
Sanwariya Seth Khajana : मेवाड़ के पवित्र श्री सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था एक बार फिर सुर्खियों में है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित इस प्रसिद्ध कृष्ण धाम में हर महीने की तरह इस बार भी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, 26 अप्रैल 2025 को दानपात्र खोला गया। तब से चरणबद्ध तरीके से दान राशि की गिनती जारी है, और अब तक तीन चरणों में 17 करोड़ 50 लाख रुपये की नकद राशि सामने आई है। तीसरे चरण में 3 करोड़ 76 लाख 30 हजार रुपये की गिनती हुई। इसके अलावा, सोने-चांदी के आभूषण, विदेशी मुद्रा, और ड्राफ्ट भी प्राप्त हुए हैं, जिनका मूल्यांकन बाकी है। मंदिर समिति का अनुमान है कि इस बार कुल दान 20 करोड़ रुपये को पार कर सकता है।
Sanwaliya Seth Temple : श्री सांवलिया सेठ मंदिर का दानपात्र एक बार फिर भक्तों की उदारता और आस्था का प्रतीक बन गया है। 17.50 करोड़ रुपये की गिनती और सोने-चांदी के मूल्यांकन के साथ यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी चर्चा में है। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर, जब सोने-चांदी की खरीदारी शुभ मानी जाती है, यह खबर भक्तों के लिए और खास हो जाती है। मंदिर की वेबसाइट या स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर आप भी इस पवित्र स्थान के बारे में अधिक जान सकते हैं।
भक्तों की आस्था का खजाना
Temple treasure : श्री सांवलिया सेठ मंदिर, जिसे मेवाड़ का तीर्थ स्थल माना जाता है, भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। यह मंदिर भगवान कृष्ण के सांवले स्वरूप को समर्पित है और देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। हर महीने अमावस्या से एक दिन पहले दानपात्र खोला जाता है, और इस बार 26 अप्रैल को शुरू हुई गिनती ने सभी को हैरान कर दिया। पहले चरण में ही 10 करोड़ रुपये की राशि सामने आई, जो मंदिर की लोकप्रियता और भक्तों की उदारता का प्रतीक है।

चरणबद्ध गिनती और पारदर्शिता
Krishna Dham Donation : दान राशि की गिनती मंदिर समिति और प्रशासनिक अधिकारियों की सख्त निगरानी में हो रही है। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की नजर में और बैंक प्रतिनिधियों, मंदिर कर्मचारियों, और पुलिस की मौजूदगी में की जा रही है। यह सुनिश्चित करता है कि गिनती में पारदर्शिता बनी रहे।
- पहला चरण: 26 अप्रैल को दानपात्र खोलने के बाद पहले चरण में 10 करोड़ रुपये की नकद राशि प्राप्त हुई। यह राशि मंदिर के इतिहास में सबसे बड़ी एकल-चरण गिनती में से एक थी।
- दूसरा चरण: रविवार को अमावस्या के कारण गिनती रुकी, लेकिन सोमवार को दूसरे चरण में 3 करोड़ 73 लाख 70 हजार रुपये सामने आए।
- तीसरा चरण: मंगलवार को राजभोग आरती के बाद तीसरे चरण की गिनती शुरू हुई, जिसमें 3 करोड़ 76 लाख 30 हजार रुपये प्राप्त हुए।

सोने-चांदी और विदेशी मुद्रा की चमक
Chittorgarh Temple : नकद राशि के अलावा, दानपात्र से सोने-चांदी के आभूषण, विदेशी मुद्रा, और ड्राफ्ट भी प्राप्त हुए हैं। इनका मूल्यांकन और गिनती अंतिम चरण में होगी। मंदिर समिति के अनुसार, सोने-चांदी की मात्रा भी इस बार रिकॉर्ड स्तर पर हो सकती है। पिछले रिकॉर्ड्स में मंदिर को एक बार में 1 किलो से अधिक सोना और 89 किलो चांदी प्राप्त हो चुकी है। विदेशी मुद्रा में 12 देशों की करेंसी शामिल होने की बात भी सामने आई है, जो मंदिर की वैश्विक पहुंच को दर्शाती है।
अंतिम चरण की उम्मीदें
Temple Donation Record : तीन चरणों में अब तक 17 करोड़ 50 लाख रुपये की गिनती हो चुकी है, लेकिन मंदिर समिति का मानना है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा। बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को शेष राशि, सिक्कों, और सोने-चांदी की गिनती होगी। मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी नंदकिशोर के अनुसार, कुल दान राशि 20 करोड़ रुपये को पार कर सकती है, जो एक नया रिकॉर्ड हो सकता है।
मंदिर की आध्यात्मिक और सामाजिक भूमिका
Lord Krishna Temple : श्री सांवलिया सेठ मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक कल्याण में भी योगदान देता है। दान राशि का उपयोग मंदिर के रखरखाव, भक्तों के लिए सुविधाओं, और परोपकारी कार्यों जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में किया जाता है। यह मंदिर वैष्णव भक्तों के लिए नाथद्वारा के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है।
450 साल पुराना कृष्ण धाम, मंदिर का अनोखा इतिहास
चित्तौड़गढ़ के मंडफिया में स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर (Sanwaliya Seth Temple) राजस्थान का एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां भगवान कृष्ण के सांवले स्वरूप की महिमा गूंजती है। करीब 450 साल पुराना यह मंदिर मेवाड़ राजपरिवार द्वारा निर्मित है और कृष्ण धाम (Krishna Dham) के रूप में विख्यात है। मंदिर की खासियत न केवल इसकी ऐतिहासिकता और आध्यात्मिकता है, बल्कि भक्तों की अटूट आस्था भी है, जो इसे हर साल एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का केंद्र बनाती है। मान्यता है कि सांवलिया सेठ, संत कवयित्री मीरा बाई के गिरधर गोपाल हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। मीरा बाई की भक्ति से जुड़ा यह मंदिर आज भी लाखों भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। चाहे वह मासिक भंडारा हो, विदेशी मुद्राओं का दान, या सामाजिक विकास कार्य, सांवलिया सेठ की महिमा हर रूप में चमकती है। यदि आप इस पवित्र स्थल के दर्शन करना चाहते हैं, तो मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क जानकारी प्राप्त करें और अपनी यात्रा की योजना बनाएं। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
मंदिर का इतिहास और मीरा बाई से संबंध
श्री सांवलिया सेठ मंदिर (Sanwaliya Seth Temple History) का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा है, जब मेवाड़ राजपरिवार ने इसका निर्माण करवाया। मंदिर में स्थापित सांवलिया सेठ की मूर्ति को भगवान कृष्ण का सांवला स्वरूप माना जाता है। किवदंतियों के अनुसार, यह वही मूर्ति है, जिसकी मीरा बाई भक्ति और प्रेम में डूबकर पूजा करती थीं। मीरा बाई संतों और भक्तों की टोली के साथ भ्रमण करती थीं, और ऐसी ही एक टोली में दयाराम नामक संत के पास यह मूर्ति थी। यह मूर्ति बाद में मंडफिया में स्थापित की गई, और तब से यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक बन गया। मंडफिया में स्थित यह मंदिर चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से 41 किमी और उदयपुर के डबोक एयरपोर्ट से 65 किमी की दूरी पर है। इसकी सुगम पहुंच के कारण देश-विदेश से श्रद्धालु आसानी से यहां पहुंचते हैं। हर साल करीब एक करोड़ लोग (Sanwaliya Seth Temple Visitors) मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं, और मासिक आधार पर 8.5 से 9 लाख श्रद्धालु यहां भगवान के दर्शन करते हैं।
भक्तों की अनूठी श्रद्धा: सांवलिया सेठ का हिस्सा
सांवलिया सेठ के प्रति भक्तों की आस्था अनोखी है। मान्यता है कि जितना अधिक भक्त यहां दान करते हैं, सांवलिया सेठ उनके खजाने को उतना ही ज्यादा भरते हैं। इस विश्वास के चलते कई भक्त अपनी आय का 2 से 20% हिस्सा सांवलिया सेठ को समर्पित करते हैं। यह हिस्सा खेती, व्यापार, और नौकरी की तनख्वाह से लिया जाता है। भक्त हर महीने मंदिर पहुंचकर इस राशि को दानपात्र में चढ़ाते हैं। विदेशी भक्तों का योगदान (Sanwaliya Seth NRI Devotees) भी कम नहीं है। कई एनआरआई भक्त विदेशों में अर्जित आय का हिस्सा मंदिर को समर्पित करते हैं। इसके चलते मंदिर के दानपात्र में भारतीय रुपये के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, सऊदी रियाल, कुवैती दिनार, और नाइजीरियाई नायरा जैसी विदेशी मुद्राएं भी प्राप्त होती हैं।

दानपात्र और मासिक भंडारा
सांवलिया सेठ मंदिर का भंडारा (Sanwaliya Seth Donation) हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को खोला जाता है। इसके बाद अमावस्या पर भव्य मेला लगता है। विशेष अवसरों जैसे दीपावली पर भंडारा दो महीने और होली पर डेढ़ महीने में खोला जाता है। हाल ही में 26 अप्रैल 2025 को खोले गए दानपात्र से अब तक 17.50 करोड़ रुपये की गिनती हो चुकी है, और सोने-चांदी का मूल्यांकन बाकी है।
सामाजिक योगदान और विकास कार्य
मंदिर में दान की राशि न केवल धार्मिक कार्यों, बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए भी उपयोग की जाती है। मंदिर ट्रस्ट हर महीने 30 से 70 लाख रुपये की रसीद के माध्यम से दान प्राप्त करता है। यह राशि शिक्षा, चिकित्सा, धार्मिक आयोजनों, और मूलभूत सुविधाओं के विकास में खर्च की जाती है। मंडफिया और आसपास के 16 गांवों का विकास (Sanwaliya Seth Temple Development) भी इसी राशि से हो रहा है। ट्रस्ट ने स्कूल, अस्पताल, और सामुदायिक सुविधाओं को बढ़ावा देकर क्षेत्र को समृद्ध बनाया है।
