
राजसमंद : Rajsamand Rainfall 2026 : मानसून की विदाई का समय नजदीक आने के साथ ही इस बार जलाशयों के खाली रहने से आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई को लेकर गंभीर स्थिति बनने लगी है। आपदा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार 20 सितंबर तक जिले में औसतन 404 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष हुई 948 मिमी बारिश के मुकाबले लगभग 38.29 प्रतिशत कम है।
10 साल के औसत आंकड़े (786 मिमी) की तुलना में भी इस बार 382 मिमी कम वर्षा हुई है। वर्षा की इस भारी कमी के कारण जिले के 25 में से 20 प्रमुख बांध खाली पड़े है, अन्य बांधों में पानी की आवक न के बराबर रही है, जिससे रबी की फसल और भीषण गर्मी के दौरान पेयजल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। जिले में इस मानसून सीजन के दौरान वर्ष नदियां नहीं बही और झरने उस रफ्तार से नहीं बहे, जिससे बांधों में जलस्तर बढ़ पाता। राजसमंद झील में 30 फीट भराव क्षमता के मुकाबले केवल 19.20 फीट ही शेष है। इसी तरह नंदसमंद बांध में 32 फीट के मुकाबले 14.20 फीट, बाघेरीनाका में 32.80 फीट के स्थान पर 17.30 फीट और चिकलवास में 64 फीट के मुकाबले 52.30 फीट पानी शेष दर्ज है। पिछले वर्ष जहां जिले के 20 प्रमुख बांध पूरी तरह भरकर छलक रहे थे, वहीं इस बार केवल कुंठवा वीयर, भीम टैंक और कुंडली बांध में ही थोड़ी आवक देखने को मिली है। गोरमघाट झरना जरूर करीब 20 दिनों तक पूरे वेग से बहा, लेकिन उसका पानी मारवाड़ क्षेत्र की ओर निकल गया। Rajsamand Dam Water Level

मानसून तहसीलवार इतनी हुई बारिश
Rajsamand Weather News 2026 : तहसील आमेट में 444, भीम में 461, देलवाड़ा में 311, देवगढ़ में 610, गढ़बोर में 380, कुंभलगढ़ में 323, खमनोर में 277, कुंवारिया में 298, नाथद्वारा में 392, रेलमगरा में 544, राजसमंद में 293, सरदारगढ़ में 374, गिलूंड में 543 एमएम बारिश हुई। जलाशयों में कम पानी रहने से रबी की सिंचाई, भूजल रिचार्ज और गर्मी में पेयजल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है। यानी मानसून विदाई के साथ राजसमंद में इस बार सवाल बारिश का नहीं, बचे हुए पानी को अगली गर्मी तक बचाए रखने का है।
25 साल में बारिश का आंकड़ा
| वर्ष | MM |
| 2002 | 301 |
| 2003 | 499 |
| 2004 | 473 |
| 2005 | 776 |
| 2006 | 794 |
| 2007 | 616 |
| 2008 | 444 |
| 2009 | 421 |
| 2010 | 840 |
| 2011 | 759 |
| 2012 | 653 |
| 2013 | 703 |
| 2014 | 577 |
| 2015 | 626 |
| 2016 | 862 |
| 2017 | 782 |
| 2018 | 544 |
| 2019 | 918 |
| 2020 | 699 |
| 2021 | 679 |
| 2022 | 646 |
| 2023 | 923 |
| 2024 | 801 |
| 2025 | 948 |
| 2026 | 404 |
24 वर्षों में तीसरा सबसे कमजोर मानसून
Rajsamand Water Crisis : जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट दर्शाती है कि इस वर्ष का मानसून पिछले 24 वर्षों में तीसरी बार सबसे कमजोर साबित हुआ है। जिले में मानसून की सामान्य प्रवेश तारीख 25 जून के स्थान पर मानसून ने 8 दिन की देरी से 3 जुलाई को दस्तक दी थी, लेकिन पूरे तीन महीनों में केवल 340 मिमी बारिश का ही आंकड़ा छू सका। इससे पहले वर्ष 2002 में 301 मिमी और वर्ष 2009 में 421 मिमी सबसे कम वर्षा दर्ज की गई थी। इस बार तहसीलों की स्थिति देखें तो देवगढ़ में सबसे अधिक 610 मिमी, जबकि खमनोर तहसील में सबसे कम 277 मिमी वर्षा हुई है। मानसून की इस बेरुखी से भूजल स्तर रिचार्ज नहीं हो सका है, जिसके चलते आने वाले दिनों में सीमित पानी को सहेज कर रखना बड़ी चुनौती होगा। Rajsamand Monsoon 2026
