
राजसमंद : Rajsamand Sand Mining News : लंबे समय बाद शुरू हुई वैध बजरी खनन प्रक्रिया के साथ ही जिले में एक नया विवाद सामने आया है। खनिज विभाग ने करीब दो साल से अटकी वैध बजरी खनन की प्रक्रिया को हरी झंडी तो दे दी है, लेकिन आवंटित क्षेत्र का भौतिक सीमांकन करना भूल गया है।
बनास नदी क्षेत्र में एक मई से बजरी खनन की मंजूरी मिलने के बाद स्पष्ट पैमाइश न होने से अब अवैध खनन की आशंका बढ़ गई है। आस-पास के किसानों ने लीजधारक पर रात के समय तय क्षेत्र से बाहर जाकर सरकारी और खातेदारी भूमि से बजरी निकालने के आरोप लगाए हैं। इस समस्या को लेकर पीपली आचार्यान, बड़लिया और ओड़ा के ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार शिकायत कर कार्रवाई की मांग भी की है। विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण प्रभावित ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है ।

45 मी. दूरी जरूरी, फिर भी खेतों और श्मशान के पास खुदाई
Banas River Illegal Mining : खनिज विभाग ने बनास नदी क्षेत्र में 75 और 37 हेक्टेयर की दो बड़ी लीजों को कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की मंजूरी दी है। इसके बाद कुल 112 हेक्टेयर क्षेत्र में दो लीज पर बजरी का काम शुरू हो चुका है। जमीन की पैमाइश और सीमा तय नहीं होने के कारण रात के समय नदी के किनारों पर स्थित बिलानाम और निजी खातेदारी भूमि से बजरी निकालने की शिकायतें आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पीपली आचार्यान, बड़लिया और ओड़ा नदी क्षेत्र में नियमों की अवहेलना कर पेयजल कुओं, एनिकट और श्मशान भूमि के एकदम समीप जेसीबी और पोकलेन मशीनों से खुदाई की जा रही है। तय नियमों के मुताबिक इन स्थानों से 45 मीटर की दूरी छोड़ना अनिवार्य है। Illegal Gravel Mining Rajsamand
12 में से केवल 3 लीज को ही मिली मंजूरी, 9 अब भी प्रक्रिया में अटकीं
Rajasthan Bajri Mining Controversy : विभाग ने करीब दो साल पहले जिले में बजरी की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 12 छोटी लीजों का आवंटन किया था। इन लीजों की नीलामी से सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिला था, लेकिन पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) मिलने में देरी के कारण यह योजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्तमान में केवल पीपली आचार्यान, मोही और भाटोली क्षेत्र की तीन लीजों को ही सभी वैधानिक स्वीकृतियां मिल सकी हैं, जबकि शेष 9 लीज अब भी प्रक्रिया के तहत अटकी हुई हैं। Illegal Sand Mining at Night
सीमांकन करने के बाद ही खनन का एग्रीमेंट किया जाता है, मौके पर अगर सीमांकन के निशान नहीं है तो जल्द कार्रवाई कर सीमांकन के निशान लगवाए जाएंगे।
-ललित बाछरा, एमई द्वितीय, खनिज विभाग राजसमंद



