
Ravindra Singh Bhati biography : राजस्थान की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जिस युवा नेता ने सबसे तेजी से अपनी अलग पहचान बनाई है, उनमें रविंद्र सिंह भाटी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। छात्र राजनीति से निकलकर निर्दलीय विधायक बनने तक का उनका सफर लगातार चर्चा में रहा है। बिना किसी बड़े राजनीतिक परिवार और मजबूत राजनीतिक समर्थन के उन्होंने अपनी लोकप्रियता के दम पर राजनीति में अलग मुकाम हासिल किया।
Ravindra Singh Bhati Family : रविंद्र सिंह भाटी वर्तमान में राजस्थान के बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक हैं। वे युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय माने जाते हैं और सोशल मीडिया से लेकर जमीनी राजनीति तक उनकी मजबूत पकड़ दिखाई देती है। रविंद्र सिंह भाटी का जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के दुधोड़ा गांव में एक राजपूत परिवार में हुआ था। अधिकांश स्रोतों के अनुसार उनका जन्म 3 दिसंबर 1997 को माना जाता है, हालांकि कुछ जगहों पर जन्मतिथि और वर्ष अलग-अलग दर्ज हैं। उनके पिता शैतान सिंह भाटी पेशे से स्कूल शिक्षक हैं, जबकि माता अशोक कंवर गृहिणी हैं। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े रविंद्र सिंह भाटी का शुरुआती जीवन सामान्य परिवार की तरह ही बीता। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के विद्यालयों से पूरी की। बचपन से ही उनमें नेतृत्व क्षमता दिखाई देने लगी थी।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम (Name) : | रवींद्र सिंह भाटी |
| जन्म तिथि (Date of Birth) | 3 दिसम्बर 1990 |
| पिता का नाम (Father Name) | शैतान सिंह भाटी |
| माता का नाम (Mother Name) | अशोक कंवर |
| पत्नी का नाम (Wife Name) | धनिष्ठा कंवर |
| लंबाई (Height) | 5.9 फीट |
| शिक्षा (Education) | BA – LLB |
| पेशा (Profession) | विधायक (शिव विधानसभा) |
| मोबाइल नंबर (Mobile No.) | 07742158035 |
| वर्तमान शहर (Current City) | जोधपुर, राजस्थान |
| जन्म स्थान (Birth Place) | दुधौड़ा, हरसानी, पंचायत समिति गडरारोड, जिला बाड़मेर |
| कॉलेज (College) | जय नारायण विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान |
| प्रारंभिक शिक्षा | मयूर नोबल अकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बाड़मेर |
| धर्म (Religion) | हिन्दू |
| आंखों और बालों का रंग (Eye & Hair Colour) | काला |
शिक्षा के दौरान ही राजनीति में बढ़ी रुचि

Ravindra Singh Bhati wife : रविंद्र सिंह भाटी ने जोधपुर स्थित जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) से बीए और एलएलबी की पढ़ाई की। कॉलेज जीवन के दौरान ही वे छात्र राजनीति से जुड़ गए। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय में उनकी सक्रियता और छात्रों के मुद्दों पर मुखर रवैये ने उन्हें तेजी से लोकप्रिय बना दिया।

टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़ गए चुनाव

Ravindra Singh Bhati son : वर्ष 2019 में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के दौरान रविंद्र सिंह भाटी ने अध्यक्ष पद के लिए ABVP से टिकट मांगा था, लेकिन संगठन ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उस समय बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि कोई निर्दलीय उम्मीदवार विश्वविद्यालय अध्यक्ष पद जीत पाएगा, लेकिन रविंद्र सिंह भाटी ने इतिहास रच दिया। वे JNVU के 57 साल के इतिहास में पहले निर्दलीय छात्रसंघ अध्यक्ष बने। इस जीत ने उन्हें छात्र राजनीति में बड़ा चेहरा बना दिया।
कोविड काल में आंदोलन और जेल यात्रा

छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों की फीस और अन्य समस्याओं को लेकर कई आंदोलन किए। वे लगातार प्रशासन के खिलाफ छात्रों की आवाज उठाते रहे। इसी दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन के चलते उन्हें हिरासत में भी लिया गया और जेल तक जाना पड़ा। हालांकि इन घटनाओं ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।
छात्र राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति तक
छात्र राजनीति में सफलता के बाद रविंद्र सिंह भाटी की पहचान पूरे राजस्थान में बनने लगी। इसके बाद उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संपर्क में आए और पार्टी के साथ सक्रिय दिखाई दिए। माना जा रहा था कि भाजपा उन्हें शिव विधानसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया और किसी अन्य उम्मीदवार को मैदान में उतारा, तो रविंद्र सिंह भाटी ने एक बार फिर बगावती तेवर दिखाए।
निर्दलीय लड़कर बने विधायक

भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद रविंद्र सिंह भाटी ने शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया क्योंकि उनके सामने भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के उम्मीदवार मैदान में थे। लेकिन जनता के बीच मजबूत पकड़ और युवा समर्थन के दम पर रविंद्र सिंह भाटी ने शानदार जीत हासिल की। वे शिव विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में निर्दलीय चुनाव जीतने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। खास बात यह रही कि बेहद कम उम्र में उन्होंने विधायक बनने का गौरव हासिल किया।
सबसे युवा विधायकों में शामिल
वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद रविंद्र सिंह भाटी राजस्थान विधानसभा के सबसे युवा विधायकों में शामिल हो गए। उनके समर्थकों ने इसे युवाओं की राजनीति में नई शुरुआत बताया। उनकी जीत के बाद बाड़मेर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान में जश्न का माहौल देखने को मिला था।
लोकसभा चुनाव में भी आजमाई किस्मत

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद रविंद्र सिंह भाटी ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाई। उन्होंने बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा के केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी और कांग्रेस उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल से था। रविंद्र सिंह भाटी ने चुनाव में जोरदार मुकाबला किया और लाखों वोट हासिल किए, लेकिन अंततः वे कांग्रेस उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल से हार गए। हालांकि हार के बावजूद उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
मानद डॉक्टरेट से सम्मानित
14 फरवरी 2025 को पंजाब के देश भगत विश्वविद्यालय द्वारा रविंद्र सिंह भाटी को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें युवा नेतृत्व और सामाजिक-राजनीतिक योगदान के लिए दिया गया।
विवादों में भी रहा नाम
राजनीतिक जीवन के दौरान रविंद्र सिंह भाटी कई बार विवादों में भी रहे। कोविड नियमों के उल्लंघन से जुड़े एक मामले में उदयपुर कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। हालांकि बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए निचली अदालत में पेश होकर जमानत आवेदन करने की छूट दी थी।

सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़
रविंद्र सिंह भाटी युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। उनकी सभाओं, भाषणों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। उनकी शैली पारंपरिक नेताओं से अलग मानी जाती है, यही कारण है कि युवाओं के बीच उनका बड़ा समर्थन आधार तैयार हुआ है।
परिवार और निजी जीवन
रविंद्र सिंह भाटी का परिवार सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। उनके पिता शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। कुछ स्रोतों में उनकी पत्नी का नाम धाऊ कंवर तो कुछ में धनिष्ठा कंवर बताया गया है। वे खुद को जमीन से जुड़ा नेता बताते हैं और ग्रामीण मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।
संपत्ति और आर्थिक स्थिति
Ravindra Singh Bhati Net Worth : लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दाखिल हलफनामे के अनुसार रविंद्र सिंह भाटी के पास सीमित चल संपत्ति बताई गई थी। उनके पास नगद राशि और बैंक खाते में जमा रकम का उल्लेख किया गया था, जबकि बड़ी अचल संपत्ति दर्ज नहीं थी।
युवा राजनीति का नया चेहरा
राजस्थान की राजनीति में रविंद्र सिंह भाटी को अब एक उभरते हुए युवा चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। छात्र राजनीति से निकलकर विधानसभा तक पहुंचने का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा माना जा रहा है। निर्दलीय राजनीति में लगातार सफलता हासिल करना आसान नहीं माना जाता, लेकिन रविंद्र सिंह भाटी ने अपने जनाधार और आक्रामक शैली के दम पर खुद को अलग पहचान दिलाई है।



