
Ration dealer wheat scam : राज्य सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) को पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए लगातार नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। पोस मशीन (POS Machine), इलेक्ट्रॉनिक कांटा, ऑनलाइन डेटा मॉनिटरिंग और फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए राशन वितरण में गड़बड़ियों पर लगाम लगाने का दावा किया गया। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
प्रदेश में गेहूं वितरण की जिम्मेदारी संभाल रहे कई राशन डीलर इन तकनीकों से भी एक कदम आगे निकल गए। विभागीय जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में डीलरों ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर सैकड़ों क्विंटल गेहूं गायब कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले वर्ष ऐसे 636 राशन डीलरों के यहां 100-100 क्विंटल या उससे अधिक गेहूं की चोरी या भारी गड़बड़ी पकड़ी गई। हालांकि, सरकार ने इन मामलों में कार्रवाई शुरू की, लेकिन अब तक केवल 501 डीलरों के खिलाफ ही ठोस कदम उठाए गए हैं। शेष 135 डीलर ऐसे हैं, जिन पर कार्रवाई अभी तक लंबित है। इससे विभाग की कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
टेक्नोलॉजी के बावजूद कैसे हुई चोरी?
PDS wheat theft Rajasthan : सरकार ने राशन वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए POS Machine अनिवार्य की है। उपभोक्ता को फिंगरप्रिंट देने के बाद ही राशन मिलता है और पूरा डेटा ऑनलाइन सर्वर पर दर्ज होता है। इसके अलावा राशन दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाए गए हैं ताकि वजन में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके। लेकिन विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जब गोदामों से आवंटित गेहूं का रिकॉर्ड और POS मशीन से वितरित गेहूं का डेटा मिलाया गया, तो दोनों में भारी अंतर सामने आया। कई डीलरों के यहां 100 क्विंटल से अधिक का अंतर पाया गया। इसके बाद जब मौके पर राशन दुकानों का निरीक्षण कर स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया, तो रिकॉर्ड में दिखाया गया गेहूं दुकान पर मौजूद ही नहीं मिला। इससे स्पष्ट हुआ कि गेहूं की बड़ी मात्रा को रिकॉर्ड में तो दर्शाया गया, लेकिन वास्तविकता में वह कहीं और खपाया गया।

पूर्वी राजस्थान में सबसे ज्यादा मामले
Ration shop corruption case Rajasthan : पूरे प्रदेश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी राजस्थान के जिलों में सबसे ज्यादा गेहूं चोरी के मामले सामने आए हैं। बारां, दौसा, धौलपुर, करौली, हनुमानगढ़ और फलौदी ऐसे जिले हैं, जहां 25 से अधिक राशन डीलरों के यहां 100-100 क्विंटल से ज्यादा गेहूं की गड़बड़ी पकड़ी गई है। इन जिलों में जांच के दौरान लगातार बड़े अंतर सामने आने से विभाग भी हैरान है। माना जा रहा है कि यहां लंबे समय से संगठित तरीके से यह गड़बड़ी की जा रही थी।
बारां जिला बना ‘हॉटस्पॉट’
POS machine ration fraud : कोटा संभाग के बारां जिले में सबसे ज्यादा 77 राशन डीलर पकड़े गए, जिनके यहां गेहूं की भारी चोरी सामने आई। यह आंकड़ा पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है। वहीं, दूसरे नंबर पर फलौदी जिला है, जहां 54 राशन डीलरों के खिलाफ गेहूं गड़बड़ी के मामले दर्ज किए गए। लेकिन कार्रवाई के मामले में स्थिति कमजोर दिखाई देती है। इन दोनों जिलों में कुल 131 डीलरों के पकड़े जाने के बावजूद केवल 59 दुकानों को सस्पेंड किया गया है, जबकि मात्र 44 डीलरों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। बाकी मामलों में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया अभी अधूरी है।
उपभोक्ताओं पर सीधा असर
Ration dealer license cancel news : इस तरह की चोरी का सीधा नुकसान गरीब और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है, जो हर महीने अपने हक का राशन लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। जब रिकॉर्ड में गेहूं वितरित दिखा दिया जाता है, तो उपभोक्ताओं को या तो कम राशन मिलता है या फिर यह कहकर टाल दिया जाता है कि स्टॉक समाप्त हो गया है। ऐसे में PDS प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
विभागीय निगरानी पर सवाल
हालांकि विभाग का दावा है कि नियमित ऑडिट और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए गड़बड़ियों को पकड़ा जा रहा है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर चोरी सामने आना यह दर्शाता है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं गंभीर खामी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टेक्नोलॉजी लगाने से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि उसकी सख्त मॉनिटरिंग, नियमित फिजिकल वेरिफिकेशन (Physical Verification) और समय पर कार्रवाई भी जरूरी है।
कार्रवाई में देरी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब 636 डीलरों के खिलाफ गड़बड़ी स्पष्ट रूप से सामने आ चुकी है, तो 135 डीलरों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जांच लंबित है या प्रशासनिक स्तर पर कोई ढिलाई बरती जा रही है? इस देरी से अन्य डीलरों को भी गलत संदेश जाने की आशंका बनी रहती है।
