
Petrol diesel latest rates : देशभर में लगातार बढ़ रही पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डालना शुरू कर दिया है। रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ अब यात्रा करना भी पहले से महंगा होता जा रहा है। 28 मई 2026, गुरुवार को जारी ताजा रेट्स के अनुसार देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल ऊंचे स्तर पर बिक रहे हैं। पिछले करीब दो हफ्तों में तेल कंपनियां कई बार दाम बढ़ा चुकी हैं, जिससे आम आदमी का मासिक बजट पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत में भी ईंधन के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब इसकी कीमत 97.24 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति बनी रहती है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते 13 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस दौरान तेल कंपनियों ने चार अलग-अलग बार कीमतों में इजाफा किया। राजधानी दिल्ली में जहां कुछ समय पहले पेट्रोल 94 से 95 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा था, वहीं अब इसकी कीमत 102 रुपये के पार पहुंच गई है। डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल देखा गया है। तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव परिवहन, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। कई शहरों में ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियां, राशन और अन्य जरूरी सामानों के दाम भी बढ़ने लगे हैं।
आखिर क्यों लगातार बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
Fuel price hike today : विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा असर यहां के उपभोक्ताओं पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी ईंधन आयात को महंगा बना रही है। जब रुपया कमजोर होता है तो भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ता है, जिसका असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में दिखाई देता है।

28 मई 2026: आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
| राज्य / शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.14 | 94.28 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| जयपुर | 113.91 | 99.52 |
| कोलकाता | 105.63 | 96.45 |
| चेन्नई | 104.98 | 96.12 |
| नोएडा | 99.84 | 91.12 |
| गुरुग्राम | 100.45 | 92.08 |
| पटना | 110.34 | 96.89 |
| लखनऊ | 101.22 | 93.41 |
| अहमदाबाद | 99.92 | 94.16 |
दिल्ली-NCR में लोगों की बढ़ी परेशानी
Crude oil price increase impact : दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में लाखों लोग रोजाना निजी वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने लोगों के घरेलू बजट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों से लेकर ऑटो और टैक्सी चालकों तक सभी पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। कैब और ऑटो ड्राइवरों का कहना है कि पहले जहां कमाई का बड़ा हिस्सा बच जाता था, वहीं अब ज्यादातर पैसा पेट्रोल और डीजल भरवाने में ही खर्च हो रहा है। कई लोगों ने अब अनावश्यक यात्रा कम करना शुरू कर दिया है।
मुंबई और पटना में सबसे ज्यादा दबाव
Rajasthan Petrol price today : मुंबई और पटना जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमतें पहले ही 110 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी हैं। इन शहरों में लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर अब बाजारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से केवल वाहन चलाना ही महंगा नहीं होता, बल्कि इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर निर्माण सामग्री तक के दाम बढ़ सकते हैं।
आम आदमी का बिगड़ता जा रहा बजट
Latest petrol diesel price list 2026 : पिछले कुछ दिनों में सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि रसोई गैस, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा परिवारों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग अब अपने खर्चों में कटौती करने को मजबूर हो रहे हैं। अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं। फिलहाल आम जनता की नजरें तेल कंपनियों और सरकार के अगले फैसलों पर टिकी हुई हैं।



