
petrol diesel price hike latest news : देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम जनता की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के डायरेक्टर राज कुमार दुबे के बयान ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि यदि वैश्विक ऊर्जा संकट इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक और बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
बीते 9 दिनों में देश में तीन बार ईंधन की कीमतें बढ़ चुकी हैं। 23 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इससे पहले 15 मई को भी करीब 3 रुपए प्रति लीटर तक दाम बढ़ाए गए थे। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घरेलू बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। बीपीसीएल के डायरेक्टर राज कुमार दुबे के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुआ ऊर्जा संकट अब लंबे समय तक चल सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में तेल कीमतों में आई 20 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को अस्थायी माना जा रहा था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है और उसे दोबारा सामान्य स्थिति में लाने में काफी समय लग सकता है।
सरकार और तेल कंपनियों के सामने केवल तीन विकल्प
Petrol diesel price hike today : राज कुमार दुबे ने बताया कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार और तेल कंपनियों के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं। पहला विकल्प यह है कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी कर दी जाए। दूसरा विकल्प यह है कि तेल कंपनियां खुद घाटा सहन करें और मौजूदा कीमतों पर ईंधन बेचती रहें। तीसरा विकल्प सरकार की वित्तीय सहायता का है, जिसमें सरकार फंडिंग के जरिए तेल कंपनियों को राहत प्रदान करे।

भारत ने बदले तेल सप्लाई के स्रोत
petrol diesel price news : बीपीसीएल ने बताया कि भारत अब केवल पारंपरिक तेल सप्लाई पर निर्भर नहीं है। भारत ने रूस, अफ्रीका और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाकर सप्लाई नेटवर्क को मजबूत किया है। राज कुमार दुबे के मुताबिक पहले भारत के पास करीब 20 सप्लाई पॉइंट्स थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 40 हो गई है। इससे भविष्य में किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर सप्लाई प्रभावित होने की संभावना कम होगी।
28 फरवरी से शुरू हुआ था मिडिल ईस्ट संकट
petrol diesel ke bhav : मिडिल ईस्ट में तनाव 28 फरवरी को उस समय और बढ़ गया था, जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए थे। हालांकि अप्रैल की शुरुआत में दोनों पक्ष युद्धविराम के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन अब भी शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इसी अस्थिर माहौल का असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिल रहा है।
हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़े तेल के दाम
petrol diesel ke dam : युद्ध के दौरान ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हॉर्मुज बंद होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन मार्च तक इसकी कीमत बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि सीजफायर के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी आई, लेकिन बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
आम जनता पर पड़ सकता है सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब, ट्रांसपोर्ट खर्च और महंगाई पर पड़ेगा। लगातार बढ़ते ईंधन दामों से माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका जताई जा रही है।



