
Real Estate News : घर, फ्लैट या प्लॉट खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा और अहम फैसला होता है। अक्सर लोग अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर प्रॉपर्टी खरीदते हैं, लेकिन जानकारी की कमी या जल्दबाजी में की गई छोटी-सी गलती उन्हें बड़े कानूनी और आर्थिक संकट में डाल सकती है। बहुत से लोगों को यह गलतफहमी होती है कि प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होते ही वे उसके मालिक बन जाते हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है।
सुप्रीम कोर्ट ने महनूर फातिमा इमरान बनाम स्टेट ऑफ तेलंगाना मामले में यह साफ कर दिया है कि केवल रजिस्ट्री होना ही मालिकाना हक की गारंटी नहीं है। अगर प्रॉपर्टी से जुड़े जरूरी दस्तावेज सही नहीं हैं, तो रजिस्ट्री होने के बावजूद भी आपका हक विवादों में पड़ सकता है।
रजिस्ट्री क्यों नहीं देती मालिकाना हक की पूरी गारंटी?
Property ownership documents : रजिस्ट्री केवल यह साबित करती है कि दो पक्षों के बीच एक लेन-देन हुआ है। यह इस बात की पुष्टि नहीं करती कि:
- बेचने वाले के पास प्रॉपर्टी बेचने का कानूनी अधिकार था या नहीं
- प्रॉपर्टी का टाइटल साफ था या नहीं
अगर प्रॉपर्टी की पहली बिक्री ही अवैध या बिना रजिस्ट्री के हुई हो, तो उसके बाद होने वाली सभी रजिस्टर्ड डील्स भी कानूनी रूप से कमजोर मानी जा सकती हैं। ऐसे में भविष्य में कोर्ट-कचहरी के चक्कर लग सकते हैं।

प्रॉपर्टी खरीदते समय जरूर चेक करें ये जरूरी डॉक्यूमेंट्स
1. चेन डीड (Chain Deed)
Supreme Court property ownership ruling : चेन डीड प्रॉपर्टी का पूरा इतिहास बताती है। इसमें यह जानकारी मिलती है कि:
- प्रॉपर्टी पहले किस-किस के पास थी
- हर ट्रांसफर कानूनी तरीके से हुआ या नहीं
चेन डीड में किसी भी तरह की कड़ी टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। इसे नगर निकाय या रजिस्ट्रार ऑफिस से चेक किया जा सकता है।
2. टाइटल डीड (Title Deed)
टाइटल डीड यह साबित करती है कि बेचने वाला व्यक्ति उस प्रॉपर्टी का वास्तविक और कानूनी मालिक है।
अगर बेचने वाले के पास स्पष्ट टाइटल नहीं है, तो वह प्रॉपर्टी बेचने का हकदार नहीं होता। ऐसी स्थिति में प्रॉपर्टी विवादित हो सकती है।
3. भार-मुक्त सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate – EC)
यह सर्टिफिकेट बताता है कि प्रॉपर्टी पर:
- कोई पुराना लोन
- बैंक का चार्ज
- या कोई कानूनी विवाद तो नहीं है
EC न होने की स्थिति में आपको भविष्य में बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
4. ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC)
Property ownership documents for sale : फ्लैट या अपार्टमेंट खरीदते समय ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट बेहद जरूरी होता है।
यह दर्शाता है कि:
- बिल्डिंग स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनी है
- रहने के लिए सुरक्षित और कानूनी है
OC के बिना बिल्डिंग में रहना अवैध माना जा सकता है।
5. मंजूर किया गया नक्शा
Real estate legal tips India : यह जरूर जांचें कि निर्माण:
- नगर निगम
- विकास प्राधिकरण
- या संबंधित अथॉरिटी द्वारा पास किए गए नक्शे के अनुसार हुआ है या नहीं
अनधिकृत निर्माण भविष्य में तोड़ा भी जा सकता है।
6. प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें
खरीद से पहले यह सुनिश्चित करें कि:
- पुराने मालिक ने सभी प्रॉपर्टी टैक्स चुका दिए हैं
- कोई बकाया टैक्स नहीं है
अगर टैक्स बकाया हुआ तो उसकी जिम्मेदारी नए मालिक पर आ सकती है।
Proof of Ownership Documents for Business (बिज़नेस के स्वामित्व के प्रमाण)
किसी भी व्यवसाय (Business) में Ownership Proof यानी स्वामित्व के दस्तावेज बहुत जरूरी होते हैं। इनकी जरूरत बैंक लोन, GST रजिस्ट्रेशन, MSME/Udyam, निवेश, कानूनी विवाद, टैक्स फाइलिंग और सरकारी योजनाओं में पड़ती है। बिज़नेस का प्रकार बदलने पर स्वामित्व के दस्तावेज भी बदल जाते हैं।
नीचे अलग-अलग बिज़नेस स्ट्रक्चर के अनुसार Ownership Proof Documents दिए गए हैं:
1. Sole Proprietorship (एकल स्वामित्व)
यह सबसे सरल बिज़नेस मॉडल होता है, जिसमें मालिक और बिज़नेस एक ही व्यक्ति होता है।
स्वामित्व के प्रमाण दस्तावेज:
- GST Registration Certificate
- Shop & Establishment Registration
- Trade License (नगर निगम/पंचायत से)
- Udyam (MSME) Registration
- Current Account Statement (बिज़नेस नाम से)
- Rent Agreement / Ownership Proof of Business Premises
- Utility Bill (बिज़नेस एड्रेस पर)
👉 नोट: Sole Proprietorship के लिए अलग से “Ownership Deed” नहीं होती।
2. Partnership Firm (साझेदारी फर्म)
जब दो या अधिक लोग मिलकर बिज़नेस करते हैं।
Ownership Proof Documents:
- Partnership Deed (नोटराइज़्ड या रजिस्टर्ड)
- Firm Registration Certificate (अगर रजिस्टर्ड है)
- PAN Card of Firm
- GST Registration
- Bank Account Proof
- Address Proof of Business Place
3. Limited Liability Partnership (LLP)
LLP में पार्टनर्स की जिम्मेदारी सीमित होती है।
Ownership Proof Documents:
- Certificate of Incorporation (MCA द्वारा जारी)
- LLP Agreement
- PAN Card of LLP
- GST Registration
- List of Designated Partners
4. Private Limited Company / Public Limited Company
कंपनी एक अलग कानूनी इकाई होती है।
Ownership Proof Documents:
- Certificate of Incorporation (ROC)
- Memorandum of Association (MOA)
- Articles of Association (AOA)
- Shareholding Pattern / Share Certificates
- Company PAN Card
- Board Resolution (अधिकृत व्यक्ति के लिए)
- GST Registration
👉 Ownership यहाँ शेयरहोल्डिंग के आधार पर तय होती है।
5. One Person Company (OPC)
एक व्यक्ति द्वारा चलाई जाने वाली कंपनी।
Ownership Proof Documents:
- Certificate of Incorporation
- MOA & AOA
- PAN Card of Company
- Nominee Details
- GST Registration
6. Trust / Society / NGO
गैर-लाभकारी संस्थाएं।
Ownership Proof Documents:
- Trust Deed / Society Registration Certificate
- Registration under relevant Act
- PAN Card of Trust/Society
- Governing Body Resolution
7. Business Property Ownership Proof (यदि प्रॉपर्टी खुद की है)
अगर बिज़नेस अपनी खुद की संपत्ति में चल रहा है:
- Sale Deed / Conveyance Deed
- Title Deed
- Property Tax Receipt
- Electricity/Water Bill
Ownership Proof की जरूरत कब पड़ती है?
- Business Loan / MSME Loan
- GST या अन्य रजिस्ट्रेशन
- Bank Account Opening
- Government Tenders
- Investor Funding
- Legal Disputes
