
India lpg emergency : मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस यानी LPG की घरेलू सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए देश की रिफाइनरी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे LPG उत्पादन अधिकतम स्तर तक बढ़ाएं, ताकि अगर ईरान-इजराइल संघर्ष और गहराता है तो देश में रसोई गैस की किल्लत न हो। यह कदम सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के बीच उठाया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने गुरुवार देर रात जारी आदेश में साफ कहा है कि रिफाइनरियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर रसोई गैस बनाने में करें। यानी फिलहाल इन दोनों गैसों को दूसरे औद्योगिक या पेट्रोकेमिकल उपयोगों से हटाकर घरेलू LPG सप्लाई की ओर मोड़ा जाएगा। इसका मकसद यही है कि देश के करोड़ों उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे।

सरकार ने कहा- होर्मुज ही एकमात्र सहारा नहीं
lpg shortage india : सूत्रों के हवाले से आई जानकारी के अनुसार, सरकार का कहना है कि भारत केवल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर नहीं है। देश के पास कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, और वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई बढ़ाने की भी कोशिश की जा रही है। सरकार का दावा है कि मौजूदा स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति को संभालने के लिए कई विकल्प सक्रिय किए जा रहे हैं।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाई है। रॉयटर्स के अनुसार, 2022 में भारत अपनी जरूरत का केवल 0.2% कच्चा तेल रूस से मंगाता था, जबकि फरवरी 2026 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर करीब 20% हो गई। फरवरी में भारत ने रूस से औसतन 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत मिडिल-ईस्ट पर दबाव बढ़ने की स्थिति में वैकल्पिक सप्लाई चैनलों का उपयोग कर रहा है।
सरकारी तेल कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता
iran israel war lpg impact : सरकारी आदेश के अनुसार, प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई में प्राथमिकता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी। इसका सीधा उद्देश्य देश के करीब 33.15 से 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखना है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक भी है, इसलिए घरेलू सप्लाई की सुरक्षा सरकार के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है।
निजी कंपनियों, खासकर रिलायंस पर पड़ सकता है असर
india gas supply crisis : सरकार के इस फैसले का असर निजी क्षेत्र की कंपनियों पर भी पड़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन का डायवर्जन पेट्रोकेमिकल उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर अल्काइलेट्स जैसे उत्पाद, जिनका इस्तेमाल पेट्रोल की गुणवत्ता सुधारने में होता है, उनके उत्पादन पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, पेट्रोकेमिकल सेक्टर में उपयोग होने वाली गैसों को LPG की ओर मोड़ने से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ना भी तय माना जा रहा है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे उत्पाद सामान्यतः LPG की तुलना में बेहतर दाम पर बिकते हैं। ऐसे में यदि इन्हीं कच्ची गैसों को घरेलू LPG उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, तो कंपनियों का लाभ घट सकता है। यानी यह फैसला उपभोक्ताओं के हित में तो है, लेकिन इंडस्ट्री के लिए दबाव बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
कतर संकट ने बढ़ाई चिंता, LNG सप्लाई में पहले ही झटका
cooking gas shortage : मिडिल-ईस्ट संघर्ष का असर सिर्फ LPG तक सीमित नहीं है। भारत की गैस सप्लाई पर भी दबाव बढ़ता दिख रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कतर ने गैस निर्यात पर फोर्स मेजर घोषित किया है, क्योंकि हमलों और सुरक्षा जोखिमों के चलते LNG उत्पादन बाधित हुआ है। कतर वैश्विक LNG सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए उसके उत्पादन में रुकावट का असर सीधे भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ रहा है।
भारत की सबसे बड़ी LNG आयातक कंपनी पेट्रोनेट LNG ने भी कतर से मिलने वाली गैस सप्लाई पर असर पड़ने के बाद अपने स्थानीय खरीदारों को फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है। इस वजह से घरेलू गैस वितरण कंपनियों पर दबाव बढ़ा है और औद्योगिक ग्राहकों को सप्लाई सीमित करने जैसे कदम उठाने पड़े हैं।
CNG और PNG पर भी पड़ सकता है असर
विदेश से आने वाली LNG को री-गैसिफाई करके ही भारत में CNG और PNG सप्लाई की जाती है। ऐसे में यदि कतर से LNG सप्लाई कम होती है, तो शहरों में गैस वितरण करने वाली कंपनियों को महंगी स्पॉट मार्केट गैस खरीदनी पड़ सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, स्पॉट LNG की कीमतें हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आने वाले समय में CNG और PNG महंगे होने की आशंका बढ़ गई है।
इसी चिंता के बीच गैस सेक्टर की कंपनियों ने सरकार और GAIL से सप्लाई की स्पष्ट स्थिति बताने को कहा है। इंडस्ट्री को डर है कि अगर सस्ती कॉन्ट्रैक्ट गैस नहीं मिली, तो महंगी गैस का बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं पर आ सकता है। कुछ कंपनियों को यह आशंका भी है कि अगर CNG बहुत महंगी हुई तो उपभोक्ता स्थायी रूप से EV की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। यह गैस सेक्टर के लिए लंबी अवधि का जोखिम बन सकता है।
होर्मुज मार्ग पर दबाव ने बढ़ाया ऊर्जा संकट
भारत के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असुरक्षित होना है। यह वही समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए खाड़ी देशों से तेल और गैस का बड़ा हिस्सा दुनिया तक पहुंचता है। रॉयटर्स और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता तेज हुई है। कतर के ऊर्जा मंत्री ने भी चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा निर्यात कुछ ही हफ्तों में गंभीर रूप से बाधित हो सकता है।
फिलहाल सरकार का फोकस- घरेलू रसोई गैस में कोई किल्लत न हो
कुल मिलाकर सरकार का संदेश साफ है—घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने, कच्ची गैसों का प्राथमिक उपयोग घरेलू सिलेंडर के लिए करने और सरकारी तेल कंपनियों को सप्लाई में प्राथमिकता देने का फैसला इसलिए लिया है, ताकि संकट गहराने की स्थिति में भी आम घरों तक रसोई गैस की सप्लाई बनी रहे। हालांकि मिडिल-ईस्ट की स्थिति जितनी लंबी चलेगी, ऊर्जा बाजार पर दबाव उतना ही बढ़ेगा।



