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किस तरह हुआ जीन्स पैंट का आविष्कार, देखिए पूरी खबर

Jaivardhan News June 21, 2021

उद्योगीकरण के बाद यूरोप में कामगारों और नाविकों के लिए ऐसे परिधानों की जरूरत महसूस की गई जो मजबूत हों और देर से फटें। सोलहवीं सदी में यूरोप ने भारतीय मोटा सूती कपड़ा मंगाना शुरू किया। जिसे डुंगारी कहा जाता था। बाद में इसे नील के रंग में रंग कर मुंबई के डोंगारी किले के पास बेचा गया था। नाविकों ने इसे अपने अनुकूल पाया और इससे बनी पतलूनें पहनने लगे। कंधे से लेकर पाजामे तक का यह परिधान डंगरी कहलाता है। लगभग ऐसा ही परिधान कार्गो सूट होता है। जिसे नाविक और वायुसेवाओं के कर्मचारी पहनते हैं। डंगरी के कपड़े और जीन्स में फर्क यह होता है कि जहां डंगरी में धागा रंगीन होता है। वहीं जीन्स को तैयार करने के बाद रंगा जाता है। आमतौर पर जीन्स नीले काले और ग्रे शेड्स में होती हैं। इन्हें जिस नील से रंगा जाता था। वह भारत या अमरीका से आती थी। पर जीन्स का जन्म यूरोप में हुआ। सन् 1600 की शुरुआत में इटली के कस्बे ट्यूरिन के निकट चीयरी में जीन्स वस्त्र का उत्पादन किया गया। इसे जेनोवा के हार्बर के माध्यम से बेचा गया था। जेनोवा एक स्वतंत्र गणराज्य की राजधानी थी। जिसकी नौसेना काफी शक्तिशाली थी। इस कपड़े से सबसे पहले जेनोवा की नौसेना के नाविको की पैंट्स बनाई गईं।

नाविकों को ऐसी पैंट की जरूरत थी। जिन्हें सूखा या गीला भी पहना जा सके। इन जीन्सों को सागर के पानी से एक बड़े जाल में बांध कर धोया जाता था। समुद्र के पानी उनका रंग उड़ाकर उन्हें सफेद कर देता था। इस तरह कई लोगों के अनुसार जीन्स नाम जेनोवा पर पड़ा है। जीन्स बनाने के लिए कच्चा माल फ्रांंस के निम्स शहर से आता था। जिसे फ्रांंसीसी में देनिम कहते थे। इसीलिए इसके कपड़े का नाम डेनिम पड़ गया। उन्नीसवीं सदी में अमरीका में सोने की खोज का काम चला। उस दौर को गोल्ड रश कहते हैं। सोने की खानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए भी मजबूत कपड़ों के परिधान की जरूरत थी। सन् 1853 में लेओब स्ट्रॉस नाम के एक व्यक्ति ने थोक में वस्त्र सप्लाई का कारोबार शुरू किया। लेओब ने बाद में अपना नाम लेओब से बदल कर लेवाई स्ट्रॉस कर दिया।

लेवाई स्ट्रॉस को जैकब डेविस नाम के व्यक्ति ने जीन्स नामक पतलून की पॉकेटों को जोडऩे के लिए मेटल के रिवेट इस्तेमाल करने की राय दी। डेविस इसे पेटेंट कराना चाहता था। पर इसके लिए उसके पास पैसा नहीं था। वर्ष 1873 में लेवाई स्ट्रॉस ने कॉपर के रिवेट वाले श्वेस्ट ओवर ऑलश् बनाने शुरू किए। तब तक अमेरिका में जीन्स का यही नाम था। वर्ष 1886 में लेवाई स्ट्रॉस ने इस पतलून पर चमड़े के लेबल लगाने शुरू कर दिए। इन लेबलों पर दो घोड़े विपरीत दिशाओं में जाते हुये एक पतलून को खींचते हुए दिखाई देते थे। इसका मतलब था कि पतलून इतनी मजबूत है कि दो घोड़े भी उसे फाड़ नहीं सकते। बीसवीं सदी में हॉलीवुड की काउ ब्वॉय फिल्मों ने जीन्स को काफी लोकप्रिय बनाया। पर यह फैशन में बीसवीं सदी के आठवें दशक में ही आई।

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जयवर्द्धन न्यूज डेस्क टीम। पांच से 15 वर्ष तक पत्रकारिता के अनुभवी एक्सपर्ट शामिल है, जो प्रत्येक कंटेंट का गहन अवलोकन के बाद मौजूदा स्थिति के अनुसार बेहतर, निष्पक्ष, सारगर्भित व पठनीय कंटेंट तैयार करते हैं। Jaivardhan News Desk Team

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#rajsamandराजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी में नए सत्र के पहले दिन एक दर्दनाक सड़क हादसे में सरकारी स्कूल की महिला टीचर दमयंती चांवरिया की मौत हो गई। वह सुबह स्कूटी से ड्यूटी पर जा रही थीं, तभी बाइपास तिराहे पर सामने से आ रही बोलेरो ने टक्कर मार दी। हादसे में वह करीब 10 फीट दूर जा गिरीं। यह पूरी घटना CCTV में कैद हुई है। सबसे भावुक बात यह है कि एक दिन पहले ही उनकी बेटी का 12वीं का रिजल्ट आया था।Owner : Laxman Singh Rathor, Senior JournalistFacebook Page : Jaivardhannews9
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नाथद्वारा में पेड़- पौधों पर QR कोड, स्कैन कर जान सकेंगे विशेषताएं  #nathdwaranews #agriculturenews #jaivardhannews
#rajsamandराजसमंद जिले के नाथद्वारा शहर में पर्यावरण जागरुकता व पौधो की विशेषता व महत्व आमजन को समझाने के उद्देश्य से पेड़ पौधों के QR कोड लगाए जा रहे हैं। नगरपालिका नाथद्वारा के आयुक्त सौरभ कुमार जिंदल ने बताया कि शहर के थीम पार्क, डम्पिंग ग्राउंड, गणेश टेकरी, एसटीपी प्लांट, चित्रकूट स्टेडियम आदि जगह पर 10 से 15 फीट ऊंचाई के करीब 7 हजार छायादार व फलदार पेड़ व पौधों पर QR कोड लगाए जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में शिक्षा और तकनीक का समन्वय है, जिससे आमजन विशेषकर युवाओं को प्रकृति का महत्व समझाना ही मुख्य ध्येय है।Owner : Laxman Singh Rathor, Senior JournalistFacebook Page : Jaivardhannews9
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पड़ोसी से झगड़े में रिटायर्ड बैंककर्मी की मौत, धक्का मुक्की में रोड पर गिरे  #jaivardhannews #jaipurतंग गली में ट्रैवल टेम्पो लाने पर पड़ोसी से कुछ लोग झगड़ने लगे। बीच बचाव में गए रिटायर्ड बैंककर्मी मौत हो गई। घर के सामने संकरी गली से टेंपो ट्रैवलर निकालने पर विवाद हुआ। यह घटना जयपुर के पत्रकार कॉलोनी के पटेल मार्ग की है, जहां 68 वर्षीय विजेंद्रसिंह की मौत हो गई। उनके पड़ोस में ट्रैवल एजेंसी संचालक छोटे लाल सैनी का घर है, जिसने एक टेंपो ट्रैवलर मंगवाया, जिसे उज्जैन रवाना करना था। जब वाहन को गली में लाने की कोशिश की, तब विजेंद्रसिंह के परिवार ने संकरी गली में गाड़ी की एंट्री पर आपत्ति जताई। देखते ही देखते कहासुनी इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद के बीच धक्का-मुक्की हुई और विजेंद्र सिंह सड़क पर गिर पड़े। बताया कि गिरने के बाद वे बेहोश हो गए। उन्हें इस हालत में देख पड़ोसी छोटे लाल और उसकी पत्नी रेखा मौके से भाग निकले। टेंपो ट्रैवलर चालक दिनेश जाट भी वाहन लेकर फरार हो गया। फिर परिजन तुरंत विजेंद्र सिंह को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस पर पत्रकार कॉलोनी थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी।Owner : Laxman Singh Rathor, Senior JournalistFacebook Page : Jaivardhannews9
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