
Depression Hair Eating Disorder : राजस्थान के बाड़मेर जिले से एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला चिकित्सा मामला सामने आया है। यहां 20 वर्षीय एक युवती मानसिक तनाव और डिप्रेशन के कारण पिछले करीब दो वर्षों से अनजाने में अपने सिर के बाल तोड़कर निगल रही थी। परिवार को इस आदत की भनक तक नहीं लगी।
समय बीतने के साथ निगले गए बाल उसके पेट में जमा होते गए और धीरे-धीरे एक विशाल ठोस गुच्छे का रूप ले लिया। हालत इतनी गंभीर हो गई कि युवती का वजन लगभग 20 किलोग्राम घटकर मात्र 25 किलोग्राम रह गया। लगातार पेट दर्द, भूख न लगना, कमजोरी और पेट में सूजन जैसी समस्याओं के बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में पेट में गांठ होने की आशंका जताई गई, जिसके बाद उसे जोधपुर एम्स रेफर किया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया कि युवती के पेट में 62 सेंटीमीटर लंबा बालों का गुच्छा (Gastric Trichobezoar) मौजूद है, जो छोटी आंत तक फैल चुका था। डॉक्टरों की टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद इस बालों के गुच्छे को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। फिलहाल युवती स्वस्थ है और अस्पताल से छुट्टी देकर उसे मानसिक स्वास्थ्य उपचार की भी सलाह दी गई है। डॉक्टरों के अनुसार युवती लंबे समय से मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही थी। इसी दौरान उसे अपने सिर के बाल तोड़कर निगलने की आदत पड़ गई। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे करीब दो वर्षों तक चलती रही, लेकिन परिवार के किसी सदस्य को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। चूंकि इंसानी बाल पचते नहीं हैं, इसलिए वे पेट में जमा होते गए और अंततः एक बड़े ठोस गुच्छे में बदल गए।
अचानक तेजी से घटने लगा वजन
Trichotillomania Case परिजनों ने बताया कि कुछ समय से युवती का वजन लगातार कम हो रहा था। उसका वजन लगभग 20 किलोग्राम घटकर केवल 25 किलोग्राम रह गया था। इसके साथ ही उसे—
- लगातार पेट दर्द,
- भूख न लगना,
- कमजोरी,
- पेट फूलना,
- और खून की कमी जैसी समस्याएं भी होने लगी थीं।
स्थिति बिगड़ने पर उसे बाड़मेर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पहले पेट में गांठ का हुआ संदेह
Trichobezoar Surgery बाड़मेर अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को युवती के पेट में एक बड़ी गांठ होने का संदेह हुआ। मामला जटिल होने के कारण उसे तुरंत एम्स जोधपुर रेफर कर दिया गया। एम्स में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एंडोस्कोपी और अन्य जांचें कीं। जांच रिपोर्ट आने पर पता चला कि पेट में गांठ नहीं, बल्कि बालों का एक विशाल गुच्छा मौजूद है।
एम्स जोधपुर के सर्जन डॉ. महेंद्र लोढ़ा ने बताया कि युवती के पेट में मौजूद बालों का गुच्छा पेट से आगे बढ़कर छोटी आंत के शुरुआती हिस्से (Proximal Jejunum) तक पहुंच चुका था। करीब डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक 62 सेंटीमीटर लंबा बालों का गुच्छा बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिन निगरानी में रखने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
क्या है गैस्ट्रिक ट्राइकोबेजोअर?
Rapunzel Syndrome डॉक्टरों के अनुसार पेट में बालों के जमा होकर ठोस गुच्छा बनने की स्थिति को गैस्ट्रिक ट्राइकोबेजोअर (Gastric Trichobezoar) कहा जाता है। चूंकि बाल पाचन तंत्र में नहीं पचते, इसलिए वे धीरे-धीरे पेट में जमा होते रहते हैं और समय के साथ बड़ी गांठ का रूप ले लेते हैं।
डॉ. लोढ़ा ने बताया कि जब बालों का यह गुच्छा पेट से आगे बढ़कर छोटी आंत तक पहुंच जाता है, तो इस स्थिति को रैपुंजेल सिंड्रोम (Rapunzel Syndrome) कहा जाता है। यह एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 100 से 1000 मामलों में किसी एक मरीज में देखने को मिलती है।
ट्राइकोटिलोमेनिया क्या है?
Mental Health Disorder विशेषज्ञों के अनुसार युवती ट्राइकोटिलोमेनिया (Trichotillomania) नामक मानसिक स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित थी। इस बीमारी में व्यक्ति बार-बार अपने बाल तोड़ता है। कुछ मरीजों में यह आदत आगे बढ़कर बाल निगलने (Trichophagia) तक पहुंच जाती है। लंबे समय तक ऐसा करने पर बाल पेट में जमा होकर गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं।
किन लक्षणों को नहीं करें नजरअंदाज
यदि किसी व्यक्ति में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए—
- लगातार पेट दर्द
- बिना कारण वजन कम होना
- भूख न लगना
- बार-बार उल्टी
- पेट में गांठ या सूजन महसूस होना
- लगातार कमजोरी और एनीमिया
ऐसे मामलों में समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी होता है।
ऑपरेशन टीम में शामिल रहे ये विशेषज्ञ
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में एम्स जोधपुर की विशेषज्ञ टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऑपरेशन टीम में शामिल प्रमुख चिकित्सक—
- डॉ. महेंद्र लोढ़ा (सर्जन)
- डॉ. भारत (एनेस्थेटिस्ट)
- डॉ. तेजपाल
- डॉ. वैशाली
- डॉ. गदाधर
- डॉ. प्रशांत
- डॉ. निशांत
- डॉ. साहिल जैन
- डॉ. ध्रुव रोहेला
इसके अलावा नर्सिंग ऑफिसर गजानंद और कोमल ने भी ऑपरेशन एवं मरीज की देखभाल में अहम योगदान दिया।
मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि डिप्रेशन, चिंता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समय रहते पहचानना और उनका इलाज कराना बेहद जरूरी है। कई बार मानसिक बीमारियां असामान्य व्यवहार का कारण बनती हैं, जो आगे चलकर गंभीर शारीरिक जटिलताओं में बदल सकती हैं। यदि परिवार के किसी सदस्य के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।



