
उदयपुर : Arvind Singh Mewar Will Dispute : मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के दिवंगत सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ की अंतिम वसीयत (Will) को लेकर चल रहे कानूनी विवाद ने अब एक नया और सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। इस मामले में सामने आए तथ्यों ने न केवल न्यायिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि राजपरिवार के भीतर गहरे पारिवारिक मतभेदों को भी उजागर कर दिया है।
Mewar Royal Family Property Dispute : अरविंद सिंह मेवाड़ की छोटी बेटी पद्मजा कुमारी और बड़ी बेटी भार्गवी कुमारी ने Mumbai High Court में दायर अपनी याचिका में अपने ही पिता को शराब पीने का आदी और मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया है। दोनों बेटियों ने कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों में यह दावा किया है कि उनके पिता अंतिम समय में सोचने-समझने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे। इसी आधार पर उन्होंने पिता द्वारा बनाई गई अंतिम वसीयत को चुनौती दी है। याचिका में पद्मजा और भार्गवी ने कहा है कि अरविंद सिंह मेवाड़ अत्यधिक शराब सेवन के आदी थे, जिसके चलते उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो चुकी थी। बेटियों का कहना है कि ऐसी अवस्था में बनाई गई वसीयत को वैध नहीं माना जा सकता, क्योंकि उस समय पिता पूरी तरह मानसिक रूप से सक्षम नहीं थे।
बेटे लक्ष्यराज सिंह का पलटवार, बोले – “पिता की गरिमा को ठेस पहुंचाई”
Arvind Singh Mewar Last Will : बहनों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर अरविंद सिंह मेवाड़ के पुत्र डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संपत्ति के लालच में उनकी बहनें इस हद तक गिर गईं कि उन्होंने अपने ही पिता को शराबी और मानसिक रूप से विकृत करार दे दिया।लक्ष्यराज सिंह ने भावुक होते हुए कहा, “जिस पिता ने हमें पाल-पोसकर काबिल बनाया, जिनकी वजह से हम आज इस मुकाम तक पहुंचे, उन्हीं की छवि को इस तरह धूमिल किया जाना मेरे लिए गहरा मानसिक आघात है। देवतुल्य पिता की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों को परमेश्वर श्री एकलिंगनाथजी कभी माफ नहीं करेंगे।”

पद्मजा कुमारी का ‘No Comment’
Mewar Royal Family Court Case : जब इस पूरे विवाद और लगाए गए आरोपों को लेकर पद्मजा कुमारी से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने इस विषय पर No Comment कहकर कोई जवाब देने से इनकार कर दिया।
वसीयत पहले से पंजीकृत, बेटे को बनाया गया एकमात्र उत्तराधिकारी
Lakshyraj Singh mewar Latest news : गौरतलब है कि अरविंद सिंह मेवाड़ का देवलोकगमन 16 मार्च 2025 को हुआ था। इससे पहले, 7 फरवरी 2025 को उन्होंने अपनी अंतिम वसीयत तैयार कर उसे उप-पंजीयक कार्यालय में विधिवत Registered कराया था। इस वसीयत में उन्होंने अपनी सभी स्व-अर्जित संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी अपने पुत्र डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को नामित किया था। पिता के निधन के मात्र 15 दिन बाद ही इस वसीयत को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया था, जो अब High Court और Supreme Court तक पहुंच चुका है।
बेटियों ने स्व-अर्जित संपत्तियों में मांगा हिस्सा
पद्मजा और भार्गवी ने कोर्ट में यह भी दावा किया है कि उन्हें पिता की Self-Acquired Properties में वैधानिक हिस्सा मिलना चाहिए। इन संपत्तियों में उदयपुर स्थित शिकारबाड़ी की भूमि, मुंबई स्थित मेवाड़ हाउस के छठे माले का आधा हिस्सा, दार्जिलिया हाउस सहित कई अन्य संपत्तियां शामिल बताई गई हैं।
लक्ष्यराज सिंह का शपथ पत्र – “पिता पूरी तरह मानसिक रूप से स्वस्थ थे”
डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने High Court में शपथ पत्र दाखिल करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके पिता अंतिम समय तक मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ थे। उन्होंने बताया कि अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में पद्मजा और भार्गवी ने कुछ कंपनियों के शेयर अपने पिता को Gift किए थे, जिनकी स्वीकृति पर पिता ने स्वयं हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा, जनवरी 2025 में दोनों बहनों ने पिता के कहने पर उन चार कंपनियों के Director पद से इस्तीफा दे दिया था, जिनमें उन्हें पहले निदेशक नियुक्त किया गया था।
केस ट्रांसफर, अब दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
इस पूरे विवाद में एक और अहम मोड़ तब आया, जब Supreme Court ने जोधपुर और मुंबई High Court में वसीयत से जुड़े सभी लंबित मामलों को Delhi High Court में Transfer करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों को 12 जनवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले, डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने इसी वसीयत के आधार पर Rajasthan High Court, Jodhpur में Administration Letter जारी कराने के लिए याचिका दायर की थी। वहीं, पद्मजा और भार्गवी जोधपुर हाईकोर्ट में चल रहे मामले को Mumbai High Court स्थानांतरित कराने की मांग कर रही थीं।
