
RSS Centenary Year 2025 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी वर्ष यात्रा को समर्पित ‘सुंदर स्मृति व्याख्यानमाला’ का प्रथम आयोजन रविवार को राजसमंद के जिला परिषद सभागार में भावपूर्ण और प्रेरणादायी माहौल में सम्पन्न हुआ। यह व्याख्यानमाला ध्येयनिष्ठ स्वयंसेवक स्व. सुंदर लाल पालीवाल की स्मृति में आयोजित की गई, जिन्होंने स्त्री सम्मान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया और आजीवन संघ के कार्यों में समर्पित रहे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता, धर्म जागरण समन्वय के अखिल भारतीय विधि प्रमुख राम प्रसाद ने समाज को जागृत और जीवंत बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में स्व. सुंदर लाल के परिवार, संघ के प्रचारक, और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
राम प्रसाद ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। यह यात्रा संघर्ष, त्याग, और समर्पण से भरी हुई है। उन्होंने कहा, “संघ को आज की स्थिति तक पहुँचाने में असंख्य स्वयंसेवकों ने कठिन परिस्थितियों में अपने जीवन को समर्पित किया। उनका यह बलिदान समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।” उन्होंने स्व. सुंदर लाल पालीवाल की निष्ठा और साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी विशेषता थी कि वे अन्याय और असत्य के खिलाफ तुरंत प्रतिक्रिया देते थे। “एक जीवंत समाज वही है जो अन्याय का विरोध करे। जब समाज मौन हो जाता है, वह मृतप्राय हो जाता है। भारत का इतिहास इसका साक्षी है—चाहे गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर का विध्वंस हो या हाल ही में बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर पर हमला, समाज की मौन स्वीकृति ने संकटों को बढ़ाया।”
राम प्रसाद ने जोर देकर कहा कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी मातृभूमि है, जिसके प्रति एकनिष्ठ भक्ति आवश्यक है। उन्होंने संघ के समाज परिवर्तन के पाँच सूत्रों—सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, और स्वदेशी अपनाने—पर प्रकाश डाला। इन सूत्रों को अपनाकर ही एक अखंड, समृद्ध, और स्वतंत्र भारत का निर्माण संभव है।

सुंदर लाल पालीवाल: श्रद्धा, शौर्य, और समर्पण की मिसाल
Sunder Smriti Vyakhyanmala Rajsamand कार्यक्रम में स्व. सुंदर लाल पालीवाल के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को साझा किया गया। सोहन जी नागौरी (धरियावद) और दीपक जोशी (बांसवाड़ा) ने बताया कि जब वे अस्पताल में सुंदर लाल से मिलने पहुँचे, तब उन्होंने दुखी न होने की सलाह दी और पूछा, “शाखा का कार्य कैसा चल रहा है?” इस प्रश्न ने सभागार को भावुक कर दिया। उनके साथी लक्ष्मीलाल वैद्य (चित्तौड़गढ़) ने आपातकाल के दौरान सुंदर लाल के साहस और नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “सुंदर लाल श्रद्धा, शौर्य, और सरलता की प्रतिमूर्ति थे। उनकी नेतृत्व क्षमता अद्वितीय थी।” प्रचारक विश्वजीत और सुंदरलाल कटारिया, जो उनके साथ विभिन्न घटनाओं में शामिल थे, ने भी उनके संस्मरण साझा किए।
स्व. सुंदर लाल की पत्नी मीना पालीवाल और पुत्र घनश्याम पालीवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि सुंदर लाल का जीवन एक स्वयंसेवक के कर्तव्य का प्रतीक था। “वे हमेशा समाज के लिए सजग और समर्पित रहे। उनका कार्य केवल कर्तव्य था, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण के साथ निभाया।
पारसोला प्रकरण: सुंदर लाल का बलिदान

Ram Prasad speech RSS event कार्यक्रम में पारसोला प्रकरण (प्रतापगढ़, 1989) का उल्लेख विशेष रूप से किया गया। 36 वर्ष पूर्व, प्रतापगढ़ जिले के पारसोला गाँव में एक जनजातीय लड़की पूंजकी मीणा का अपहरण रफीक शाह नामक व्यक्ति ने कर लिया था। सुंदर लाल पालीवाल और उनके साथियों ने पूंजकी के परिजनों के साथ मिलकर पुलिस से कार्रवाई की माँग की। पुलिस की निष्क्रियता के विरोध में 6 अगस्त 1989 को शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित हुआ। इस दौरान सुंदर लाल, जो उस समय संघ के जिला शारीरिक प्रमुख थे, को लक्षित कर गोली चलाई गई। इस हमले में दो कार्यकर्ता—श्रवण सेन और गौतम मीणा—की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि सुंदर लाल की रीढ़ की हड्डी में गोली लगने से उनका कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। उदयपुर, जयपुर, और दिल्ली में दो वर्ष तक उनका इलाज चला। 2021 में उनके निधन तक वे व्हीलचेयर पर रहकर भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे।
आपातकाल और चिंगारी पत्र
Sunder Lal Paliwal sacrifice story सुंदर लाल पालीवाल ने आपातकाल (1975-77) के दौरान भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। बड़गाँव (उदयपुर) में रहते हुए उन्होंने विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल डिप्लोमा प्राप्त किया और संघ के मंडल कार्यवाह के रूप में कार्य किया। उन्होंने चिंगारी पत्र के प्रकाशन और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका उद्देश्य लोकतंत्र के लिए जनजागरण करना था। इस कार्य के दौरान उन्हें आधी रात को प्रिंटिंग प्रेस से गिरफ्तार किया गया और दो वर्ष तक जेल में रखा गया। उनके साथ कई स्थानीय लोकतंत्र सेनानी भी जेल गए।

सुंदर स्मृति व्याख्यानमाला : एक नई शुरुआत
Tribute to Sunder Lal Paliwal Rajsamand प्रस्तावना देते हुए डॉ. सुनील खटीक ने बताया कि राजसमंद में विचार प्रवाह के क्रम में यह सुंदर स्मृति व्याख्यानमाला संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू की गई है। यह वार्षिक आयोजन प्रत्येक वर्ष नए विषयों के साथ समाज के प्रबुद्धजनों के बीच विमर्श का मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह व्याख्यानमाला समाज को जागृत करने और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।

कार्यक्रम का आयोजन और साहित्य केंद्र
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम गीत और स्व. सुंदर लाल पालीवाल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। परिवारजनों और अतिथियों ने उनके जीवन के प्रेरक प्रसंगों को याद किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनिता पालीवाल ने कुशलतापूर्वक किया। अंत में नंद लाल सिंघवी ने सभी उपस्थित लोगों, वक्ताओं, और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
कार्यक्रम स्थल पर संघ और समाज से जुड़े राष्ट्रीय विचारों पर आधारित साहित्य का विक्रय केंद्र भी लगाया गया, जहाँ उपस्थित लोगों ने विशेष रुचि दिखाई। इस केंद्र पर उपलब्ध पुस्तकें और साहित्य समाज को संघ के विचारों और कार्यों से परिचित कराने में सहायक रहे।
