
Rajasthan new land registry rules 2025 : राजस्थान में मंगलवार 3 दिसंबर 2025 से रजिस्ट्री के नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। राज्य सरकार ने राजस्थान रजिस्ट्रेशन एक्ट-2021 में किए गए संशोधन को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके बाद पूरे प्रदेश के सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में रजिस्ट्री का काम लगभग ठप ही रहा। अब सोसाइटी पट्टों (लगभग 60% रजिस्ट्रियां इन्हीं की होती हैं) की रजिस्ट्री तभी होगी, जब प्लॉट खरीदने वाला व्यक्ति यह लिखित में प्रमाण देगा कि जिस जमीन पर उसने प्लॉट लिया है, उसका लैंड कन्वर्जन पूरा हो चुका है या वह 90A के दायरे में आ गई है।
नए नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि अगर बिना कन्वर्जन या 90A के कोई सोसाइटी पट्टा रजिस्टर हो गया, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित उप-रजिस्ट्रार की होगी। नतीजा यह हुआ कि बुधवार को भी प्रदेशभर के रजिस्ट्री ऑफिसों में कामकाज नाममात्र का ही रहा। कई जगह तो लोग सुबह से शाम तक इंतजार करते रहे, लेकिन बिना जरूरी दस्तावेजों के एक भी डीड रजिस्टर नहीं हुई।

सरकारी, एससी-एसटी और कृषि जमीन के अवैध सौदों पर लगेगी लगाम
SC-ST agricultural land illegal plotting Rajasthan : इस सख्ती के पीछे सरकार का मुख्य मकसद यह है कि सरकारी जमीन, अनुसूचित जाति-जनजाति की खातेदारी जमीन और कृषि भूमि का गलत तरीके से बेचान पूरी तरह रुक जाए। अभी तक होता यह था कि कई बिल्डर और सोसाइटी संचालक एससी-एसटी की जमीन खरीद लेते थे, उसका कन्वर्जन कराए बिना ही प्लॉटिंग कर देते थे और फिर आम लोगों को बेच देते थे। बाद में जब असली हकदार कोर्ट जाते थे, तो लंबे मुकदमे चलते थे और खरीदार बीच मंझधार में फंस जाता था।
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के अनुसार एससी-एसटी की जमीन केवल उसी वर्ग के व्यक्ति को ही बेची जा सकती है, लेकिन नियमों को चकमा देकर बड़े पैमाने पर ऐसे सौदे हो रहे थे। अब नए नियम से ऐसे सभी फर्जीवाड़े पर पूर्ण विराम लगा देंगे।

आम आदमी की मुश्किलें बढ़ीं, वकीलों ने भी जताया विरोध
Rajasthan 90A conversion mandatory for registry : इस अचानक आए बदलाव से सबसे ज्यादा परेशानी उन लाखों लोगों को हो रही है, जिन्होंने किसी सोसाइटी से प्लॉट खरीद लिया है, लेकिन सोसाइटी ने उन्हें कन्वर्जन या 90A के कागजात नहीं दिए। अब ऐसे सभी खरीदारों को खुद जिला कलेक्टर कार्यालय, जेडीए, यूआईटी या नगर निगम के चक्कर काटकर ये दस्तावेज जुटाने पड़ रहे हैं – जो महीनों तक की प्रक्रिया है।
रजिस्ट्री ऑफिसों में काम करने वाले दर्जनों वकीलों और दस्तावेज लेखकों ने भी इस नियम का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार को कम से कम 3-6 महीने का समय देना चाहिए था ताकि पहले से बिक चुके प्लॉटों के कागजात पूरे हो जाते। अचानक नियम लागू करने से आम जनता ही परेशान हो रही है।
सरकार की आमदनी में होगा भारी इजाफा, विवादों में आएगी कमी
Agricultural land to residential conversion Rajasthan : दूसरी ओर इस नियम से राज्य सरकार की आमदनी में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है। अभी तक ज्यादातर सोसाइटी बिना कन्वर्जन कराए ही कॉलोनी काट लेती थीं और सरकार को कन्वर्जन शुल्क नहीं मिलता था। अब हर कॉलोनी को पहले लैंड यूज चेंज कराना पड़ेगा, 90A की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी – जिससे सरकार को करोड़ों-अरबों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।
Rajasthan sub-registrar office work stopped : साथ ही, कृषि जमीन को रिहायशी प्लॉट बनाकर बेचान के चल रहे हजारों मुकदमे भी आने वाले समय में कम हो जाएंगे, क्योंकि अब गलत दस्तावेजों पर रजिस्ट्री होना असंभव हो गया है।
संक्षेप में कहें तो यह नियम भले ही शुरू में लोगों को परेशान कर रहा हो, लेकिन लंबे समय में यह जमीन के सौदों में पारदर्शिता लाएगा और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगेगा। अब देखना यह है कि सरकार पुराने केसों के लिए कोई राहत पैकेज या विशेष कैंप लगाती है या नहीं।
