
Rajasthan Nikay Chunav News : राजस्थान में लंबे समय से अटके निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य सरकार चुनाव करवाने के लिए पूरी तरह तैयार है और अब आगे की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग को तय करनी है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा हमेशा से यही रही है कि निकाय और पंचायत चुनाव पारदर्शी तरीके से हों तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को संविधान के अनुसार उचित आरक्षण मिल सके।
Rajasthan Panchayat Election Update : सीकर दौरे पर पहुंचे राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब चुनाव करवाने का निर्णय निर्वाचन आयोग के स्तर पर होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार तीन महीने पहले भी चुनाव कराने के लिए तैयार थी और आज भी पूरी तरह तैयार है। हालांकि OBC आरक्षण को लेकर स्पष्ट आंकड़ों की कमी सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई थी। राज्यमंत्री खर्रा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय OBC वर्ग की सही गणना नहीं करवाई गई थी। इसी कारण आरक्षण का स्पष्ट आधार तैयार नहीं हो पाया। उन्होंने Rajasthan Panchayat Election Update कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद OBC आयोग का गठन किया गया ताकि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर आरक्षण व्यवस्था तय की जा सके। खर्रा ने कहा कि फिलहाल आयोग के पास इतने स्पष्ट और अंतिम आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, जिनके आधार पर निकाय और पंचायत चुनावों में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह लागू की जा सके। सरकार चाहती है कि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो और संवैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाए।

हाईकोर्ट के आदेशों का अध्ययन कर रही सरकार
Jhabar Singh Kharra Statement : मंत्री खर्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार फिलहाल हाईकोर्ट के आदेशों का गहराई से अध्ययन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी सरकार की दोबारा कोर्ट जाने की कोई तैयारी नहीं है। सरकार कानूनी पहलुओं को समझते हुए आगे की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि निकाय और पंचायती राज संस्थाओं में पुनर्गठन, सीमांकन और सीमा विस्तार से जुड़े लगभग सभी कानूनी अवरोध अब समाप्त हो चुके हैं। ऐसे में चुनाव करवाने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पहले से काफी स्पष्ट हो चुकी है।
“अब चुनाव आयोग को करना है फैसला”
Rajasthan Local Body Elections 2026 |: राज्यमंत्री ने दोहराया कि चुनाव करवाना निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है। सरकार आयोग को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव आयोग प्रशासनिक सहयोग या संसाधनों की मांग करेगा, राज्य सरकार तुरंत उपलब्ध करवाएगी। खर्रा ने कहा कि अभी प्रशासन कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में भी व्यस्त है। पहले SIR और अब आगामी जनगणना की तैयारियों के चलते प्रशासनिक मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव है। ऐसे में सरकार चाहती है कि चुनाव पूरी तैयारी और कानूनी मजबूती के साथ कराए जाएं।
OBC आरक्षण को लेकर सरकार क्यों सतर्क?
राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव लंबे समय से OBC आरक्षण के मुद्दे पर अटके हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण लागू करने के लिए “ट्रिपल टेस्ट” प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
ट्रिपल टेस्ट में क्या शामिल है?
| प्रक्रिया | उद्देश्य |
|---|---|
| आयोग का गठन | OBC वर्ग की वास्तविक स्थिति का अध्ययन |
| डेटा संग्रह | सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आंकलन |
| आरक्षण सीमा तय करना | संवैधानिक सीमा के भीतर आरक्षण लागू करना |
राज्य सरकार का कहना है कि बिना पर्याप्त डेटा के चुनाव करवाना भविष्य में कानूनी विवाद खड़े कर सकता है। इसी वजह से सरकार सतर्कता के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
जल संरक्षण कार्यक्रम में भी चुनावी चर्चा
Rajasthan Election Commission Update : राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा सोमवार को सीकर के स्मृति वन में आयोजित “वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान” के शुभारंभ कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने जल संरक्षण को लेकर श्रमदान भी किया। कार्यक्रम में प्रभारी सचिव, विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्काउट-गाइड्स और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भी मीडिया के सवालों का केंद्र निकाय और पंचायत चुनाव ही रहे। मंत्री खर्रा ने स्पष्ट किया कि सरकार चुनाव टालना नहीं चाहती, लेकिन बिना मजबूत कानूनी आधार के जल्दबाजी करना उचित नहीं होगा।
“अब हमें पर्यावरण को लेकर गंभीर होना होगा”
चुनावों पर बयान देने के साथ-साथ मंत्री खर्रा ने पर्यावरण संरक्षण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान ने खतरे की घंटी बजा दी है। उन्होंने कहा, “53 डिग्री से अधिक तापमान होने पर इंसानी दिमाग प्रभावित होने लगता है। आने वाले समय में यदि पर्यावरण संरक्षण नहीं किया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।” उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।
“एक AC इस्तेमाल करने वाले को 50 पेड़ लगाने चाहिए”
पूर्व सांसद स्वामी सुमेधानंद ने भी कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति एयर कंडीशनर (AC) का उपयोग करता है, उसे कम से कम 50 पेड़ लगाने चाहिए उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि लोग संतुलन नहीं बनाएंगे तो आने वाले समय में गर्मी जानलेवा रूप ले सकती है।
सीकर में लगाए जाएंगे 31 लाख पौधे
सीकर जिले के प्रभारी सचिव सुबीर कुमार ने बताया कि इस बार जिले में 31 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें एक लाख मोरिंगा (सहजन) के पौधे शामिल होंगे।
मोरिंगा पौधों की खासियत
- तेजी से बढ़ते हैं
- कम पानी में भी विकसित हो जाते हैं
- स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
- पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी
उन्होंने कहा कि बच्चों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश तेजी से समाज तक पहुंचाया जा सकता है।
“तापमान 55 डिग्री तक पहुंच सकता है”
प्रभारी सचिव सुबीर कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो भविष्य में 55 डिग्री से अधिक गर्मी देखने को मिल सकती है। ऐसे हालात में जनजीवन गंभीर संकट में आ सकता है और मौतों का खतरा भी बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना ही तापमान कम करने का सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय है।
फूड पार्क और फूड कोर्ट की तैयारी भी शुरू
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन को जिले में फूड पार्क और आधुनिक फूड कोर्ट विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को जिला मुख्यालय पर जमीन चिन्हित करने के लिए कहा गया है। प्रशासन का मानना है कि सीकर में बढ़ते कोचिंग हब और पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए आधुनिक फूड कोर्ट की जरूरत महसूस की जा रही है। जल्द ही जमीन चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना पर काम शुरू किया जाएगा।
चुनावी माहौल के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर मंत्री खर्रा के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में फिर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया पूरी करके ही चुनाव करवाना चाहती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में OBC आरक्षण और स्थानीय निकाय चुनाव राजस्थान की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।



