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Lalitprabh Maharaj pravachan : प्रतिकूलता में भी मुस्कुराओ — राष्ट्रसंत का ऐसा मंत्र, बदल जाएगी जिंदगी!

Parmeshwar Singh Chundwat February 26, 2026 1 minute read

Lalitprabh Maharaj pravachan : राष्ट्र-संत ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि मरने के बाद हमें स्वर्ग मिलेगा कि नरक इसका तो पता नहीं, पर जो हर समय व्यस्त और हर हाल में मस्त रहना सीख जाते हैं, उनके लिए यही संसार बैकुंठ धाम बन जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन परिवर्तन का नाम है। यहाँ कुछ भी स्थाई नहीं है, सब बदलने वाला है। जो इस हकीकत से रूबरू हो जाता है, वह सुख के साथ दुख का, नफे के साथ नुकसान का और संयोग के साथ वियोग का भी मजा लेना सीख जाता है।

राष्ट्र-संत बुधवार को संबोधि सेवा परिषद द्वारा द्वारकेश चौराहा स्थित होटल केशव इन में आयोजित विराट प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सुख दुख तो जीवन के दो पहलू हैं। दुख और तकलीफ यह तो पार्ट ऑफ लाइफ है जबकि उनसे सामना करना उनसे पार पाना और उसमें भी खुश रहना आर्ट ऑफ लाइफ है। उन्होंने कहा कि जीवन में तनाव को जगह नहीं दें, हमेशा मुस्कुराते रहें। मुस्कान से कोई नुकसान नहीं होता मुस्कान अनमोल है। सुखी जीवन के लिए जरूरी है कि किसी भी परिस्थिति में कभी मुंह से आह निकले हर परिस्थिति में सिर्फ वाह वाह ही निकलें। व्यक्ति के मरने के बाद हर व्यक्ति उसके चित्र पर स्वर्गीय लिखता है। कोई भी नरकीय नहीं लिखता है। इस हिसाब से तो नर्क पूरा ही खाली है। फोटो के नीचे स्वर्गीय लिखने से कोई स्वर्ग में नहीं जाता है अगर जीने की कला आ जाए यही जीवन स्वर्ग बन जाता है। Rashtriya Sant Lalitprabh Rajsamand news

हर हाल में आनंद, हर पल आनंद

राष्ट्र-संत ने कहा कि सदाबहार खुश रहने का कीमिया मंत्र है हर हाल में मुस्कुराइए, अनुकूलता में हर कोई मुस्कुरा लेता है, पर जो प्रतिकूलता में भी मुस्कुराना सीख जाता है, वह धरती का सबसे सुखी इंसान बन जाता है। चाहे चित गिरे या पुट, चाहे लाभ हो या घाटा, चाहे कोई मान दे या अपमान, चाहे कोई कहना माने या ना माने, बेटा-बहू पूछकर काम करे चाहे बिना पूछे, पर हमारा तो एक ही सिद्धांत हो : हर हाल में आनंद, हर पल आनंद। उत्सव हमारी जाति बन जाए और आनंद हमारा गोत्र। आज का सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग। हम भीतर की शांति और आनंद के बारे में कम सोचते हैं, दुनियावालों की ज्यादा चिंता करते हैं। लोगों का तो नियम है टीका-टिप्पणी करना। यहाँ सहयोग करने वाले कम हैं, टक्कर देने वाले ज्यादा हैं। आगे बढ़ने की शुभकामनाएँ देने वाले कम हैं और नीचे गिराने वाले ज्यादा। इसलिए जब तक जिए गुलाब के फूल बनकर जिए। Rajsamand satsang latest news

जीवन का सिद्धांत

Jain sant pravachan today : राष्ट्र-संत ने जीवन को स्वर्ग बनाने का दूसरा मंत्र देते हुए कहा कि जो गया उसका रोना रोने की बजाय जो है उसका आनंद लेना सीख जाएं। जिंदगी जीने के दो तरीके हैं- या तो जो खोया है, उसका रोना राओ, या जो बचा है उसका आनंद मनाओ। तय आपको करना है, आप कैसी जिंदगी जीएंगे। जीवन का यह सिद्धांत बना लें कि जो मेरा है वो जाएगा नहीं और जो चला गया वो मेरा था ही नहीं। इस मंत्र को लेकर जो जीवन जीता है, वह जिंदगी में कभी दुखी नहीं होता। सुख आए तो हंस लो, और दुख आए तो हंसी में टाल दो- यही जीवन का मूलमंत्र है। Jeevan jeene ki kala discourse

उन्होंने कहा कि अक्सर आदमी के पास जो है, उसका वह आनंद नहीं उठाता और जो नहीं है, उसका रोना रोकर दुखी होता रहता है। आज से अपने जीवन को यह पॉजीटिव मंत्र बना लें कि मैं आज से आह.. आह.. नहीं वाह… वाह…करुंगा। जीवन का तीसरा मंत्र यह बना लें- मैं हमेशा प्रकृति के विधान में विश्वास करुंगा। जीवन के हर पल-हर क्षण को मैं बहुत प्रसन्नता, आनंद से जीऊंगा। जो व्यक्ति जीवन में घटने वाली हर घटना को प्रेम से स्वीकार करता है, उसका जीवन आनंद से भर उठता है। जिंदगी को हम भुनभुनाते हुए नहीं गुनगुनाते हुए जीएं। अपने जीवन का पहला मूलमंत्र इसे बना लें कि मैं यह उन्होंने कहा कि आज संकल्प लीजिए कि जीवन आह… आह… करके नहीं वाह… वाह… कहते जीऊंगा। जब भी हम वाह… कहते हैं तो यही जिंदगी हमारे लिए स्वर्ग बन जाती है और जब हम आह.. . कहते हैं तो जिंदगी नर्क-सी हो जाती है। अगर हमारे लिए थाली में भोजन आया है तो शुक्रिया अदा करो देने वाले भगवान का, अन्न उपजाने वाले किसान का और घर की भागवान का। जरा कल्पना करें आज से 50 साल पहले लोगों के पास आज जैसा भौतिक सुख भले कम था पर सुकून बहुत था। उस वक्त जब सुकून बहुत था, तो आदमी बड़े चैन से सोता था। आज सुख है तो भी लोग पूरी रात चैन से सो नहीं पाते। आज आदमी की जिंदगी कैसी गजब की हो चुकी है, बेडरूम में एसी और दिमाग में हीटर।

उन्होंने कहा कि पत्थर में ही प्रतिमा छिपी होती है, जरूरत केवल उसे हमें तराशने की है। लगन, उमंग, उत्साह हो तो मिट्टी से मंगल कलश, बांस से बांसुरी बन जाती है। यह हमारी जिंदगी परम पिता परमेश्वर का दिया प्रसाद है, हम भी इसका सुंदर निर्माण कर सकते हैं।
जीवन के हर क्षण, हर पल को हमें आनंद-उत्साह से भर देना चाहिए, अगर प्रेम, आनंद-उल्लास, माधुर्य से जीना आ जाए तो आदमी मर कर नहीं जीते-जी स्वर्ग को पा सकता है।

प्रेम की महिमा अनंत

इससे पूर्व डॉ मुनि सागर महाराज ने कहा कि आज घर में यश और दौलत से भी ज्यादा प्रेम की जरूरत है। अगर घर में प्रेम का अभाव और तकरार है तो आपके लाख रोकने पर भी लक्ष्मी घर से चली जाएगी, पर अगर घर में प्रेम और रिश्तों में मिठास है तो आपके घर से गई लक्ष्मी भी वापस लौट आएगी। उन्होंने कहा कि जिओ और जीने दो : प्रेम का ही विस्तार है। प्रेम इंसानियत का यह पाठ पढ़ाता है कि आप खुद भी प्रेमपूर्वक जिओ और सबको भी प्रेम से जीने का अधिकार दो। किसी का जीवन छीनने का पाप कभी मत करो। उन्होंने कहा कि नफरत और दूरियों की बातें करने वाले लोग आतंक को बढ़ावा देते हैं, वहीं प्रेम का पैगाम देने वाले लोग अहिंसा और विश्व-शांति को जीवित करते हैं। प्रेम की महिमा अनंत है। इसी प्रेम के वश होकर राम ने शबरी के बेर खाए थे। कृष्ण ने विदुराइन के केले की छिलके ग्रहण किए थे और महावीर ने चंदनबाला के उड़द के बाकुले स्वीकार किये थे। उन्होंने कहा कि प्रेम के अनेक रूप हैं। माता-पिता का प्रेम वात्सल्य है, पति-पत्नी का प्रेम प्यार है, वहीं जीव-जन्तुओं के प्रति प्रेम हमारी करुणा है। श्रवणकुमार अपने माता-पिता को कावड़ में बिठाकर तीर्थ-यात्रा करवाए, कबूतर को बचाने के लिए मेघरथ अपनी जंघा का मांस काटकर दे या पशुओं को बचाने के लिए अरिष्टनेमि अपने विवाह का त्याग करे – ये सब प्रेम के ही दिव्य रूप हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम हर रिश्ते की आत्मा है। ऐसा कोई काम मत कीजिए जो हमारे रिश्तों में कांटा बोने का काम करे। रहीम की इस सीख को सदा याद रखिए -रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय, तोड़े से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाय।

उन्होंने कहा कि प्रेम ही हमारी प्रार्थना हो, प्रेम ही हमारा पंथ हो, जिसके जीवन में प्रेम भरा हो वही हमारा संत हो, वही हमारा ग्रन्थ हो, प्रेम ही हमारे जीवन का मंत्र हो। प्रेम को जीने के लिए बच्चों का लाड करें, बराबर वालों के साथ सहकारिता निभाएँ, बड़ों की सेवा का खयाल रखें, गरीब-गुरबों की मदद करें, जीव-जन्तु और पेड़ों को संरक्षण दें – प्रेम-धर्म की हमें यही प्रेरणा है। इंसानों से प्यार कीजिए और चीजों का इस्तेमाल। बात तब बिगड़ती है जब हम इंसानों का इस्तेमाल करने लगते हैं और चीजों से प्यार।

‘नई सोच, नई उड़ान’ पुस्तक वितरित

इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को श्याम सुंदर भूपेंद्र, नवीन चौरडिया परिवार द्वारा चंद्रप्रभ महाराज द्वारा रचित पुस्तक ‘नई सोच, नई उड़ान’ उपहार स्वरूप वितरित की गई। मंच संचालन डॉ वीरेंद्र महात्मा ने किया और संबोधि सेवा परिषद के अध्यक्ष सुनील पगारिया और कमलेश कच्छारा ने सभी आगंतुकों का आभार प्रकट किया। मीडिया प्रभारी जितेंद्र लड्ढा ने बताया कि दोनों राष्ट्रसंत केलवा, पड़ासली, चारभुजा, देसूरी घाट, पाली होते हुए 8 मार्च को जोधपुर संबोधि धाम पहुंचेंगे, जहां प्रवेश समारोह में शामिल होने के लिए अनेक श्रद्धालु राजसमंद से जाएंगे।

Food Security Scheme Rajasthan : ई-केवाइसी के बाद बड़ा खुलासा, सस्ता राशन अब नहीं मिलेगा

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Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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