र सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार रखे।
Sangathkala Shri Haripayra Bheruji Temple event : सम्मेलन को संबोधित करते हुए महंत ज्ञानानंद ने कहा कि भारत की पावन भूमि केवल एक देश नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहां की परंपराएं और सनातन धर्म शाश्वत एवं सार्वकालिक हैं। उन्होंने बताया कि भारत सदियों से आध्यात्म, विज्ञान, ज्ञान और जीवन-मूल्यों का मार्गदर्शक रहा है, इसलिए आज भी विश्व को दिशा देने की क्षमता इसी संस्कृति में निहित है। उन्होंने आगे कहा कि समाज जब अपने संस्कारों से दूर होता है तो भ्रम और विभाजन पैदा होता है, जबकि सनातन जीवन-शैली व्यक्ति को संतुलन, अनुशासन और करुणा सिखाती है। यदि मानवता को स्थायी शांति चाहिए तो उसे सनातन मूल्यों — सेवा, सहिष्णुता और समरसता — को स्वीकार करना ही होगा।
संगठन से राष्ट्र शक्ति

Mahant Gyananand speech on Sanatan Dharma : कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक महिपाल सिंह ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अनेक आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद हिन्दू समाज ने अपने अस्तित्व और परंपराओं को सुरक्षित रखा। उन्होंने बताया कि समाज को संगठित करने के उद्देश्य से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी, जिसका मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण है।
RSS centenary year Hindu conference Rajasthan : उन्होंने कहा कि जब समाज जागृत और संगठित होगा, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा। उन्होंने मेवाड़ क्षेत्र की देशभक्ति पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यहां के लोगों में राष्ट्रप्रेम स्वभाविक रूप से विद्यमान है। भारत सुरक्षित रहेगा तो समाज सुरक्षित रहेगा और भारत मजबूत बनेगा तो विश्व में कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।

धर्मसभा में लिए गए संकल्प
Panch Parivartan discussion Rajsamand : मंच पर संत मनमोहन पुरी सहित अनेक संत उपस्थित रहे। धर्मसभा के समापन पर उपस्थित लोगों को धर्मानुसार आचरण करने, गौसेवा को जीवन का हिस्सा बनाने और सामाजिक एकता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प दिलाया गया। इसके बाद भारत माता की सामूहिक आरती की गई, जिसमें पूरा परिसर भक्ति और राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंज उठा।
सम्मेलन से पूर्व भव्य शोभायात्रा

सम्मेलन से पहले 501 मंगल कलशों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। लगभग दो किलोमीटर लंबी इस यात्रा में महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश धारण कर भाग लिया। युवाओं ने भगवा ध्वज लहराते हुए जयघोष किए, जिससे पूरा क्षेत्र उत्साह से भर गया। मार्ग में जगह-जगह व्यापारियों और समाजजनों ने पुष्पवर्षा, स्वागत द्वार और आतिशबाजी से शोभायात्रा का अभिनंदन किया। यह दृश्य धार्मिक उत्सव के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन गया।
अनेक गांवों की सहभागिता
इस आयोजन में सांगठ, पुठोल, पिपलांत्री, बड़ी मोरवड़, छोटी मोरवड़, धर्मेटा, दमाला सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। राजसमंद क्षेत्र के लोगों की सहभागिता ने सम्मेलन को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।
