
High Blood Pressure Causes आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, बढ़ता तनाव, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण अब कम उम्र के लोग भी इन बीमारियों से प्रभावित होने लगे हैं।
विश्व हाइपरटेंशन दिवस (World Hypertension Day) के मौके पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हो सकते हैं। कई लोग यह समझ नहीं पाते कि शरीर में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल ब्लड प्रेशर को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में इन दोनों स्थितियों के संबंध को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। जब शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर बढ़ने लगता है, तो धीरे-धीरे यह रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की अंदरूनी दीवारों पर जमा होने लगता है। समय के साथ यह जमा हुआ फैट प्लाक का रूप ले सकता है, जिससे नसें संकरी और कठोर होने लगती हैं। रक्त वाहिकाओं के संकरे होने के कारण शरीर में खून का प्रवाह सामान्य तरीके से नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में दिल को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक खून पहुंचाने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। यही अतिरिक्त दबाव धीरे-धीरे हाई ब्लड प्रेशर की वजह बन सकता है।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
High Cholesterol and High BP : दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजीत जैन के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि जब खराब कोलेस्ट्रॉल नसों में जमा होता है, तो रक्त वाहिकाओं की लचक कम होने लगती है। इससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और हार्ट को ज्यादा दबाव बनाकर खून पंप करना पड़ता है। यही स्थिति हाई बीपी का कारण बन सकती है। हालांकि हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा नहीं होता, लेकिन जिन लोगों में मोटापा, डायबिटीज, तनाव, धूम्रपान या पारिवारिक इतिहास जैसी समस्याएं मौजूद हों, उनमें हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर अक्सर साथ-साथ देखने को मिलते हैं।
बढ़ सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा
Heart Disease Risk Factors : स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी लंबे समय तक कंट्रोल में न रहें, तो यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी रोग और अन्य गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और समय रहते इन दोनों समस्याओं को नियंत्रित करने की सलाह देते हैं।

किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
Cholesterol Symptoms and Prevention : हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरण में इनके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
फिर भी कुछ लोगों में निम्न संकेत दिखाई दे सकते हैं:
- बार-बार सिरदर्द होना
- चक्कर आना
- सीने में भारीपन महसूस होना
- सांस फूलना
- अत्यधिक थकान
- दिल की धड़कन तेज महसूस होना
हालांकि ये लक्षण केवल हाई बीपी या कोलेस्ट्रॉल की वजह से ही हों, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग, हाई बीपी या कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा हो, उन्हें समय-समय पर जांच जरूर करवानी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
Heart Health Tips : विशेषज्ञों के अनुसार निम्न स्थितियों में जोखिम और बढ़ जाता है:
- बढ़ता वजन और मोटापा
- कम शारीरिक गतिविधि
- धूम्रपान और शराब सेवन
- डायबिटीज
- तनावपूर्ण जीवनशैली
- फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन
इन कारणों से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और ब्लड प्रेशर असंतुलित होने लगता है।
कोलेस्ट्रॉल और बीपी को कंट्रोल में रखने के उपाय
डॉक्टरों का कहना है कि संतुलित जीवनशैली अपनाकर इन दोनों समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
खानपान में रखें ध्यान
- तला-भुना और ज्यादा नमक वाला भोजन कम करें
- ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं
- फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दालों का सेवन बढ़ाएं
- हेल्दी फैट को डाइट में शामिल करें
नियमित व्यायाम जरूरी
विशेषज्ञ सप्ताह में कम से कम पांच दिन नियमित एक्सरसाइज या वॉक करने की सलाह देते हैं। इससे वजन कंट्रोल में रहता है और दिल भी स्वस्थ रहता है।
तनाव कम करें
मानसिक तनाव भी हाई बीपी का बड़ा कारण माना जाता है। योग, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद तनाव कम करने में मददगार हो सकते हैं।
धूम्रपान और शराब से बचें
स्मोकिंग और अत्यधिक शराब सेवन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को तेजी से बढ़ा सकते हैं।
दवाएं समय पर लें
यदि डॉक्टर ने कोई दवा लिखी है, तो उसे नियमित रूप से लेना बेहद जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए।
नियमित जांच है सबसे जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जांच और सही जीवनशैली अपनाकर हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी जैसी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
नियमित ब्लड प्रेशर चेकअप और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से इन बीमारियों का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है, जिससे गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव हो पाता है।



