
राजसमंद/पाली: Desuri nal dangerous road : राजसमंद जिले के झीलवाड़ा से पाली जिले के देसूरी तक फैली देसूरी नाल आज भी राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़े खतरे का पर्याय बनी हुई है। करीब 16 किलोमीटर लंबे इस घाटी मार्ग में 14 ऐसे खतरनाक मोड़ हैं, जहां हर पल हादसे का डर बना रहता है। वाहन पलटने, फिसलने, आमने-सामने टकराने या गहरी खाई में गिरने का जोखिम यहां लगातार मंडराता रहता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह मार्ग राज्य मेगा हाईवे-16 का हिस्सा है, लेकिन जमीनी हकीकत मानकों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। नियमों के अनुसार यहां सड़क करीब 30 फीट चौड़ी होनी चाहिए और उसके साथ 6 फीट की सुरक्षित पगडंडी भी होनी चाहिए, ताकि पैदल चलने वालों को राहत मिल सके। लेकिन देसूरी नाल में न तो पगडंडी है और न ही सड़क निर्धारित चौड़ाई के अनुसार बनी हुई है। कई जगह सड़क की चौड़ाई केवल 10 से 12 फीट तक सिमट जाती है। ऐसे में पैदल यात्रियों के पास मुख्य सड़क पर चलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।
14 घातक मोड़ों पर हर समय हादसे का खतरा
desuri nal rajsamand pali road : जानकारी के अनुसार झीलवाड़ा से देसूरी तक फैले इस घाटी क्षेत्र में कुल 14 खतरनाक मोड़ हैं। इनमें से 11 मोड़ राजसमंद जिले की सीमा में आते हैं, जबकि 3 मोड़ पाली जिले की सीमा में स्थित हैं। सड़क टेढ़ी-मेढ़ी, ढलानदार और बेहद संकरी है। कई स्थानों पर सड़क किनारे बनी 3 से 4 फीट चौड़ी सुरक्षा दीवारों के कारण रास्ता और भी सिमट गया है। ऊपर से तीखे मोड़ और खतरनाक ढलान इस मार्ग को और ज्यादा जोखिमपूर्ण बना देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस सड़क पर रोड इंजीनियरिंग की कई गंभीर कमियां हैं। ढलान का संतुलन, मोड़ों की तीक्ष्णता, पर्याप्त चौड़ाई की कमी और सुरक्षा प्रबंधों की लापरवाही इसे सामान्य घाटी मार्ग से कहीं अधिक खतरनाक बना देती है।

सुरक्षा दीवारें टूटीं, कई जगह तो हैं ही नहीं
desuri valley accident : देसूरी नाल से गुजरने वाले लोगों के लिए एक और चिंता की बात यह है कि कई जगह सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं, लेकिन उनकी समय पर मरम्मत नहीं हो पा रही है। कुछ हिस्सों में तो सुरक्षा दीवारें बनी ही नहीं थीं, और अब नई दीवार बनाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। बरसात के मौसम में हालात और भयावह हो जाते हैं। ऊंचे पहाड़ों से चट्टानें टूटकर सड़क पर गिर जाती हैं। जगह-जगह लटकती चट्टानें और संकरे मोड़ वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार सड़क पर गिरे पत्थरों और क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाने का काम तो हो जाता है, लेकिन व्यापक सुधार के लिए जरूरी स्थायी कार्य अब भी अधूरे हैं।
वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र होने से अटका विकास कार्य
rajasthan dangerous ghat road : देसूरी नाल का बड़ा हिस्सा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से होकर गुजरता है। यही कारण है कि यहां सड़क चौड़ी करने, नई सुरक्षा दीवार बनाने या बड़े स्तर पर निर्माण कार्य करने में प्रशासनिक और पर्यावरणीय अनुमति बड़ी बाधा बन जाती है। वन विभाग की मंजूरी के बिना सड़क पर बड़ा सुधार कार्य नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि वर्षों से इस मार्ग की खतरनाक स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि जब तक इस मार्ग के लिए विशेष योजना बनाकर स्थायी समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक हादसों का सिलसिला थमना मुश्किल है।
दूसरा रास्ता भी राहत नहीं, उससे भी ज्यादा खतरनाक
desuri nal death curve : राजसमंद से पाली जाने के लिए देसूरी नाल मुख्य मार्ग माना जाता है। लेकिन यदि इस सड़क को छोड़कर दूसरे रास्तों की बात करें तो हालात वहां भी बेहतर नहीं हैं। कामलीघाट चौराहे से होकर सीरियारी जाने वाला दूसरा मार्ग इससे भी ज्यादा खतरनाक बताया जाता है। यह एक ग्रामीण सड़क है, जिसकी चौड़ाई मात्र 8 से 10 फीट तक है। इस रास्ते के किनारे भी 100 से 150 फीट तक गहरी खाइयां हैं। ऐसे में भारी वाहनों का ट्रैफिक यहां मोड़ना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता। तीसरा रास्ता भीम से ब्यावर होकर जाता है, लेकिन यह मार्ग 200 से 250 किलोमीटर तक लंबा पड़ता है। इस वजह से ज्यादातर वाहनों को देसूरी नाल से होकर ही गुजरना पड़ता है।
एसिड टैंकर हादसे के बाद बनी थी विशेष जांच टीम
देसूरी नाल की खतरनाक स्थिति एक बार फिर उस समय चर्चा में आई थी, जब 23 अगस्त को एसिड से भरा एक टैंकर पलट गया था और कार सवार 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया और तीन जिलों की विशेष टीम ने मौके का निरीक्षण किया। इस टीम में उदयपुर, राजसमंद और पाली के परिवहन, पुलिस और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी शामिल थे। टीम ने करीब 6 घंटे तक 16 किलोमीटर लंबे देसूरी नाल क्षेत्र का निरीक्षण किया और इसकी भौतिक स्थिति का आकलन किया। इसके बाद एक विस्तृत जमीनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजी गई।
राजस्थान में मौत की घाटी के रूप में कुख्यात है देसूरी नाल
देसूरी-चारभुजा के बीच फैला यह घाटी क्षेत्र लंबे समय से हादसों की वजह से बदनाम रहा है। कई लोग इसे राजस्थान की मौत की घाटी तक कहते हैं। चारभुजा से देसूरी की ओर आने वाले इस मार्ग में एस और एल आकार के खतरनाक मोड़ हैं। सड़क का निर्माण वर्ष 1952 में हुआ था। उसके बाद समय-समय पर मरम्मत होती रही, लेकिन सड़क की चौड़ाई बढ़ाने का काम प्रभावी तरीके से नहीं हो पाया। कई हिस्सों में सड़क की चौड़ाई 5.50 मीटर से भी कम है। वहीं सड़क किनारे 40 से 50 फीट तक गहरी खाई मौजूद है। घाटी में बने संकरे पुल और तीखी ढलान इस पूरे रास्ते को और भी घातक बना देते हैं।
2007 का हादसा आज भी लोगों को दहला देता है
देसूरी नाल का सबसे भयावह हादसा 7 सितंबर 2007 को हुआ था। उस दिन रामदेवरा जा रहे जातरुओं से भरा एक ट्रक ब्रेक फेल होने के बाद खाई में जा गिरा था। इस हादसे में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा आज भी इस घाटी के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय माना जाता है। इसके बाद भी यहां हादसे रुक नहीं पाए और समय-समय पर बस, ट्रक, टैंकर, कार और ट्रैक्टर-ट्रॉली दुर्घटनाग्रस्त होते रहे हैं। देसूरी नाल संघर्ष समिति का दावा है कि इस घाटी में अब तक एक हजार से ज्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा चुके हैं।

देसूरी नाल में हुए कुछ बड़े हादसे
इस घाटी में कई वर्षों से लगातार दर्दनाक हादसे दर्ज होते रहे हैं। इनमें कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
- 7 सितंबर 2007 – रामदेवरा जातरुओं का ट्रक पलटा, लगभग 100 लोगों की मौत
- 28 मार्च 2013 – टैंकर पलटने से चालक की मौत
- 20 मार्च 2014 – कार पलटी, 8 यात्री घायल
- 13 दिसंबर 2014 – ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से 7 लोगों की मौत
- 28 मई 2015 – रोडवेज बस पलटी, कई यात्री घायल
- 30 अक्टूबर 2015 – बस की टक्कर में 49 लोग घायल
- 7 अक्टूबर 2016 – डंपर के ब्रेक फेल, चालक फंसा
- 29 जून 2017 – बस पलटी, एक महिला की मौत, 24 घायल
- 23 अगस्त 2019 – एसिड टैंकर वैन पर पलटा, 9 लोगों की मौत
- 12 अप्रैल 2023 – रोडवेज बस दुर्घटनाग्रस्त, 10 लोग घायल
- 5 सितंबर 2023 – निजी बस पलटी, 23 यात्री घायल
इन हादसों की लंबी सूची इस बात का सबूत है कि देसूरी नाल केवल एक सड़क नहीं, बल्कि लापरवाही और अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर की गंभीर चेतावनी बन चुकी है।
कई हादसों के बाद जगी उम्मीद
desuri nal skyway project : कई सालों के संघर्ष, लगातार हादसों और स्थानीय लोगों की मांग के बाद अब देसूरी नाल के लिए एक नई उम्मीद जगी है। मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाला पाली-नाडोल-देसूरी-चारभुजा मार्ग अब केवल फोरलेन सड़क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देसूरी नाल के सबसे जोखिमपूर्ण हिस्से में करीब 9 किलोमीटर लंबा स्काई-वे बनाने की योजना भी तैयार की गई है। 83 किलोमीटर लंबे NH-162E सेक्शन की डीपीआर बनाकर केंद्रीय सड़क मंत्रालय को भेज दी गई है। इस डीपीआर को तैयार करने पर 2.58 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जबकि पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1800 से 2000 करोड़ रुपए के बीच बताई जा रही है। योजना में 9 नए बाईपास और कई री-अलाइनमेंट भी शामिल हैं, ताकि ट्रैफिक को आबादी वाले क्षेत्रों से बाहर निकाला जा सके और देसूरी नाल जैसे खतरनाक हिस्सों में हादसों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। यदि यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है, तो देसूरी नाल में हर वक्त मंडराते हादसों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।



