
Vishvaraj Singh Mewar Biography : राजस्थान की राजनीति, राजपूताना विरासत और मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा का नाम आते ही जिन चुनिंदा व्यक्तित्वों का उल्लेख होता है, उनमें विश्वराज सिंह मेवाड़ प्रमुख हैं। वे केवल एक राजपरिवार के सदस्य नहीं, बल्कि मेवाड़ की 1500 वर्षों से अधिक पुरानी विरासत के प्रतिनिधि, भारतीय जनता पार्टी के विधायक Vishvaraj Singh Mewar Family और मेवाड़ के 77वें एकलिंग दीवान के रूप में भी पहचाने जाते हैं। वर्ष 2023 में नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाने के बाद उनकी राजनीतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। वहीं नवंबर 2024 में हुए राजतिलक के बाद वे मेवाड़ की पारंपरिक विरासत के केंद्र में आ गए।
विश्वराज सिंह मेवाड़ का संक्षिप्त परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | विश्वराज सिंह मेवाड़ |
| जन्म तिथि | 18 मई 1969 |
| जन्म स्थान | उदयपुर, राजस्थान |
| पिता | महेंद्र सिंह मेवाड़ |
| माता | महारानी निरुपमा कुमारी |
| पत्नी | महिमा कुमारी मेवाड़ |
| पुत्र | देवजादित्य सिंह मेवाड़ |
| पुत्री | जयती कुमारी मेवाड़ |
| शिक्षा | मेयो कॉलेज, अजमेर एवं मुंबई |
| राजनीतिक दल | भारतीय जनता पार्टी (BJP) |
| विधानसभा क्षेत्र | नाथद्वारा |
| पद | विधायक, नाथद्वारा |
| उपाधि | मेवाड़ के 77वें एकलिंग दीवान |
जन्म और प्रारंभिक जीवन

Vishvaraj Singh Mewar father : विश्वराज सिंह मेवाड़ का जन्म 18 मई 1969 को राजस्थान के ऐतिहासिक शहर उदयपुर में हुआ। वे मेवाड़ राजवंश के प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे और बचपन से ही राजसी परंपराओं, संस्कृति तथा सामाजिक दायित्वों के वातावरण में पले-बढ़े। उनके पिता महेंद्र सिंह मेवाड़ मेवाड़ राजपरिवार के प्रमुख सदस्यों में से एक थे। वहीं उनकी माता निरुपमा कुमारी टिहरी गढ़वाल राजपरिवार से संबंध रखती हैं। राजसी परिवार में जन्म लेने के बावजूद विश्वराज सिंह का पालन-पोषण आधुनिक शिक्षा और सामाजिक मूल्यों के साथ हुआ।

मेवाड़ राजवंश की गौरवशाली विरासत
विश्वराज सिंह मेवाड़ का नाम केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसे राजवंश से जुड़ा है जिसकी पहचान भारत ही नहीं बल्कि विश्व के सबसे प्राचीन जीवित राजवंशों में होती है।
मेवाड़ का इतिहास लगभग 1500 वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है।
इस राजवंश के कुछ महान शासक:
- बाप्पा रावल
- महाराणा कुम्भा
- महाराणा सांगा
- महाराणा प्रताप
- महाराणा भगवत सिंह मेवाड़
महाराणा प्रताप की वीरता और हल्दीघाटी के युद्ध ने मेवाड़ को विश्व इतिहास में विशेष स्थान दिलाया। विश्वराज सिंह मेवाड़ इसी गौरवशाली वंश की 77वीं पीढ़ी के प्रतिनिधि माने जाते हैं।
शिक्षा
विश्वराज सिंह मेवाड़ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान के प्रतिष्ठित मेयो कॉलेज, अजमेर से प्राप्त की। मेयो कॉलेज को भारत के सबसे प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों में गिना जाता है और यहां अनेक राजघरानों तथा राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने शिक्षा प्राप्त की है। स्कूली शिक्षा के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए मुंबई गए। वहां उन्होंने स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी की और व्यवसायिक गतिविधियों से भी जुड़े। शिक्षा के दौरान उन्होंने नेतृत्व, प्रशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कई अनुभव प्राप्त किए।
परिवार और वैवाहिक जीवन

Vishvaraj Singh Mewar wife : विश्वराज सिंह मेवाड़ का विवाह महिमा कुमारी मेवाड़ से हुआ है। महिमा कुमारी पश्चिम बंगाल के पंचकोट राजपरिवार से संबंध रखती हैं और वर्तमान में राजसमंद लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। इस प्रकार यह दंपति राजस्थान की राजनीति और राजपरंपरा दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
परिवार : Vishvaraj Singh Mewar children
| सदस्य | संबंध |
|---|---|
| महेंद्र सिंह मेवाड़ | पिता |
| निरुपमा कुमारी | माता |
| महिमा कुमारी | पत्नी |
| देवजादित्य सिंह | पुत्र |
| जयती कुमारी | पुत्री |
महिमा कुमारी चुनाव प्रचार और सामाजिक गतिविधियों में भी विश्वराज सिंह का सक्रिय सहयोग करती रही हैं।
राजनीति में प्रवेश

विश्वराज सिंह मेवाड़ ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। हालांकि वर्ष 2023 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि लगभग तीन दशक बाद मेवाड़ राजपरिवार की भाजपा में प्रभावी वापसी हुई थी। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को उनकी भाजपा में एंट्री कराने का श्रेय दिया जाता है।
नाथद्वारा से ऐतिहासिक जीत

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने विश्वराज सिंह मेवाड़ को नाथद्वारा सीट से उम्मीदवार बनाया। उनके सामने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पांच बार विधायक रह चुके सी.पी. जोशी थे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव राजस्थान के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक था।
चुनाव परिणाम
| उम्मीदवार | दल |
|---|---|
| विश्वराज सिंह मेवाड़ | भाजपा |
| सी.पी. जोशी | कांग्रेस |
विश्वराज सिंह मेवाड़ ने सी.पी. जोशी को हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इस जीत को मेवाड़ क्षेत्र में भाजपा की बड़ी सफलता माना गया।
विधायक के रूप में कार्य

विधायक बनने के बाद विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कई विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया।
उनकी प्राथमिकताएं रहीं:
- शिक्षा
- पर्यटन विकास
- सांस्कृतिक संरक्षण
- पर्यावरण सुरक्षा
- जल संरक्षण
- ग्रामीण विकास
नाथद्वारा क्षेत्र में विभिन्न विकास योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली जैसी आधुनिक पहल को भी बढ़ावा दिया।
मेवाड़ की संस्कृति और धरोहर संरक्षण

विश्वराज सिंह मेवाड़ को मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षक के रूप में भी देखा जाता है।
वे समय-समय पर:
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग संरक्षण
- विरासत स्थलों के रखरखाव
- धार्मिक परंपराओं
- लोक संस्कृति
से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं।
उनका मानना है कि विकास और विरासत संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
पद्मावत फिल्म विवाद में भूमिका
वर्ष 2017 में फिल्म पद्मावत को लेकर पूरे देश में विवाद हुआ था। विश्वराज सिंह मेवाड़ ने भी फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों के कथित गलत चित्रण को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को पत्र लिखकर मामले पर ध्यान देने की मांग की थी। उनका कहना था कि इतिहास और जनभावनाओं के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
जी-20 सम्मेलन और सिटी पैलेस मुद्दा
विश्वराज सिंह मेवाड़ ने उस समय भी चर्चा बटोरी जब जी-20 सम्मेलन के दौरान मेवाड़ की कुछ ऐतिहासिक संपत्तियों के उपयोग को लेकर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपनी बात रखी थी।
महेंद्र सिंह मेवाड़ का निधन
10 नवंबर 2024 को उनके पिता महेंद्र सिंह मेवाड़ का निधन हो गया। उनके निधन के बाद मेवाड़ राजपरिवार और राजपूत समाज में शोक की लहर दौड़ गई। महेंद्र सिंह मेवाड़ न केवल राजपरिवार के प्रमुख सदस्य थे, बल्कि राजनीति में भी सक्रिय रहे थे और लोकसभा सांसद रह चुके थे।
25 नवंबर 2024: ऐतिहासिक राजतिलक
25 नवंबर 2024 को चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित फतह प्रकाश महल में विश्वराज सिंह मेवाड़ का पारंपरिक राजतिलक किया गया। यह समारोह मेवाड़ के इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गया। राजतिलक में पारंपरिक राजपूत रीति-रिवाजों का पालन किया गया। हजारों लोग इस समारोह के साक्षी बने।
77वें एकलिंग दीवान
मेवाड़ की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि यहां भगवान एकलिंगजी को वास्तविक शासक माना जाता है। महाराणा स्वयं को राजा नहीं बल्कि एकलिंगजी का दीवान मानते हैं। राजतिलक के बाद विश्वराज सिंह मेवाड़ को मेवाड़ का 77वां एकलिंग दीवान माना गया। यह केवल एक उपाधि नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।
सिटी पैलेस विवाद
राजतिलक के बाद विश्वराज सिंह मेवाड़ और उनके चाचा अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार के बीच सिटी पैलेस से जुड़े विवाद ने राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं।
यह विवाद:
- पारिवारिक उत्तराधिकार
- परंपरागत अधिकार
- ऐतिहासिक संपत्तियों
से जुड़ा हुआ है।
मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।
सामाजिक और जनसेवा कार्य
विश्वराज सिंह मेवाड़ राजनीति के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं।
वे विशेष रूप से:
- शिक्षा सुधार
- युवाओं के विकास
- पर्यावरण संरक्षण
- सांस्कृतिक विरासत
से जुड़े अभियानों का समर्थन करते हैं।
विश्वराज सिंह मेवाड़ से जुड़े रोचक तथ्य
- वे महाराणा प्रताप के वंशज हैं।
- मेवाड़ की 77वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- पहली बार चुनाव लड़कर विधायक बने।
- उनकी पत्नी महिमा कुमारी सांसद हैं।
- उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता सी.पी. जोशी को हराया।
- वे मेवाड़ के 77वें एकलिंग दीवान हैं।
- मेयो कॉलेज, अजमेर के छात्र रहे हैं।
- सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के मुखर समर्थक हैं।
- राजसी परंपरा और आधुनिक राजनीति दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
- राजस्थान की राजनीति में उभरते प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं।



