
PM Modi Gold Appeal : भारत में शादी-ब्याह और सोने का रिश्ता बेहद गहरा माना जाता है। किसी भी बड़े समारोह में गोल्ड खरीदना परंपरा का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है। पीएम की यह अपील केवल सलाह नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत मानी जा रही है।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में सरकार विदेशी मुद्रा बचाने और आयात बिल को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। जहां पहले क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब इसकी कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है।
सोने का बढ़ता आयात भी बना बड़ी परेशानी
PM Modi Gold Buying Warning : सरकार की चिंता केवल तेल तक सीमित नहीं है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है और यहां इस्तेमाल होने वाले 90 फीसदी से ज्यादा सोने का आयात किया जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट करीब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इससे एक साल पहले यह 58 अरब डॉलर था। यानी सोने के आयात में लगभग 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के कुल आयात बिल में सोने की हिस्सेदारी करीब 9 फीसदी तक पहुंच चुकी है। क्रूड ऑयल के बाद सोना भारत का दूसरा सबसे बड़ा आयात खर्च बन चुका है।
डॉलर की बढ़ती मांग से कमजोर हो रहा रुपया
PM Modi Economy Warning : तेल और सोना दोनों की खरीद डॉलर में होती है। ऐसे में जब भारत ज्यादा तेल और गोल्ड आयात करता है, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इसका असर सीधे भारतीय रुपये पर पड़ता है और रुपया कमजोर होने लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रुपये में गिरावट जारी रही, तो विदेशों से आने वाली हर चीज महंगी हो जाएगी। इसका असर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दूसरी आयातित वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा।
विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट
India Economic Crisis Update : भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। 1 मई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 7.79 अरब डॉलर घटकर 690.69 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले भी एक सप्ताह में लगभग 4.82 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई थी। विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से सरकार के लिए रुपये को संभालना और जरूरी आयात करना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए पीएम मोदी ने की बचत की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में गैरजरूरी खर्च और फिजूल ईंधन खपत से बचना जरूरी है। पीएम ने लोगों से जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने, अनावश्यक यात्रा कम करने और पेट्रोल-डीजल का सीमित उपयोग करने की सलाह भी दी है। इसी क्रम में उन्होंने कुछ समय के लिए सोने की खरीदारी टालने का सुझाव दिया।

क्यों जरूरी माना जा रहा है यह कदम?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, तेल रोजमर्रा की जरूरत है, जबकि सोना निवेश और बचत का माध्यम माना जाता है। संकट के समय यदि लोग बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं, तो देश से अधिक डॉलर बाहर जाते हैं। इससे चालू खाता घाटा बढ़ता है और आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ जाता है। भारत पहले भी ऐसे हालात देख चुका है। जब-जब विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा, तब सरकारों ने सोने के आयात को कम करने के लिए कदम उठाए। कभी गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई, तो कभी लोगों को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर इसलिए है क्योंकि मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। यदि आने वाले समय में कच्चा तेल और महंगा हुआ तथा दूसरी ओर गोल्ड इंपोर्ट भी बढ़ता रहा, तो देश में महंगाई और तेज हो सकती है। कमजोर रुपया आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालेगा।
सरकार ने दिए सतर्क रहने के संकेत
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश केवल सोना खरीदने तक सीमित नहीं था। उनकी अपील से यह संकेत भी मिल रहा है कि सरकार आने वाले आर्थिक हालात को लेकर सतर्क है और लोगों से अभी से बचत और संयम अपनाने की अपील कर रही है।



