
Aravalli Dispute Supreme Court : Aravalli Dispute को लेकर देशभर के पर्यावरण प्रेमियों और जन संगठनों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अरावली पर्वतमाला की परिभाषा से जुड़े विवादित मामले पर Supreme Court of India ने एक बार फिर सक्रिय रुख अपनाते हुए suo motu cognizance लिया है। शीर्ष अदालत ने इस अहम मुद्दे पर सोमवार को सुनवाई तय की है, जिससे मामले को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
सुप्रीम कोर्ट के Chief Justice (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय Vacation Bench इस मामले की सुनवाई करेगी। इस पीठ में Justice J.K. Maheshwari और Justice Augustine George Masih भी शामिल हैं। कोर्ट का यह हस्तक्षेप ऐसे समय पर आया है, जब राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में अरावली को लेकर विरोध-प्रदर्शन और चिंता लगातार बढ़ रही है।
पर्यावरणीय चिंता के बीच कोर्ट का दखल
Aravalli Range Mining Case : सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। Environmentalists, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों का कहना है कि अरावली की परिभाषा में बदलाव से संरक्षित क्षेत्रों में भी Mining Activities और Construction Work को बढ़ावा मिल सकता है। इससे न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि Climate Change, Desertification और Groundwater Level पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला उत्तर भारत की पारिस्थितिकी (Ecology) के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह है। यह पर्वतमाला रेगिस्तान के विस्तार को रोकने, भूजल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में इसकी परिभाषा से जुड़ा कोई भी निर्णय दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
चार राज्यों पर पड़ेगा सीधा असर
Aravalli Hills Supreme Court Hearing : सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई अरावली की परिभाषा का सीधा असर Delhi, Rajasthan, Haryana और Gujarat के उन इलाकों पर पड़ेगा, जहां से अरावली रेंज गुजरती है। इन राज्यों में खनन और विकास परियोजनाओं को लेकर पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है। यदि संरक्षित क्षेत्र का दायरा सीमित किया गया, तो बड़े पैमाने पर खनन को वैधानिक मंजूरी मिल सकती है।

20 नवंबर का फैसला बना विवाद की जड़
Aravalli Mining Ban News : इस मामले की पृष्ठभूमि में 20 नवंबर को दिया गया सुप्रीम कोर्ट का पूर्व फैसला अहम माना जा रहा है। तत्कालीन CJI B.R. Gavai, Justice K. Vinod Chandran और Justice N.V. Anjaria की पीठ ने अरावली को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया था। फैसले के अनुसार, 100 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियां और दो पहाड़ियों के बीच 500 मीटर तक का क्षेत्र अरावली पर्वतमाला के दायरे में माना गया था। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों को खनन के लिए खोलने की अनुमति दी गई थी।
यह फैसला Ministry of Environment, Forest and Climate Change की एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था। कोर्ट ने उस समय यह भी कहा था कि यदि खनन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाती है, तो इससे Illegal Mining को बढ़ावा मिल सकता है।
सोमवार की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद सभी की निगाहें सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि अदालत पर्यावरण संतुलन और विकास के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कोई अहम दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। यह सुनवाई न केवल अरावली पर्वतमाला के भविष्य के लिए, बल्कि देश की पर्यावरण नीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, Aravalli Dispute पर सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।



