
Rupee Vs Dollar : भारतीय रुपया एक बार फिर अमेरिकी डॉलर के सामने ताकतवर साबित हुआ है। लगातार दूसरे दिन रुपये ने डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई, जिससे घरेलू और वैश्विक निवेशकों का ध्यान इस ओर गया है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 23 पैसे की उछाल के साथ 85.49 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इस तेजी का मुख्य कारण घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुझान और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का भारी निवेश रहा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर के सूचकांक में मामूली मजबूती ने रुपये की तेज रफ्तार को कुछ हद तक रोका। रुपया और डॉलर में उतार चढ़ाव में रुपया भारी पड़ा।
Rupee Strength : घरेलू शेयर बाजारों ने भी रुपये की इस मजबूती में अहम भूमिका निभाई। सेंसेक्स ने शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 229.22 अंकों की बढ़त हासिल की और 83,985.09 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी भी 73.5 अंकों की उछाल के साथ 25,622.50 अंकों पर कारोबार करता दिखा। इस सकारात्मक माहौल ने रुपये को और बल प्रदान किया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को एफआईआई ने 12,594.38 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की, जिसने बाजार में उत्साह का माहौल बनाया।
रुपए की चाल और डॉलर की स्थिति
Dollar Weakness : अंतर बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को रुपए 85.50 प्रति डॉलर पर खुला और जल्द ही 85.49 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव 85.72 से 19 पैसे की बढ़त को दर्शाता है। गुरुवार को भी रुपया मजबूत हुआ था, लेकिन बुधवार को यह तीन पैसे की मामूली गिरावट के साथ 86.08 पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97.24 पर रहा। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने बताया कि कमजोर डॉलर सूचकांक और आईपीओ के जरिए बढ़ते विदेशी निवेश ने रुपये और शेयर बाजार को मजबूती दी है।
वैश्विक कारक और तेल की कीमतें
Sensex Rally : वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये की तेजी को कुछ हद तक प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 68.05 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसके अलावा, अमेरिका में ब्याज दरों में अपेक्षित कटौती की अटकलों ने डॉलर सूचकांक को तीन साल के निचले स्तर पर ला दिया, जिसका फायदा भारतीय रुपये को मिला।

रुपए का भविष्य और निवेशकों का भरोसा
Nifty Surge : विदेशी मुद्रा कारोबारियों का मानना है कि रुपये की यह मजबूती घरेलू शेयर बाजारों के सकारात्मक प्रदर्शन और एफआईआई के भारी निवेश के कारण और बढ़ सकती है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रुपये की चाल पर असर डाल सकते हैं। फिर भी, भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश और शेयर बाजार की मजबूती ने रुपये को एक ठोस आधार प्रदान किया है।
