
temple flower waste compost : राजस्थान में पहली बार मंदिरों में चढ़ाई जाने वाली फूल-मालाओं से जैविक खाद तैयार की जाएगी। इस अनूठी पहल की शुरुआत राजसमंद जिले के नाथद्वारा से की जा रही है। नगर पालिका की टीम मंदिरों से फूल और मालाएं एकत्रित कर उन्हें डंपिंग यार्ड तक पहुंचाएगी, जहां प्रोसेसिंग यूनिट में इनसे ऑर्गेनिक कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी।
तैयार खाद को 5 रुपए प्रति किलो की दर से किसानों और बाजार में बेचा जाएगा। इससे एक ओर कचरे का बेहतर निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका को अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी। अधिकारियों का मानना है कि प्रभु के चरणों में अर्पित फूल अब खाद बनकर खेतों में नई जान डालेंगे। इस योजना को लेकर 7 अप्रैल को नाथद्वारा नगर पालिका सभागार में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में शहर के प्रमुख मंदिरों के पुजारी शामिल हुए और सभी ने इस पहल पर सहमति जताई। तय किया गया कि अब मंदिरों में चढ़ाई गई फूल-मालाओं को कुओं, बावड़ियों और जलाशयों में प्रवाहित नहीं किया जाएगा, बल्कि उनका सम्मानजनक और उपयोगी निस्तारण किया जाएगा।
फूल, माला और पत्तियां होंगी अलग से एकत्रित
temple flowers organic manure : योजना के तहत भगवान को अर्पित फूल, मालाएं और पत्तियां अलग-अलग एकत्रित की जाएंगी। इसके बाद इन्हें सेग्रीगेशन यूनिट में भेजा जाएगा, जहां कंपोस्ट खाद तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। मंदिरों के इस विशेष कचरे के लिए नगर पालिका की एक अलग गाड़ी भी निर्धारित की जाएगी।
पालिका आयुक्त ने बताई पहल की जरूरत
Nathdwara temple flower compost : पालिका आयुक्त सौरभ कुमार जिंदल ने बताया कि अक्सर लोग फूल-मालाओं को पॉलिथीन में पैक कर जल स्रोतों में डाल देते हैं, जिससे प्रदूषण फैलता है। इसे रोकने के लिए पालिका रोजाना मंदिरों से फूल-मालाएं एकत्रित करेगी। लोगों से अपील की गई है कि वे इस सामग्री को सामान्य कचरे से अलग रखें और निर्धारित गाड़ी में ही डालें।
पहले चरण में 20 मंदिरों को जोड़ा गया
योजना के पहले चरण में शहर के 20 मंदिरों को शामिल किया गया है। सभी पुजारियों और सेवाकर्मियों का एक वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया है, ताकि सूचना मिलते ही पालिका की गाड़ी मौके पर पहुंचकर सामग्री कलेक्ट कर सके। इसके बाद एकत्रित फूलों को गुंजोल स्थित डंपिंग यार्ड भेजा जाएगा, जहां सृजन सेवा संस्थान की टीम खाद तैयार करेगी।
रोज 200 से 500 किलो तक कलेक्शन का लक्ष्य
Rajasthan temple waste management : नगर पालिका के अनुसार प्रतिदिन न्यूनतम 200 किलोग्राम और अधिकतम 500 किलोग्राम तक फूल-मालाएं एकत्रित की जा सकेंगी। खाद की शुरुआती कीमत 5 रुपए प्रति किलो तय की गई है। अनुमान है कि इस योजना से पालिका को हर महीने करीब 30 हजार रुपए की अतिरिक्त आय हो सकती है।

सृजन सेवा संस्थान संभालेगा खाद बनाने का काम
सृजन सेवा संस्थान के विष्णु नागर ने बताया कि प्रतिदिन 200 से 500 किलोग्राम फूल-मालाएं एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। खाद तैयार होने के बाद इससे आय भी होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
धार्मिक नगरी में नवाचार की नई मिसाल
temple garland recycling India : स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े देशराज मीणा ने कहा कि नाथद्वारा एक धार्मिक नगरी है, जहां बड़ी संख्या में मंदिर हैं। इसी वजह से यहां इस तरह के नवाचार की शुरुआत की गई है। उन्होंने बताया कि देश के कुछ राज्यों में धार्मिक कचरे के निस्तारण पर काम हो रहा है, लेकिन मंदिरों में चढ़ी फूल-मालाओं से खाद बनाने की शुरुआत नाथद्वारा से ही की जा रही है।
पुजारियों ने बताया फसलों के लिए संजीवनी
सिंहाड़ हनुमानजी मंदिर के पुजारी रतन वैष्णव ने कहा कि प्रभु के श्रीचरणों में अर्पित फूलों का इससे बेहतर उपयोग नहीं हो सकता। इससे मंदिरों में स्वच्छता बनी रहेगी और किसानों को भी जैविक खाद मिलेगी, जो फसलों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
आस्था के सम्मान के साथ जलाशयों की भी सुरक्षा
जलाशय संरक्षण समिति के तन्मय पालीवाल ने इस पहल को पर्यावरण और आस्था, दोनों के लिए सकारात्मक कदम बताया। उनका कहना है कि इससे धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी बना रहेगा और जलाशयों को प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलेगी।



