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FMCG products price hike : अब खाना-पीना और नहाना भी पड़ेगा महंगा! कंपनियों ने दिए बड़े संकेत

Parmeshwar Singh Chundwat May 28, 2026 1 minute read

FMCG products price hike : देशभर में महंगाई का असर अब रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों पर और ज्यादा दिखाई देने वाला है। आने वाले दिनों में खाने-पीने के सामान, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स और घरेलू उपयोग की कई वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इसकी वजह कंपनियों पर बढ़ती कच्चे माल की लागत और पैकेजिंग खर्च का लगातार बढ़ना बताया जा रहा है। सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां इन बढ़ती लागतों का बोझ अब ग्राहकों पर डाल सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ महीनों में रॉ मटीरियल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे एफएमसीजी कंपनियों के लिए पुराने दामों पर सामान बेचना मुश्किल होता जा रहा है। यही कारण है कि कई कंपनियों ने हाल ही में अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं और आने वाले समय में यह बढ़ोतरी और तेज हो सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अलग-अलग श्रेणियों की कंपनियों ने पिछले एक-दो महीनों के दौरान अपने उत्पादों की कीमतों में औसतन 3 प्रतिशत से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इसकी मुख्य वजह कच्चे माल और पैकेजिंग कॉस्ट में तेजी से हुआ इजाफा है। विशेषज्ञों के अनुसार कंपनियों की कुल रॉ मटीरियल बास्केट की लागत करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। इसका सीधा असर प्रोडक्ट्स की कीमतों और कंपनियों के मुनाफे पर दिखाई दे रहा है। कई कंपनियां अभी नुकसान से बचने के लिए सीमित स्तर पर दाम बढ़ा रही हैं, लेकिन यदि लागत में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

रिटेल महंगाई में फिर बढ़ोतरी

Personal care products price increase : देश में खुदरा महंगाई दर यानी रिटेल इन्फ्लेशन भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। अप्रैल महीने में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.40 प्रतिशत थी। आंकड़ों के अनुसार महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में आई तेजी है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.87 प्रतिशत थी। इससे साफ है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसका असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।

कंपनियां अपना सकती हैं ‘ग्रामेज कट’ का तरीका

Daily use items becoming expensive : महंगाई के दबाव से बचने के लिए कंपनियां केवल कीमतें ही नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि कई उत्पादों के पैकेट का वजन भी कम कर सकती हैं। इसे ‘ग्रामेज कट’ या ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है। इस प्रक्रिया में कंपनियां किसी प्रोडक्ट की कीमत पहले जैसी ही रखती हैं, लेकिन उसके अंदर मिलने वाले सामान की मात्रा कम कर देती हैं। उदाहरण के तौर पर पहले जहां किसी पैकेट में 1 किलो सामान मिलता था, वहीं अब उसी कीमत में 900 ग्राम या उससे कम प्रोडक्ट दिया जा सकता है। इससे ग्राहकों को तुरंत कीमत बढ़ने का एहसास नहीं होता, जबकि कंपनियां अपना मुनाफा बचाने में सफल रहती हैं।

पैकेजिंग मटीरियल और तेल की कीमतों में भारी उछाल

Raw material cost impact on FMCG : रिपोर्ट के अनुसार कुछ प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में बेहद तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासकर पैकेजिंग इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले HDPE प्लास्टिक की कीमतें करीब 56 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इसी प्लास्टिक का उपयोग शैम्पू की बोतलों, डिटर्जेंट कंटेनरों और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में किया जाता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी करीब 32 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पाम ऑयल के दामों में भी लगभग 11 प्रतिशत की तेजी आई है। इन दोनों चीजों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में एफएमसीजी और खाद्य उत्पादों में होता है, इसलिए इनके महंगे होने का असर सीधे बाजार पर पड़ रहा है।

कंपनियों के मुनाफे पर दिखने लगा असर

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर अब बड़ी कंपनियों के वित्तीय परिणामों में भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च तिमाही यानी Q4FY26 में कई बड़ी कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई। सालाना आधार पर कंपनियों का मार्जिन करीब 0.50 प्रतिशत तक घटा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लागत में यह बढ़ोतरी जारी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में इसका और बड़ा असर देखने को मिल सकता है। हालांकि कंपनियां लगातार दाम बढ़ाकर अपने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन महंगाई का दबाव इतना ज्यादा है कि आने वाले समय में कंपनियों के कुल मुनाफे पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

महंगाई का असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। खाने-पीने की चीजों, साबुन, शैम्पू, तेल, डिटर्जेंट और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं के दाम बढ़ने से परिवारों का मासिक बजट बिगड़ सकता है। पहले ही पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और दूध जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में यदि एफएमसीजी उत्पाद भी महंगे होते हैं, तो मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए खर्च संभालना और मुश्किल हो सकता है।

खपत घटने की भी आशंका

Inflation impact on consumer goods : रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगातार बढ़ती महंगाई का असर बाजार की कुल बिक्री पर पड़ सकता है। जब चीजें महंगी होती हैं तो लोग जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करते हैं, जिससे कंपनियों की बिक्री कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई इसी तरह बनी रही तो आने वाले महीनों में कंजम्पशन वॉल्यूम यानी सामान की कुल खपत में गिरावट देखने को मिल सकती है। इसका असर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर भी पड़ सकता है।

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क्या है ‘श्रिंकफ्लेशन’?

आर्थिक भाषा में ‘श्रिंकफ्लेशन’ उस स्थिति को कहा जाता है जब कंपनियां किसी प्रोडक्ट की कीमत तो वही रखती हैं, लेकिन उसके पैकेट का वजन या मात्रा कम कर देती हैं। कंपनियां ऐसा इसलिए करती हैं ताकि ग्राहकों को सीधे तौर पर कीमत बढ़ने का झटका न लगे और उनका प्रॉफिट मार्जिन भी सुरक्षित बना रहे। हाल के वर्षों में कई कंपनियां इस रणनीति का इस्तेमाल करती नजर आई हैं। अब बढ़ती महंगाई के बीच फिर से इस ट्रेंड के बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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