
Rajsamand murder case : राजसमंद जिले के देवगढ़ थाना क्षेत्र में सामने आई एक वारदात ने रिश्तों पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस मौत को पहले सड़क हादसा माना जा रहा था, अब उसी मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि देवीसिंह रावत की मौत कोई एक्सीडेंट नहीं, बल्कि बीमा की रकम हड़पने के लिए रची गई सुनियोजित हत्या थी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि इस साजिश में खुद उसका सगा भाई भी शामिल निकला। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
Devgarh police case : पुलिस के अनुसार, मामला 7 मार्च 2026 का है। उस दिन देवीसिंह के भाई दुधसिंह ने थाने में रिपोर्ट देकर बताया था कि उसका बड़ा भाई बाइक से ननिहाल कुंडेली गया था और लौटते समय सामने से आई दूसरी मोटरसाइकिल की टक्कर से घायल हो गया। गंभीर चोट लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने हादसे का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कहानी बदलती गई। पुलिस ने घटनास्थल का दोबारा बारीकी से निरीक्षण किया, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया और एफएसएल टीम से भी मौका मुआयना कराया। इसी दौरान पता चला कि मृतक देवीसिंह की कुछ माह पहले ही दुर्घटना बीमा पॉलिसियां करवाई गई थीं। यही बिंदु पुलिस के शक की सबसे बड़ी वजह बना।
होली पर घर बुलाकर रची गई साजिश
insurance money murder : जांच में सामने आया कि दुधसिंह और देवीसिंह दोनों गुजरात में काम करते थे। आरोप है कि दुधसिंह ने जमीन की रजिस्ट्री कराने का बहाना बनाकर होली पर देवीसिंह को गुजरात से घर बुलाया। 4 मार्च को जस्साखेड़ा में टीकमसिंह के घर पर दुधसिंह, भगवानसिंह और सुरेंद्रसिंह ने मिलकर उसे मारने की साजिश रची।
पहले शराब पिलाई
brother killed for insurance : पुलिस के मुताबिक 6 मार्च को दुधसिंह ने पैसे लाने का बहाना बनाकर देवीसिंह को भगवानसिंह के साथ मोटरसाइकिल पर भेजा। भगवानसिंह उसे करमाल चौराहा ले गया, जहां उसे शराब पिलाई गई। इसके बाद देवीसिंह का मोबाइल फ्लाइट मोड पर कर दिया गया, ताकि उसकी लोकेशन और संपर्क दोनों बंद हो जाएं।
पत्थर से वार… फिर एक्सीडेंट का नाटक
Rajasthan crime news ; करमाल चौराहे से दोनों कामलीघाट पहुंचे, जहां पहले से टीकमसिंह और सुरेंद्रसिंह भी मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, वहां पुलिया के पास फिर से शराब पी गई। इसके बाद भगवानसिंह और सुरेंद्रसिंह देवीसिंह को उसकी बाइक पर बैठाकर कुंडेली रोड की तरफ ले गए। कच्चे रास्ते में हैंडपंप के पास उसके सिर पर पत्थर से हमला किया गया। जब वह गंभीर रूप से घायल हो गया तो हत्या को हादसा दिखाने के लिए उसे चलती बाइक से धक्का देकर सड़क किनारे पटक दिया गया और मोटरसाइकिल भी पास में गिरा दी गई।
वारदात के बाद आरोपी खेतों के रास्ते हाईवे पुलिया तक पहुंचे और वहां से टीकमसिंह की बाइक पर बैठकर अपने-अपने घर चले गए। अगले दिन दुधसिंह ने थाने पहुंचकर दूसरे वाहन से दुर्घटना की झूठी कहानी गढ़ दी।

तकनीकी जांच ने खोला राज
पुलिस ने जब मोबाइल लोकेशन, घटनास्थल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ा तो पूरा मामला खुलने लगा। जांच में घटना वाले दिन भगवानसिंह की लोकेशन मृतक के साथ करमाल क्षेत्र में मिली। इसके बाद देवीसिंह का मोबाइल बंद होना भी संदेह को और गहरा गया। पुलिस ने चारों संदिग्धों से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की, जिसके बाद आरोपियों ने हत्या की साजिश और वारदात कबूल कर ली।
ये आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में दुधसिंह उर्फ दिनेशसिंह, भगवानसिंह, सुरेंद्रसिंह और टीकमसिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि चारों ने बीमा की रकम हड़पने के लिए मिलकर हत्या की साजिश रची, फिर सबूत मिटाने और वारदात को सड़क हादसा दिखाने का प्रयास किया।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
मामले की जांच उदयपुर रेंज के महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव और राजसमंद एसपी हेमंत कालाल के निर्देशन में की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र पारीक के सुपरविजन और भीम वृत के पुलिस उपाधीक्षक राकेश कुमार वर्मा की निगरानी में देवगढ़ थाना अधिकारी मुकेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने खुलासा किया।
एक सवाल सबसे बड़ा…
इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित किया कि लालच जब रिश्तों पर भारी पड़ता है, तो खून के रिश्ते भी भरोसे के नहीं रह जाते। बीमा की रकम के लिए अपने ही भाई की हत्या कर उसे सड़क हादसा बताने की यह साजिश इलाके में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई है।



