
Government bank latest news : अगर आपका बैंक खाता किसी सरकारी बैंक में है, तो यह खबर आपके लिए राहत देने वाली साबित हो सकती है। देश के सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति अब पहले के मुकाबले काफी मजबूत होती दिखाई दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी PSBs ने कई सालों का सबसे कम लोन राइट-ऑफ दर्ज किया है। आसान भाषा में समझें तो बैंकों का डूबने वाला पैसा अब कम हो रहा है और फंसे हुए कर्ज की वसूली पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से की जा रही है।
इस बदलाव का सीधा असर आम खाताधारकों पर भी पड़ने वाला है। बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इससे सरकारी बैंकों में लोगों का भरोसा और मजबूत होगा और बैंकिंग व्यवस्था पहले से ज्यादा सुरक्षित बनेगी।
आखिर क्या होता है ‘राइट-ऑफ’?
PSU banks news India 2026 : बैंकिंग की भाषा में ‘राइट-ऑफ’ का मतलब होता है ऐसे कर्ज को बट्टे खाते में डाल देना, जिसकी वसूली की उम्मीद बेहद कम हो। जब कोई ग्राहक लंबे समय तक लोन नहीं चुकाता और बैंक को लगता है कि यह पैसा वापस मिलना मुश्किल है, तब बैंक उस राशि को अपनी बैलेंस शीट से हटाकर राइट-ऑफ कर देता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं होता कि बैंक पैसा वसूलने की कोशिश बंद कर देता है। बैंक बाद में भी रिकवरी प्रक्रिया जारी रखता है। लेकिन बैलेंस शीट को साफ और पारदर्शी दिखाने के लिए यह कदम उठाया जाता है।
कई वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा राइट-ऑफ
Bank of Baroda latest news : PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक और अन्य बड़े सरकारी बैंकों ने इस वित्त वर्ष में पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे कम लोन राइट-ऑफ किए हैं। यह संकेत देता है कि अब बैंकों की लोन रिकवरी व्यवस्था मजबूत हुई है और नए खराब कर्ज यानी NPA बनने के मामले भी कम हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक माना जा रहा है।
आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा?
Government banks profit 2026 : सरकारी बैंकों की स्थिति मजबूत होने का सबसे बड़ा फायदा आम खाताधारकों को मिलेगा। जब बैंकों का पैसा कम डूबेगा और उनकी रिकवरी बेहतर होगी, तब आपकी जमा राशि भी पहले से ज्यादा सुरक्षित मानी जाएगी।
इसके अलावा मजबूत बैंकिंग व्यवस्था का असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बैंक बेहतर स्थिति में होंगे तो वे ज्यादा लोन दे पाएंगे, उद्योगों को मदद मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे टैक्सपेयर्स पर भी बोझ कम होगा, क्योंकि सरकार को बैंकों को बचाने के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता कम देनी पड़ेगी।

क्यों सुधरी सरकारी बैंकों की हालत?
Safe money in government banks : बैंकिंग सेक्टर में सुधार की सबसे बड़ी वजह नए खराब कर्जों में कमी मानी जा रही है। पहले जहां बड़ी संख्या में लोन NPA बन जाते थे, अब बैंकों ने लोन मॉनिटरिंग और रिकवरी सिस्टम को काफी मजबूत कर लिया है। ICRA के वाइस प्रेसिडेंट सचिन सचदेवा के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सरकारी बैंकों ने रिकवरी के नए और प्रभावी तरीके अपनाए हैं। इसी कारण पुराने फंसे हुए पैसे की वसूली तेज हुई है और नए खराब कर्ज बनने की दर घटी है। उन्होंने कहा कि बैंक अब केवल खाते साफ करने पर नहीं, बल्कि वास्तविक रिकवरी और समाधान पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
किस बैंक ने कितना राइट-ऑफ किया?
आंकड़ों के अनुसार:
- बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस साल करीब 6,330 करोड़ रुपए का राइट-ऑफ किया, जो 2018 के बाद सबसे कम है।
- बैंक ऑफ इंडिया का राइट-ऑफ घटकर 5,735 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो 2016 के बाद का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है।
- इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक की स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 1,718 करोड़ रुपए का राइट-ऑफ किया, जो 2022 के बाद सबसे कम बताया जा रहा है।
ये आंकड़े बताते हैं कि सरकारी बैंक अब पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क और मजबूत वित्तीय प्रबंधन की दिशा में काम कर रहे हैं।
ग्रॉस NPA भी ऐतिहासिक रूप से कम
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक सरकारी बैंकों का ग्रॉस NPA यानी कुल फंसा हुआ कर्ज घटकर 1.93 प्रतिशत पर आ गया है।
यह पिछले कई वर्षों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय सरकारी बैंक अब धीरे-धीरे खराब कर्जों की समस्या से बाहर निकल रहे हैं।
रिकॉर्ड मुनाफे में पहुंचे सरकारी बैंक
कम राइट-ऑफ और बेहतर रिकवरी का असर बैंकों के मुनाफे पर भी साफ दिखाई दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों का कुल शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
यह लगातार चौथा साल है जब सरकारी बैंकों ने शानदार मुनाफा दर्ज किया है।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत बैलेंस शीट और कम NPA की वजह से आने वाले समय में सरकारी बैंक और ज्यादा स्थिर हो सकते हैं।
ग्राहकों के लिए क्या संकेत हैं?
अगर आपका खाता किसी सरकारी बैंक में है, तो यह स्थिति आपके लिए सकारात्मक मानी जा सकती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था का मतलब है:
- आपकी जमा राशि ज्यादा सुरक्षित होगी
- बैंकिंग सेवाएं बेहतर हो सकती हैं
- लोन मिलने की प्रक्रिया आसान हो सकती है
- ब्याज और वित्तीय सेवाओं में स्थिरता देखने को मिल सकती है
- अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा
बैंकिंग सेक्टर में बढ़ रहा भरोसा
एक समय ऐसा था जब सरकारी बैंकों के बढ़ते NPA और घाटे को लेकर लगातार चिंता जताई जाती थी। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। रिकवरी सिस्टम में सुधार, डिजिटल मॉनिटरिंग और सख्त लोन प्रबंधन की वजह से सरकारी बैंक फिर से मजबूती की ओर लौट रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो आने वाले वर्षों में भारतीय बैंकिंग सेक्टर और मजबूत होकर उभर सकता है।



