
Rajsamand Lake overflow 2025 : बहुत लंबें अर्से बाद एक वर्ष के अंतराल बाद हमारी राजसमंद झील छलकी है, तो दीपावली का आनंद द्विगुणित हो चला है। इस झील को अगले वर्ष अपने निर्माण के 350 साल पूरे होने जा रहे हैं। रियासती शासन काल के आंकड़े तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन आजादी के बाद 1957 से उपलब्ध सरकारी दस्तावेज यह बताते है कि 1973 की जबरदस्त वर्षा के बाद 1975 में यह झील एक साल के अंतराल बाद छलकी थी। करीब आधी सदी बाद यह अवसर आया है।
Rajsamand Lake tourism Rajasthan : राजसमंद झील का निर्माण सन् 1676 में मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा राजसिंहसिंह ने अकाल से राहत देने के लिए किया था। करीब 3786 घनफीट भराव क्षमता वाली इस झील का मुख्य जलस्रोत गोमती नदी है। झील का मुख्य बंध नौ चौकी के नाम से विख्यात है। यहां सफेद संगमरमर से बनी इस पाल पर बनी छतरियां, तोरण की शिल्पकला अद्भुत है। यहां पर विश्व का सबसे बड़ा पत्थर पर राज प्रशस्ति खण्ड काव्य उत्कीर्ण है। झील में अतिरिक्त जल परावर्तन के लिए 1968 में खारी फीडर का निर्माण किया गया, जो बनास नदी पर बने नंदसमंद से राजसमंद झील में पानी भरती है।

Rajsamand Lake Rajasthan news : अवैज्ञानिक खनन, वनों के विनाश के चलते इस झील की स्थिति सन् 2000 से 2006 तक मरणासन्न हो गई थी। गोमती नदी जलागम क्षेत्र नष्ट हो जाने से 1994 से 2006 तक सूखी पड़ी थी। तब इस क्षेत्र के सामाजिक पर्यावरण कार्यकर्ता दिनेश श्रीमाली की अगुवाई में राजसमंद झील, गोमती नदी संरक्षण अभियान प्रारंभ हुआ। अब तक 13 बड़े जन अभियान में 65 स्थान से अपशिष्ट निस्तारण किया गया। वहीं गोमती नदी प्रवाह क्षेत्र से हजारों टन मार्बल स्लरी निकाल जल प्रवाह सुनिश्चित किया गया। परिणाम स्वरूप 2006 के बाद औसत वर्षा में गोमती नदी में पानी आना प्रारंभ हुआ। करीब 42 वर्ष के लंबे अंतराल बाद यह झील 2017 में ओवरफ्लो हुई। गोमती नदी संरक्षण को लेकर चले जन अभियान के बाद अब औसत वर्षा में नदी में जल प्रवाह हो रहा है। वर्ष 2023 और आज यह झील फिर ओवरफ्लो हुई है, यह सुखद है।
Rajsamand Lake history 350 years : झील में अतिरिक्त जल परावर्तन को बढ़ाने के लिए माही से पानी लाया जा सकता है। वहीं खारी फीडर विस्तार को लेकर 2023 से राज्य सरकार की घोषणा लंबित है। झील में बनास नदी का पानी नंदसमंद से खारी फीडर विस्तार के माध्यम से राजसमंद झील में पहुंचेगा। इसके लिए आवश्यक टेंडर प्रक्रिया और भूमि अवाप्ति का कार्य प्रगति पर है।

Khari feeder expansion project : माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर 2025 खारी फीडर विस्तार का शिलान्यास कर दिया है और 2028 तक यह कार्य सम्पन्न होगा। करीब सवा बत्तीस किमी इस फीडर की जल अपवर्तन क्षमता दोगुनी हो जाएगी। हमें यह समझना होगा कि राजसमंद झील का पानी पेयजल, सिंचाई, उद्योग और पर्यटन का आधार है। सभी स्तरों पर इसके सदुपयोग बहुत जरूरी है।
उम्मीद है मानसून आने वाले तीन वर्ष में माकुल रहेगा। फिर भी अतीत को ध्यान में रखते हुए शासन, समाज की पूर्व तैयारी भी जरूरी है। खारी फीडर विस्तार कार्य के दौरान नंदसमंद से जल अपवर्तन बाधित होगा, इसकी चिंता आम नागरिक, किसान और उद्योग सभी को करनी होगी। बूंद-बूंद का उपयोग, सिंचाई तंत्र की सुरक्षा, मरम्मत, पेयजलापूर्ति में मितव्ययिता और उद्योग को भी पानी बचत तकनीक का उपयोग करना होगा। सबसे अधिक चिंता हमारी सिंचाई तंत्र की लुंज-पुंज व्यवस्था है, जिससे करीब एक तिहाई पानी बर्बाद हो रहा है तो किसानों को भी सिंचाई में सजगता, सतर्कता के मानदंड स्वयं तय करने होंगे।

दिनेश श्रीमाली
समन्वयक, राजसमंद झील गोमती नदी संरक्षण अभियान
मो. 9414176733
