
काठमांडू। Nepal Flood 2026 नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रशासन की ओर से जारी किए गए अलर्ट की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें बाढ़ की जानकारी सुबह करीब 7:30 बजे ही मिल गई थी, जबकि सरकारी SMS अलर्ट करीब 9:15 बजे भेजा गया। ऐसे में चेतावनी जारी करने में करीब दो घंटे की देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नेपाल के भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। शनिवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 691 पहुंच गई, जबकि 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 275 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 7,514 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी हैं। मौसम विभाग के अनुसार चीन की ओर से रसुवा जिला प्रशासन को बाढ़ की सूचना सुबह करीब 9 बजे मिली थी। इसके बाद नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले करीब छह लाख लोगों को सुबह 9:15 बजे SMS अलर्ट भेजा गया। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अलग जानकारी सामने आई है। कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8:40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी, जबकि लोगों को SMS अलर्ट 9:35 बजे भेजा गया। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी संदेश से काफी पहले ही उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों के जरिए बाढ़ की जानकारी मिल गई थी। इसी अंतर को लेकर नेपाल में आपदा चेतावनी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- सुबह 7:30 बजे ही मिल गई थी सूचना
Nepal Flood Alert त्रिशूली निवासी 36 वर्षीय रमेश रिजाल ने बताया कि चीन सीमा के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह करीब 7:30 बजे फोन कर भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। हालांकि, रिजाल ने शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे। सुबह करीब 9:20 बजे उन्होंने अपने निर्माणाधीन नए घर का वीडियो भी बनाया। इसके कुछ ही समय बाद हालात तेजी से बिगड़ने लगे और परिवार के साथ उन्हें सुरक्षित स्थान की ओर जाना पड़ा। त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक सहकर्मी को नदी के ऊपरी क्षेत्र से बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने के निर्देश दिए। स्कूल में करीब 1,600 छात्र पढ़ते हैं। दवाड़ी के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ के पानी में बह गया। हालांकि, समय रहते बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू किया गया।

13 मिनट बाद बंद हुआ नदी का डेटा सिस्टम
Nepal Flood Deaths मौसम विभाग के अनुसार 26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए थे। इसके करीब 13 मिनट बाद 8:50 बजे भोटे कोशी नदी के जलस्तर की निगरानी करने वाला डेटा रिसीविंग सिस्टम बंद हो गया। इसके बाद तिब्बत की ल्हेंदे खोला नदी के क्षेत्र में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ नीचे गिरा। ल्हेंदे खोला, भोटे कोशी नदी की सहायक नदी है। भोटे कोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।
दो मिनट में बदल गया पूरा मंजर
Nepal Flood SMS Alert त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार मूल के जलेश्वर साहनी ने बाढ़ की भयावहता को तस्वीरों में कैद किया। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9:15 बजे रासुवागढ़ी में मौजूद उनके भाई ने फोन कर भीषण बाढ़ आने की जानकारी दी। इसके बाद साहनी अपने परिवार के साथ पहाड़ी इलाके की ओर चले गए। उन्होंने सुबह 9:36 बजे एक तस्वीर खींची, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9:38 बजे ली गई तस्वीर में पूरा त्रिशूली बाजार बाढ़ के पानी में तबाह हो चुका था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ कितनी तेजी से आगे बढ़ी और लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए कितना कम समय मिला।
विपक्ष ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम पर उठाए सवाल
Nepal Flood Warning Delay नेपाल में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियरों की निगरानी करता है, ऐसे में संभावित खतरे की जानकारी समय रहते नेपाल तक पहुंचनी चाहिए थी। बाढ़ की भयावहता और चेतावनी के समय में सामने आए अंतर के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर खतरे की सूचना पहले उपलब्ध थी, तो स्थानीय प्रशासन और आम लोगों तक समय पर क्यों नहीं पहुंची? नेपाल की आपदा चेतावनी व्यवस्था में हुई कथित देरी ने भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



