
Hanuman beniwal biography in hindi : राजस्थान की राजनीति में यदि किसी नेता ने अपनी अलग पहचान संघर्ष, किसान आंदोलन और बेबाक अंदाज से बनाई है, तो उनमें हनुमान बेनीवाल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। नागौर जिले की धरती से निकलकर छात्र राजनीति से लेकर लोकसभा तक पहुंचने वाले बेनीवाल आज राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सबसे बड़े चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। किसानों के मुद्दों पर मुखरता से बोलने वाले बेनीवाल कई बार अपनी ही सहयोगी सरकारों के खिलाफ भी खुलकर आवाज उठा चुके हैं।
Hanuman Beniwal Wife : हनुमान बेनीवाल का जन्म 2 मार्च 1972 को राजस्थान के नागौर जिले के बरणगांव गांव में हुआ था। उनके पिता रामदेव बेनीवाल भी राजनीति में सक्रिय रहे और मुंडवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। ऐसे माहौल में पले-बढ़े हनुमान बेनीवाल को बचपन से ही राजनीति और जनसेवा का अनुभव मिला। वे जाट समुदाय से संबंध रखते हैं और ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े होने के कारण किसानों की समस्याओं को बेहद करीब से समझते हैं। यही कारण है कि बाद में उनकी राजनीति का सबसे बड़ा आधार किसान हित और ग्रामीण मुद्दे बने। हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान विश्वविद्यालय, Hanuman Beniwal family जयपुर से बीए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। साल 1995 में वे राजस्थान कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष बने। इसके बाद 1997 में राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पद जीतकर उन्होंने पूरे राज्य में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इससे पहले वे यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज चुनाव भी जीत चुके थे। छात्र राजनीति के दौरान उनका आक्रामक और बेबाक अंदाज काफी चर्चा में रहा। यही शैली बाद में उनकी मुख्य राजनीतिक पहचान बनी।
परिवार और निजी जीवन

Hanuman Beniwal father history : हनुमान बेनीवाल ने 9 दिसंबर 2009 को कनिका बेनीवाल से विवाह किया। उनके एक बेटा आशुतोष और एक बेटी दिव्या हैं। कनिका बेनीवाल श्रीगंगानगर की रहने वाली हैं और उन्होंने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक की पढ़ाई की है। उनके छोटे भाई नारायण बेनीवाल भी राजनीति में सक्रिय रहे और खींवसर सीट से विधायक रह चुके हैं।
बीजेपी से शुरुआत, फिर बगावती तेवर

Hanuman Beniwal education : हनुमान बेनीवाल ने अपने सक्रिय राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से की। साल 2008 में उन्होंने खींवसर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। विधानसभा में पहुंचने के बाद उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर बोलना शुरू किया। हालांकि, समय के साथ भाजपा नेतृत्व से उनके मतभेद बढ़ते गए। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और अन्य नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। इसी विवाद के बाद वर्ष 2013 में भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। लेकिन बेनीवाल पीछे नहीं हटे। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए फिर खींवसर सीट से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित कर दी।

किसान हुंकार रैलियों से बनाई अलग पहचान

भाजपा से अलग होने के बाद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के कई जिलों में किसान हुंकार रैलियों का आयोजन किया। नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, जयपुर और सीकर में आयोजित इन विशाल रैलियों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। इन रैलियों के जरिए उन्होंने किसानों, युवाओं और बेरोजगारों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। बड़ी संख्या में युवाओं और ग्रामीणों का समर्थन मिलने के बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया।
2018 में बनाई राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी

29 अक्टूबर 2018 को हनुमान बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की स्थापना की। पार्टी का चुनाव चिन्ह “बोतल” रखा गया। पार्टी गठन के बाद उन्होंने खुद को किसान, युवा और आम आदमी की आवाज के रूप में पेश किया 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में आरएलपी ने कई सीटों पर चुनाव लड़ा। बेनीवाल ने खींवसर सीट से लगातार तीसरी बार जीत हासिल की। उनकी पार्टी के तीन विधायक भी विधानसभा पहुंचे, जिससे आरएलपी राजस्थान की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों में शामिल हो गई।
नागौर से सांसद बने, लोकसभा में बढ़ा कद
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने भाजपा के साथ गठबंधन कर नागौर सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने बड़ी जीत हासिल करते हुए पहली बार संसद में एंट्री की। लोकसभा में पहुंचने के बाद भी उन्होंने किसानों, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और राजस्थान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनका आक्रामक भाषण और सरकार को सीधे घेरने की शैली अक्सर चर्चा में रही।
किसान आंदोलन में बीजेपी से तोड़ा गठबंधन

2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों का देशभर में विरोध हुआ। उस समय हनुमान बेनीवाल एनडीए गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने खुलकर किसानों का समर्थन किया। उन्होंने तीन संसदीय समितियों से इस्तीफा दे दिया और भाजपा से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसानों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है।दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने राजस्थान से हजारों किसानों को संगठित किया और भारत बंद का भी समर्थन किया। इस कदम के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर किसान नेता के रूप में और मजबूत होकर उभरे।
2023 में चौथी बार विधायक बने
2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने एक बार फिर खींवसर सीट से जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार रेवंत राम को हराकर लगातार चौथी बार विधानसभा में अपनी जगह बनाई। हालांकि, उनकी पार्टी को इस बार ज्यादा सफलता नहीं मिली और वे अकेले विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।
2024 लोकसभा चुनाव में फिर बड़ी जीत
2024 के लोकसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और नागौर सीट से चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार ज्योति मिर्धा को 42 हजार से अधिक वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीता। इस जीत ने साफ कर दिया कि नागौर और आसपास के क्षेत्रों में उनकी पकड़ आज भी बेहद मजबूत है।
खींवसर उपचुनाव में परिवार को झटका
2024 के विधानसभा उपचुनाव में हनुमान बेनीवाल ने अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को खींवसर सीट से चुनाव लड़ाया। हालांकि, इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी उम्मीदवार रेवंत राम डांगा ने जीत हासिल कर बेनीवाल परिवार के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती दी। यह पहली बार था जब खींवसर सीट पर बेनीवाल परिवार के बाहर का कोई उम्मीदवार विजयी हुआ।
राजस्थान की राजनीति में अलग पहचान
हनुमान बेनीवाल को राजस्थान की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो खुलकर बोलने और सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए पहचाने जाते हैं। किसान आंदोलन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और ग्रामीण मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं और किसानों के बीच खासा लोकप्रिय बनाया है। राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चली आ रही दो-दलीय राजनीति के बीच आरएलपी जैसी क्षेत्रीय पार्टी खड़ी करना और उसे विधानसभा व लोकसभा तक पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में गिना जाता है।
अक्सर पुछे जाने वाले प्रश्न
क्या हनुमान बेनीवाल जाट है?
हाँ, हनुमान बेनीवाल राजस्थान के जाट समुदाय से संबंध रखते हैं। वे नागौर जिले के बरणगांव गांव के निवासी हैं और किसान परिवार से आते हैं। जाट समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
यह हनुमान बेनीवाल कौन है?
हनुमान बेनीवाल राजस्थान के प्रमुख राजनेता, किसान नेता और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संस्थापक हैं। वे नागौर लोकसभा सीट से सांसद हैं और खींवसर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। वे किसानों के मुद्दों, भ्रष्टाचार विरोध और बेबाक राजनीति के लिए जाने जाते हैं।
हनुमान बेनीवाल के कितने भाई हैं?
हनुमान बेनीवाल के एक छोटे भाई हैं, जिनका नाम नारायण बेनीवाल है। नारायण बेनीवाल भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं और खींवसर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं।



