
Rajpal Yadav cheque bounce case : बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडी अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े बहुचर्चित Cheque Bounce Case में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट से 16 फरवरी को अंतरिम जमानत (Interim Bail) मिलने के तुरंत बाद इस मामले में शिकायतकर्ता बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल सामने आए और उन्होंने पहली बार कैमरे पर पूरी कहानी विस्तार से बताई।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अपने पैसे वापस लेने के लिए उन्हें कई बार अभिनेता के घर के चक्कर लगाने पड़े। कई मुलाकातों में वे हाथ जोड़कर गुहार लगाते रहे, लेकिन हर बार उन्हें निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ा।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
Rajpal Yadav interim bail Delhi High Court : माधव गोपाल अग्रवाल, जो मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक बताए जा रहे हैं, ने बताया कि वर्ष 2010 में उनकी मुलाकात अभिनेता से एक सांसद के माध्यम से हुई थी। उस समय फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए आर्थिक सहायता मांगी गई थी। शुरुआत में उन्होंने पैसे देने से इनकार किया था, लेकिन बाद में लगातार अनुरोध और भावनात्मक आग्रह (Emotional Request) के बाद उन्होंने बड़ी रकम दे दी। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि फिल्म बनने के बाद रकम लौटा दी जाएगी।
एग्रीमेंट में क्या लिखा था
Rajpal Yadav loan dispute news : कारोबारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच हुए लिखित एग्रीमेंट (Legal Agreement) में स्पष्ट शर्तें थीं —
- फिल्म हिट हो या फ्लॉप — पैसा लौटाना होगा
- सेंसर सर्टिफिकेट मिले या न मिले — भुगतान अनिवार्य रहेगा
- निवेश नहीं, बल्कि वापसी योग्य रकम मानी जाएगी
उन्होंने कहा कि यह निवेश (Investment) नहीं बल्कि उधार (Loan) था, इसलिए पैसे वापस मिलना तय था।

पैसे मांगने पर क्या होता था
Rajpal Yadav At Pata Lapata film controversy : अग्रवाल ने दावा किया कि जब भी वे चेक जमा करने से पहले कॉल करते थे तो हर बार एक ही जवाब मिलता — “अभी पैसे नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि कई बार वे व्यक्तिगत रूप से घर तक गए।
“मैं गिड़गिड़ाता रहा, दो बार तो बच्चों की तरह रोया भी… लेकिन हर बार खाली हाथ लौटा।”
उनका कहना है कि उन्होंने खुद दूसरों से उधार लेकर यह रकम दी थी, इसलिए आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता गया।
फिल्म रिलीज और कोर्ट तक पहुंचा मामला
Rajpal Yadav legal case latest update : बाद में उन्हें जानकारी मिली कि फिल्म का म्यूजिक लॉन्च बड़े स्तर पर हो चुका है। एग्रीमेंट के मुताबिक फिल्म बनने के बाद उन्हें नेगेटिव राइट्स और रकम मिलनी थी। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फिल्म की रिलीज रुकवा दी। बाद में अभिनेता की ओर से कहा गया कि फिल्म रिलीज होगी तभी पैसा लौटाया जा सकेगा। इसके बाद समझौते (Settlement) के बाद फिल्म रिलीज हुई।
10.40 करोड़ का सेटलमेंट भी बेकार
साल 2013 में भी भुगतान नहीं मिलने पर मामला फिर अदालत पहुंचा। अदालत के निर्देश पर लगभग 10.40 करोड़ रुपये का सेटलमेंट हुआ। लेकिन कारोबारी के अनुसार —
- कई चेक दिए गए
- सभी चेक बाउंस हो गए
यहीं से मामला Cheque Bounce Case में बदल गया।
जेल से हमें फायदा नहीं — सिर्फ पैसा चाहिए
अग्रवाल ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को जेल भेजना नहीं था, बल्कि अपनी रकम वापस लेना था।
“हमें सजा नहीं चाहिए, हमें सिर्फ अपने पैसे चाहिए। कोर्ट की प्रक्रिया चल रही है, हम मजबूर हैं।”
अब आगे क्या
दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। कानूनी प्रक्रिया (Legal Proceedings) जारी है और आने वाले समय में इस केस पर अंतिम निर्णय निर्भर करेगा। यह विवाद एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में फाइनेंशियल डील्स, लिखित अनुबंध (Contract) और भरोसे के बीच के जटिल रिश्ते को उजागर कर रहा है।



