
Acharya Mahashraman Ahimsa Yatra : देश व दुनिया में अहिंसा की अलख जगाने के लिए पैदल चल रहे तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य एवं शांतिदूत आचार्य महाश्रमण के साथ कदम से कदम मिला साथ चल रही साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा राजसमंद पहुंची। ईटीवी भारत से खास बातचीत में साध्वी प्रमुखा ने कहा कि दुनिया में उग्र जेएन जी पीढ़ी को निष्ठा भावना से अहिंसा का मार्ग प्रशस्त किया जाए, तो उसे नियंत्रित किया जाना संभव है। साथ ही हिंसक देशों को भी दृढ़ संकल्प के साथ अहिंसा की राह दिखाए तो सारे दंगे फंसाद रोके जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए न सिर्फ नेता- राजनेता, बल्कि तमाम मानव समाज को पूर्ण निष्ठा से अहिंसा को अपनाना होगा, तभी संभव है।
राजसमंद शहर के भिक्षु निलयम में धर्मसभा के बाद ईटीवी भारत से खास मुलाकात की। साध्वी प्रमुखा ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ के बाद आचार्य महाश्रमण ने पूर्वोत्तर राज्यों के बाद दक्षिण क्षेत्र में भ्रमण करते हए आम जन मानस में अहिंसा को लेकर जनजाग्रति जगाई। साथ ही लाखों लोगों को नशामुक्ति को संकल्प दिलवा चुके हैं। इसी का परिणाम है कि राजसमंद शहर में जब आचार्य महाश्रमण आए, तो पांच हजार से ज्यादा स्कूली छात्र छात्राओं ने नशामुक्त जीवन शैली अपनाने के संकल्प पत्र भरे हैं। साध्वी प्रमुखा ने कहा कि आचार्य महाश्रमण ने अब तक की अहिंसा यात्रा के माध्यम से 1 करोड़ लोगों को नशामुक्ति का संकल्प दिलवा चुके हैं।

Terapanth Jain Sangh : सर्वधर्म समभाव की भावना ही आचार्य महाश्रमण को विशिष्ट बनाती है साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा ने कहा कि भगवान महावीर ने जनता के साथ अहिंसा का सिद्धांत प्रस्तुत किया। फिर जैन साधु साध्वियां अहिंसा को फॉलो करते हुए आमजन को भी इसी राह पर अग्रसर कर रहे हैं। गणाधिपति आचार्य तुलसी के अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से लोगों को छोटे छोटे संकल्प करवा रहे हैं, ताकि वे अहिंसा की राह पर आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि गुरुदेव तुलसी द्वारा उद्घोषित नारा है कि पहले इंसान और इंसानियत है, फिर हिन्दू और मुसलमान। इसके लिए अच्छा इंसान बनना होगा। हर धर्म समाज में अच्छे इंसान है। इसलिए हिन्दू, मुस्लिम, सीख इसाई हर धर्म के लोग आचार्य महाश्रमण के दर्शन को आते हैं और उनके प्रवचन सुनते हैं।
तख्ता पलटने वाली जेन जी पीढ़ी भी अहिंसा से ही बदल सकती है : साध्वी प्रमुखा
ETV Bharat exclusive interview Ahimsa : ईटीवी भारत से खास बातचीत में बांग्लादेश व जापान देशों में जेन जी युवा पीढ़ी ने हिंसात्मक कदम उठाकर सरकारों के तख्ता पलट कर दिए, उन पीढ़ी को कैसे समझाया जाए। इस पर साध्वी प्रमुखा ने कहा कि नई युवा पीढ़ी को भी अणुव्रत के छोटे छोटे संकल्प दिलाकर अहिंसा के मार्ग पर लाकर ही कंट्रोल में किया जा सकता है। हिंसात्मक कदम तो युवाओं को ज्यादा भड़काएगा। इसलिए अहिंसा से तो असंभव कार्य भी संभव हो सकता है। सिर्फ इसके लिए दृढ़ संकल्पित होने की जरूरत है।
निरपराध प्राणी की दया के संकल्प से बदलाव संभव
Ahimsa for global peace : साध्वी प्रमुखा ने कहा कि अहिंसा के छोटे छोटे नियम के माध्यम से ही नई युवा पीढ़ी को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर हर व्यक्ति यह संकल्प ले लेवे कि निरपराध प्राणी को मैं नहीं मारुंगा और यह दया भावना उनके मन में आ गई, तो फिर हिंसा का तो प्रश्न ही नहीं उठता। फिर न तो यूक्रेन में हिंसा होगी और न ही रसिया में हिंसा के हालात बनेंगे। न ईरान में हिंसा होगी और न ही इजराइल में हिंसा होगी और पूरे विश्व में शांति की स्थापना होगी।

गांधीजी की तरह दृढ़ संकल्पित जरूरी
साध्वी प्रमुखा से जब सवाल किया कि दुनिया में कई देश हिंसक है, जिनसे मुकाबला अहिंसात्मक तरीके से कैसे संभव है। इस साध्वी ने कहा कि अगर महात्मा गांधीजी की तरह दृढ़ संकल्पित होकर आगे बढ़े, तो सब संभव है। अगर व्हील पावर स्ट्राँग हो, तो सब संभव है।
आचार्य महाश्रमण की अहिंसा यात्रा
Acharya Mahashraman Rajasthan visit : तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण अहिंसा यात्रा पर हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने दिल्ली से अहिंसा यात्रा शुरू की थी। नेपाल, भूटान होते हुए पूर्वोत्तर व दक्षिण भारत की यात्रा करते हुए अब राजस्थान की तरफ वो दोबारा आए हैं। इसके बाद वे 7 जनवरी को नागौर जिले के लाडनूं में मंगल प्रवेश करेंगे, जहां उनका चातुर्मास प्रस्तावित है। आचार्य संयम, अहिंसा, करुणा और आत्मिक शुद्धि के जीवंत प्रतीक माने जाते हैं। विश्व-स्तर पर प्रभावशाली जैन संत के रूप में प्रतिष्ठित हैं। 23 फरवरी 2010 को उन्हें राजस्थान के सुजानगढ़ में तेरापंथ धर्मसंघ का 11वां आचार्य घोषित किया गया। इस यात्रा के तहत अब तक वे 50 किलोमीटर पैदल चले हैं। गुजरात के सूरत में चातुर्मास पूर्ण कर 6 नवंबर पैदल रवाना हुए थे और दो दिन राजसमंद प्रवास के बाद केलवा, पड़ासली होकर सिरीयारी के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। इसी के तहत राजसमंद में धर्मसभा का आयोजन हुआ, जिसे आचार्य महाश्रमण ने संबोधित किया।
