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Beneshwar Dham Mela : बेणेश्वर धाम में आस्था के कुंभ, 10 दिन होंगे धर्म- ध्यान व मुक्ति के अनुष्ठान

Jaivardhan News February 8, 2025 1 minute read

Beneshwar Dham Mela : दुनिया भर में बेणेश्वर एक ऐसा स्थान है जो अपनी कई अलौकिक विलक्षणताओं भरे इतिहास की वजह से ख़ासी पहचान रखता है। यह ने केवल एक टापू के रूप में बल्कि बेणेश्वर लाखों लोगों के हृदय में अंकित है। राजस्थान के दक्षिणांचल में बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों के मध्य माही, सोम और जाखम नदियों के पावन जल से घिरा बेणेश्वर टापू लोक आस्थाओं का वह महातीर्थ है जहाँ हर साल माघ माह में दस दिन का विराट मेला भरता है जिसमें कई लाख लोगों की आवाजाही के कारण इसे इस अंचल के कुंभ की ही तरह मान्यता प्राप्त है।

Famous religious places in Rajasthan : बेणेश्वर धाम राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां प्रतिवर्ष माघ शुक्ल एकादशी से माघ पूर्णिमा तक विशाल मेले का आयोजन होता है और इस बार 8 फरवरी से 12 फरवरी तक चलने वाले में हजारों की तादाद में लोग पहुंच चुके हैं। 10 दिन तक इस मेले में धर्म- ध्यान के साथ मुक्ति के अनुष्ठान होंगे। साथ ही उत्तरप्रदेश के प्रयागराज की तरह वागड़ का प्रयागराज माने जाने वाला बेणेश्वर धाम पर आस्था का सैलाब उमड़ने लगा है।

बेणेश्वर धाम मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह वागड़ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। यह मेला विभिन्न समुदायों को एक साथ लाकर सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देता है। संत मावजी महाराज की शिक्षाओं और आदिवासी संस्कृति की झलक इस मेले को विशेष बनाती है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

बेणेश्वर धाम मेला राजस्थान का सबसे बड़ा जनजातीय मेला है, जो आस्था, धर्म, और संस्कृति का संगम है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति और परंपराओं को भी दर्शाता है।

महाकुंभ की वजह से बेणेश्वर में बढ़ेगा श्रद्धा का सैलाब

कुल 144 साल बाद आए प्रयागराज महाकुंभ की वजह से इस बार बेणेश्वर के त्रिवेणी जल संगम तीर्थ में श्रृद्धालुओं की आवाजाही अधिक रहने का अनुमान है। विपन्नता और अन्य विषम परिस्थितियों के कारण जो लोग प्रयागराज नहीं जा पाए हैं वे बेणेश्वर कुंभ में अपनी आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य पाएंगे।

बेणेश्वर धाम बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर अवस्थित है जहाँ माघ शुक्ल एकादशी अर्थात 8 फरवरी, शनिवार से दस दिन का विशाल मेला भरेगा। मुख्य मेला माघ पूर्णिमा 12 फरवरी को भरेगा। मेले का समापन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन 17 फरवरी को होगा। इस मेले का शुभारंभ एकादशी को संत मावजी महाराज की परम्परा के नवें महंत एवं बेणेश्वर पीठाधीश्वर गोस्वामी श्री अच्युतानन्द जी महाराज द्वारा मन्दिर पर ध्वजारोहण से होगा।

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लोक लहरियों पर थिरकता है आस्था का महासागर

मेले में वागड़ अंचल से तो लाखों लोग भाग लेते ही हैं, देश के विभिन्न हिस्सों ख़ासकर मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी तादाद में मेलार्थी भाग लेते हैं। इसमें पवित्रा जल संगम तीर्थ में स्नान, अस्थि विसर्जन, देव दर्शन, मेला बाजारों से खरीदारी, मनोरंजन आदि के साथ वह सब कुछ होता है जो देश के बड़े-बड़े मेलों में होता है। लोक सांस्कृतिक आयोजनों के साथ ही आंचलिक परम्पराओं और धार्मिक तथा सामाजिक परिपाटियों का होने वाला दिग्दर्शन भी श्रृद्धा से अभिभूत कर देता है। करीब तीन सौ वर्ष से संत मावजी महाराज और बेणेश्वर की गाथाएं सुनाने वाले इस मेले में लोक संस्कृति, धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं तथा दक्षिणांचलीय पुरातन व सम सामयिक लोक लहरियों का जीवन्त प्रतिदर्श देखने को मिलता है। जिसे दक्षिणांचल के लोकजीवन और तमाम परम्पराओं की सम्पूर्ण थाह पानी हो, उसके लिए बेणेश्वर मेला, उसकी परंपराएं और रोचक गाथाएं अपने आप में काफी हैं।

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जय-जय-जय बेणेश्वर धाम

संत मावजी के अनुयायियों और भक्तों के लिए बेणेश्वर दूसरे सारे तीर्थों से बढ़कर है जहाँ मानते हैं कि मेले में भागीदारी से साल भर सुकून का अहसास होता रहता है। यही कारण है कि परिवार सहित लोग यहाँ आते हैं और प्रकृति, नदियों, देव धामों और जन गंगा के बीच अपने आपको पाकर आनंद का अनुभव करते हैं। जय-जय व्हाला मावजी, जय-जय-जय बेणेश्वर धाम।

बेणेश्वर धाम का इतिहास | History of Beneshwar Dham

बेणेश्वर धाम का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना है। यह स्थान सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित है, जिसे ‘वागड़ का प्रयाग’ भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि विक्रम संवत 1605-1637 के बीच महाराज आसकरण के शासनकाल में यहां शिव मंदिर का निर्माण किया गया था। बाद में, संत मावजी महाराज, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है, ने यहां तपस्या की और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया।

आस्था और धार्मिक महत्व | Tribal fairs in Rajasthan

बेणेश्वर धाम जनजातीय समुदायों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। माघ पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और अस्थि विसर्जन करते हैं। संत मावजी महाराज द्वारा रचित रासलीलाओं का मंचन भी इस मेले का मुख्य आकर्षण है, जो भक्तों को वृंदावन की रासलीला की याद दिलाता है।

मेले के दौरान, विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें ध्वजारोहण, शाही स्नान, पालकी यात्रा, भजन-कीर्तन, और संत मावजी महाराज की शिक्षाओं पर आधारित प्रवचन शामिल हैं। आदिवासी समुदाय अपने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य और संगीत प्रस्तुत करते हैं, जो उनकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करता है। ले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है, जिसमें लोक नृत्य, संगीत, और पारंपरिक खेल शामिल हैं। स्थानीय हस्तशिल्प, कुटीर उद्योगों की वस्तुएं, और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी मेले में लगाए जाते हैं, जो आगंतुकों को वागड़ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।

संत मावजी महाराज की शिक्षा | Teachings of Saint Mavji Maharaj

संत मावजी महाराज ने समाज में सामाजिक चेतना जागृत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। उनकी शिक्षाएँ आज भी लोगों को नैतिकता, सदाचार, और आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करती हैं। मेले के दौरान, उनके उपदेशों और शिक्षाओं पर आधारित प्रवचन आयोजित किए जाते हैं, जो भक्तों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

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बेणेश्वर धाम से जुड़े सवाल- जवाब

1. बेणेश्वर धाम मेला 2025 कब है?

उत्तर: बेणेश्वर धाम मेला 2025 में 8 फरवरी से 12 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। मुख्य स्नान 12 फरवरी (माघ पूर्णिमा) को होगा।

2. बेणेश्वर धाम का इतिहास क्या है?

उत्तर: बेणेश्वर धाम का इतिहास 300 साल पुराना है। यह डूंगरपुर, राजस्थान में स्थित है और इसे “वागड़ का प्रयाग” कहा जाता है। संत मावजी महाराज ने यहाँ भक्ति और समाज सुधार का प्रचार किया था।

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3. बेणेश्वर धाम कहाँ स्थित है?

उत्तर: बेणेश्वर धाम राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।

4. बेणेश्वर धाम का धार्मिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह स्थान त्रिवेणी संगम पर स्थित होने के कारण पवित्र माना जाता है। यहाँ स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। संत मावजी महाराज के अनुयायी इसे तीर्थ स्थल मानते हैं।

5. बेणेश्वर धाम यात्रा गाइड क्या है? (Beneshwar Dham travel guide)

उत्तर:

  • स्थान: डूंगरपुर, राजस्थान
  • कैसे जाएँ: उदयपुर से 123 किमी, डूंगरपुर से 45 किमी
  • ठहरने की सुविधा: धर्मशाला, होटल
  • मुख्य आकर्षण: त्रिवेणी संगम स्नान, शिव मंदिर, संत मावजी महाराज का आश्रम

6. बेणेश्वर धाम का महत्व क्या है?

उत्तर: यह स्थल हिंदू और भील जनजाति के लोगों के लिए पवित्र माना जाता है। यहाँ स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है और संत मावजी महाराज की शिक्षाएँ समाज को मार्गदर्शन देती हैं।

7. बेणेश्वर धाम के शिव मंदिर का इतिहास क्या है?

उत्तर: इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1605-1637 के बीच महाराज आसकरण द्वारा किया गया था। यह भगवान शिव को समर्पित है और माघ पूर्णिमा पर यहाँ विशेष पूजा होती है।

8. संत मावजी महाराज कौन थे?

उत्तर: संत मावजी महाराज एक महान संत और समाज सुधारक थे, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। उन्होंने धार्मिक भक्ति को बढ़ावा दिया और समाज में समरसता स्थापित की।

9. संत मावजी महाराज की शिक्षाएँ क्या थीं?

उत्तर: उनकी शिक्षाएँ सदाचार, भक्ति, प्रेम और समाज सुधार पर आधारित थीं। वे भेदभाव के विरोधी थे और समाज में समानता का संदेश देते थे।

10. राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

  • बेणेश्वर धाम, डूंगरपुर
  • मेहंदीपुर बालाजी, दौसा
  • खाटू श्यामजी, सीकर
  • पुष्कर ब्रह्मा मंदिर, अजमेर
  • रणकपुर जैन मंदिर, पाली

11. बेणेश्वर धाम मेला कब लगता है?

उत्तर: हर साल माघ शुक्ल एकादशी से माघ पूर्णिमा तक (फरवरी में) बेणेश्वर धाम मेला आयोजित होता है।

12. बेणेश्वर मेला राजस्थान 2025 की तारीखें क्या हैं?

उत्तर: 8 फरवरी से 12 फरवरी 2025 तक मेला आयोजित किया जाएगा। मुख्य स्नान 12 फरवरी को होगा।

13. बेणेश्वर मेला कहाँ लगता है?

उत्तर: राजस्थान के डूंगरपुर जिले में त्रिवेणी संगम पर बेणेश्वर मेला लगता है।

14. बेणेश्वर धाम स्नान का महत्व क्या है?

उत्तर: माघ पूर्णिमा के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है और यह पुण्यदायी होता है।

15. माघ पूर्णिमा 2025 बेणेश्वर धाम स्नान कब है?

उत्तर: 12 फरवरी 2025 को माघ पूर्णिमा का मुख्य स्नान होगा।

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16. राजस्थान का प्रमुख धार्मिक मेला कौन-सा है?

उत्तर: बेणेश्वर मेला राजस्थान के सबसे प्रमुख धार्मिक मेलों में से एक है, जिसे “जनजातीय कुंभ” भी कहा जाता है।

17. वागड़ क्षेत्र का प्रयाग कौनसा है?

उत्तर: बेणेश्वर धाम को ‘वागड़ का प्रयाग’ कहा जाता है क्योंकि यह तीन नदियों (सोम, माही, जाखम) के संगम पर स्थित है।

18. राजस्थान के जनजातीय मेले कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

  • बेणेश्वर मेला, डूंगरपुर
  • गवरी उत्सव, उदयपुर
  • माउंट आबू कार्तिक मेला
  • काशी विश्वनाथ मेला, बाँसवाड़ा

19. बेणेश्वर धाम कैसे पहुँचे?

उत्तर:

  • नजदीकी रेलवे स्टेशन: डूंगरपुर रेलवे स्टेशन (45 किमी)
  • नजदीकी हवाई अड्डा: उदयपुर (123 किमी)
  • बस मार्ग: उदयपुर, डूंगरपुर से बस सेवा उपलब्ध
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20. बेणेश्वर धाम यात्रा के टिप्स क्या हैं?

उत्तर:

  • माघ पूर्णिमा के समय यहाँ भीड़ होती है, तो पहले से योजना बनाएँ।
  • त्रिवेणी संगम स्नान का विशेष महत्व है, सुबह जल्दी स्नान करें।
  • स्थानीय संस्कृति और भील आदिवासी परंपरा को समझने का मौका मिलेगा।
  • धार्मिक गतिविधियों में भाग लें और स्थानीय भोजन का आनंद लें।

डॉ. दीपक आचार्य
पूर्व संयुक्त निदेशक
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, राजस्थान
35, महालक्ष्मी चौक, बांसवाड़ा – 327001

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जयवर्द्धन न्यूज डेस्क टीम। पांच से 15 वर्ष तक पत्रकारिता के अनुभवी एक्सपर्ट शामिल है, जो प्रत्येक कंटेंट का गहन अवलोकन के बाद मौजूदा स्थिति के अनुसार बेहतर, निष्पक्ष, सारगर्भित व पठनीय कंटेंट तैयार करते हैं। Jaivardhan News Desk Team

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राजसमंद जिले में केलवाड़ा थाना क्षेत्र के दादर का भीलवाड़ा (कड़िया) गांव के एक मकान में महिला की अधजली लाश मिलने से सनसनी फैल गई। केलवाड़ा थाना पुलिस के बाद बुधवार दोपहर बाद उदयपुर से फोरेंसिक टीम व राजसमंद से एमओबी टीम ने घटना स्थल का मुआयना किया। महिला के पिता ने हत्या की रिपोर्ट दी। कमरे में कपड़ो व बिस्तर में लाश जलते मिली और धुआं उठता देख ग्रामवासी पहुंचे तो घटना का पता चला। पुष्पा (40) पत्नी हिम्मतलाल नंगारची का शव किराए के कमरे में जलता हुआ मिला। सूचना पर केलवाड़ा थाना प्रभारी मनमंथसिंह मौके पर पहुंचे।
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