
India food inflation November : देश में खुदरा महंगाई यानी रिटेल इंफ्लेशन नवंबर 2025 में थोड़ी बढ़ोतरी के साथ 0.71 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा पिछले महीने अक्टूबर के 0.25 प्रतिशत से काफी ऊपर है, जो मौजूदा CPI सीरीज में अब तक का सबसे निचला स्तर था। सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 12 दिसंबर 2025 को ये आधिकारिक आंकड़े जारी किए, जो आम उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में आए बदलाव को दर्शाते हैं।
इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण सब्जियों, अंडों, मांस-मछली, मसालों तथा फ्यूल एंड लाइट (ईंधन और बिजली) की श्रेणियों में कीमतों में वृद्धि रहा। हालांकि कुल मिलाकर खाद्य महंगाई अभी भी नकारात्मक क्षेत्र में है, लेकिन इसकी गिरावट की रफ्तार कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसमी बारिश और आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) के कम होने से ये बदलाव आए हैं। फिर भी, ये दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी नीचे बनी हुई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
खाने-पीने की वस्तुओं में कीमतों का उतार-चढ़ाव
Vegetable prices impact India CPI : महंगाई की टोकरी यानी CPI बास्केट में खाने-पीने की वस्तुओं का करीब 50 प्रतिशत योगदान होता है। नवंबर में All India Consumer Food Price Index (CFPI) पर आधारित खाद्य महंगाई दर -3.91 प्रतिशत रही, जो अक्टूबर के -5.02 प्रतिशत से बेहतर है। यानी खाद्य वस्तुओं की कीमतें पिछले साल की तुलना में अभी भी सस्ती हैं, लेकिन गिरावट कम हुई है। इस सुधार में सब्जियों, अंडों, मांस-मछली और मसालों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी का बड़ा हाथ है।
दूसरी ओर, दालों, अनाज और कुछ तेलों में कीमतें स्थिर या कम बनी हुई हैं, जिससे कुल खाद्य महंगाई नकारात्मक क्षेत्र में बरकरार है। यह आम लोगों के लिए राहत की बात है, क्योंकि घरेलू बजट का बड़ा हिस्सा खाने-पीने पर खर्च होता है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग तस्वीर
नवंबर में ग्रामीण क्षेत्रों में रिटेल महंगाई दर अक्टूबर के -0.25 प्रतिशत से बढ़कर -0.10 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.88 प्रतिशत से उछलकर 1.40 प्रतिशत पर पहुंच गई। शहरी महंगाई में ज्यादा बढ़ोतरी का कारण हाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं की कीमतें हो सकती हैं। हाउसिंग इंफ्लेशन नवंबर में 2.95 प्रतिशत रही, जो अक्टूबर के 2.96 प्रतिशत से थोड़ी कम है। वहीं, फ्यूल एंड लाइट की महंगाई 1.98 प्रतिशत से बढ़कर 2.32 प्रतिशत हो गई, जिसका असर दोनों क्षेत्रों पर पड़ा।
अक्टूबर में क्यों था 14 साल का निचला स्तर?
India consumer price index : अक्टूबर 2025 में रिटेल महंगाई का 0.25 प्रतिशत का स्तर मौजूदा CPI सीरीज (बेस ईयर 2012) में सबसे कम था, जो करीब 14 साल का निचला स्तर माना जा रहा है। इसका मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी गिरावट था। सितंबर में यह दर 1.44 प्रतिशत थी, जो अचानक कम हो गई। अच्छी फसल, सप्लाई चेन में सुधार और सरकारी नीतियों का असर इससे दिखा।
CPI क्या है और यह कैसे काम करता है?
India CPI November : Consumer Price Index (CPI) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक है, जो सरकार का महंगाई मापने का प्रमुख तरीका है। यह रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे दूध, सब्जियां, पेट्रोल, कपड़े और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को ट्रैक करता है। मौजूदा सीरीज 2012 को बेस ईयर मानती है, यानी 2012 की औसत कीमतों को 100 मानकर तुलना की जाती है।
बेस ईयर वह साल होता है जिसे आधार बनाया जाता है। इसे सामान्य आर्थिक स्थिति वाला साल चुना जाता है – न ज्यादा महंगाई, न सूखा या महामारी। उदाहरण के लिए, अगर बेस ईयर में टमाटर की कीमत 50 रुपये किलो थी और अब 80 रुपये हो गई, तो महंगाई = (80-50)/50 × 100 = 60 प्रतिशत। इसी फॉर्मूले से पूरे बास्केट की गणना होती है।
सरकार हर 5-10 साल में बेस ईयर अपडेट करती है ताकि बदलते उपभोग पैटर्न (जैसे ई-कॉमर्स का बढ़ना) को शामिल किया जा सके। अगली रिवाइज्ड CPI सीरीज फरवरी 2026 में आने की उम्मीद है, जिसमें खाद्य वस्तुओं का वेटेज कम और गैर-खाद्य का ज्यादा हो सकता है।
महंगाई बढ़ती या घटती क्यों है?
India inflation rate : महंगाई मुख्य रूप से डिमांड और सप्लाई के संतुलन पर निर्भर करती है। अगर लोगों की आय बढ़ेगी और वे ज्यादा खरीदारी करेंगे, तो डिमांड बढ़ेगी। सप्लाई कम होने पर कीमतें चढ़ेंगी। वहीं, अच्छी फसल या आयात बढ़ने से सप्लाई ज्यादा हो तो कीमतें गिरेंगी। मौसम, वैश्विक कीमतें, सरकारी नीतियां और आधार प्रभाव भी बड़ा रोल निभाते हैं।
नवंबर की इस मामूली बढ़ोतरी के बावजूद, विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में औसत CPI महंगाई RBI के 2 प्रतिशत के अनुमान से भी नीचे रह सकती है। यह अर्थव्यवस्था की मजबूती और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति के लिए अच्छा संकेत है। आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि ये महंगाई के सबसे बड़े ड्राइवर हैं।
