
India wholesale inflation : भारत में थोक महंगाई दर (WPI) को लेकर एक सकारात्मक खबर सामने आई है। सोमवार, 16 जून को जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में थोक महंगाई दर में उल्लेखनीय कमी देखी गई है और यह 0.39% के स्तर पर आ गई है। यह पिछले 14 महीनों का सबसे निचला स्तर है। अप्रैल 2025 में यह दर 0.85% थी, जो मई में माह-दर-माह आधार पर 0.46% की कमी के साथ 0.39% पर पहुंच गई। इस गिरावट से आम जनता को पेट्रोल-डीजल से लेकर खाने-पीने की वस्तुओं तक कई चीजों की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
उद्योग मंत्रालय का बयान: कीमतों में कमी का कारण
WPI drops to 0.39% : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि इस गिरावट का मुख्य कारण खाद्य उत्पादों (फूड प्रोडक्ट), बिजली (इलेक्ट्रिसिटी), अन्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों, रसायनों और रासायनिक उत्पादों (केमिकल्स एंड केमिकल प्रोडक्ट्स), अन्य परिवहन उपकरणों (ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट), और गैर-खाद्य उत्पादों (नॉन-फूड प्रोडक्ट) की कीमतों में आई कमी है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि मई 2025 के लिए WPI में मासिक आधार पर परिवर्तन अप्रैल 2025 की तुलना में (-) 0.06% रहा है, जो एक स्थिर आर्थिक स्थिति की ओर इशारा करता है।
प्राइमरी गुड्स और फ्यूल में कमी
Petrol diesel prices वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मासिक आंकड़ों के अनुसार, प्राइमरी गुड्स इंडेक्स में भी कमी देखी गई है। अप्रैल 2025 में यह इंडेक्स 184.4 था, जो मई में 0.05% की मामूली गिरावट के साथ 184.3 (अनंतिम) पर आ गया। इस दौरान मिनरल्स की कीमतों में 7.16% और नॉन-फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में 0.63% की कमी दर्ज की गई। हालांकि, खाद्य उत्पादों (फूड प्रोडक्ट्स) की कीमतों में 0.56% की वृद्धि देखी गई, जो कुछ खाद्य वस्तुओं की मांग में बढ़ोतरी को दर्शाता है।
फ्यूल और इलेक्ट्रिसिटी इंडेक्स में भी कमी आई है। अप्रैल 2025 में यह इंडेक्स 148.1 था, जो मई में 0.95% की गिरावट के साथ 146.7 पर पहुंच गया। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स का इंडेक्स मई में 144.9 (अनंतिम) पर स्थिर रहा, जिसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।
खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर
Food inflation rate मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर -1.56% रही, जो अप्रैल में -0.86% थी। प्राइमरी वस्तुओं की महंगाई दर अप्रैल के -1.44% से घटकर -2.02% हो गई। फ्यूल और बिजली की महंगाई दर में भी कमी आई है, जो अप्रैल में -2.18% थी और मई में -2.27% दर्ज की गई। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई दर मई में 2.04% रही, जो इस सेक्टर में स्थिरता को दर्शाती है।
सब्जियों, अंडे, मांस और मछली की कीमतों में बड़ी राहत
Vegetable price drop खाद्य उत्पादों की श्रेणी में सब्जियों की महंगाई दर में भारी कमी देखी गई है। मई में यह दर -21.62% रही, जबकि अप्रैल में यह -18.26% थी। दालों की महंगाई दर भी -10.41% रही, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है। हालांकि, गेहूं की महंगाई दर मई में 5.75% रही, जो कुछ अनाजों की कीमतों में वृद्धि को दर्शाता है। अंडे, मांस और मछली की थोक महंगाई दर अप्रैल में -0.29% से घटकर मई में -1.01% हो गई। आलू और प्याज की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखी गई, जहां महंगाई दर क्रमशः -29.42% और -14.41% रही।

नॉन-फूड और मिनरल्स की स्थिति
WPI inflation lowest नॉन-फूड वस्तुओं की थोक महंगाई दर मई में 1.53% रही, जो अप्रैल में 1.40% थी। मिनरल्स की महंगाई दर में भी बदलाव देखा गया, जो अप्रैल में 9.69% थी और मई में घटकर 0.44% हो गई। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की थोक महंगाई दर मई में -12.43% रही, जबकि कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई दर -13.97% दर्ज की गई। यह गिरावट आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी के रूप में राहत दे सकती है।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
थोक महंगाई दर में इस गिरावट को अर्थशास्त्रियों ने सकारात्मक संकेत माना है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य वस्तुओं, फ्यूल और बिजली की कीमतों में कमी से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इसका लाभ होगा। खास तौर पर सब्जियों, आलू, प्याज, और अंडे-मांस जैसी रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में कमी से मध्यम वर्ग के परिवारों का बजट संतुलित होने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ खाद्य वस्तुओं जैसे गेहूं की कीमतों में वृद्धि चिंता का विषय हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में कीमतों में स्थिरता बनी रहे। इसके अलावा, कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में कमी से आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फायदा हो सकता है।
मई 2025 में थोक महंगाई दर का 0.39% तक गिरना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। खाद्य वस्तुओं, फ्यूल, और बिजली की कीमतों में कमी से आम जनता को राहत मिली है, और यह 14 महीने का सबसे निचला स्तर है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे उद्योगों और व्यापारियों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि पर नजर रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।



